उल्लेखनीय
है कि 1999 में सबसे पहले एनडीए सरकार ने ही ऐसे आंकड़े सार्वजनिक किए थे,
जिसमें बताया गया था कि पुलिस में कितने लोग मुस्लिम समुदाय हैं।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) महानिदेशक अर्चना रामसुंदरम
का दावा है कि यह फैसला एनसीआरबी पब्लिकेशन के परफॉर्मा रिवीजन का हिस्सा
है।
एनसीआरबी की रिपोर्ट में यह आंकड़े जाहिर किए जाते रहे हैं। इसमें सिर्फ
मुस्लिम समुदाय के लोगों की ही अलग से जानकारी दी जाती थी। 'क्राइम इन
इंडिया' नाम की एक सालाना रिपोर्ट में 'पुलिस स्ट्रेन्थ, एक्सपेन्डिचर एंड
इन्फ्रास्ट्रक्चर' चैप्टर में यह जानकारी दी जाती थी।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक 2013 में विभाग में मुस्लिमों की संख्या में
गिरावट आई है और वे 6.27 फीसदी रह गए। एनसीआरबी के मुख्य सांख्यिकी
अधिकारी अखिलेश कुमार ने एक अखबार से बातचीत में कहा कि पुलिस स्ट्रेन्थ और
इन्फ्रास्ट्रक्चर का रिकॉर्ड प्रशासनिक मसला है। अब यह फैसला लिया गया है
कि इसके रिकॉर्ड सार्वजनिक नहीं किए जाएं।
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