Monday, 2 November 2015

बच्चे की चाहत में गई थी अस्पताल, घर आई डेड बॉडी

ज्योति के हसते खेलते परिवार में एक बच्चे की तमन्ना थी। शारीरिक रूप से बिल्कुल स्वस्थ ज्योति एक छोटी सी समस्या के लिए डॉक्टर के पास गई। ज्योति को यह उम्मीद थी कि इस समस्या का समाधान होने के बाद उसकी गोद फिर हरी-भरी हो जाएगी। पर उसे क्या पता था कि इस करवा चौथ का चांद वह देखने से पहले ही इस दुनिया छोड़कर चली जाएगी।

32 वर्षीय ज्योति को अनियमित माहवारी और ब्लीडिंग की प्रॉब्लम थी। उसे एक बच्चा चाहिए था। ऐसे में ज्योति को इस समस्या से निजात पाना था। परिवार वाले उसे बनी पार्स्थिक स्थित एक अस्पताल में लेकर गए। ज्योति हंसते-मुस्कुराते अस्पताल तो गई लेकिन फिर घर वापस नहीं आ पाई।
ज्योति और उसकी रिलेटिव। ज्योति के भाई पुनीत अग्रवाल ने बताया कि जगतपुरा में दोनों भाई बहन का मकान आस-पास ही है। ज्योति के पति दीपक बिश्नोई बिल्डर हैं। ज्योति ने अपनी समस्या बताते हुए यह कहा कि उसकी एक फ्रेंड ने इस प्रॉब्लम का इलाज बनी पार्क स्थित मीरा हॉस्पिटल में कराया है। ऐसे में वह भी वहीं इलाज कराना चाह रही थी। डॉक्टर ने कहा कि एक छोटा सा ऑपरेशन करना पड़ेगा। ऑपरेशन 29 को होना था। 30 को करवा चौथ था। डॉक्टर्स ने कहा कि ऑपरेशन खाली पेट करना है। ऐसे में उसने पुनीत से कहा कि भइया मैं दो दिन उपवास रखूंगी। 29 और 30 को। वह अपने साथ लाल साड़ी और सजने संवारने का सामान भी हॉस्पिटल साथ ले गई थी, ताकि ऑपरेशन के बाद वह वहीं करवा चौथ मना सके।
पुनीत ने बताया कि 29 अक्टूबर को बहन का ऑपरेशन होने वाला था। सब हॉस्पिटल में ही पिज्जा मंगाकर पार्टी कर रहे थे। इस ऑपरेशन के बाद बहन की समस्या खत्म जाती और और उसकी गोंद भर जाती। पर सभी को क्या पता था कि यह ऑपरेशन उसकी जान ले लेगा। 28 अक्टूबर को उसकी बहन ने एक किट्टी पार्टी को भी काफी एंजॉय किया था। वह बिल्कुल हेल्दी थी। उसकी शादी के 11 साल बाद एक बेटा हुआ था। इसके बाद से उसको यह प्रॉब्लम थी। वह एक और बच्चा चाह रही थी।

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