एचएसबीसी ने भारत में निजी बैंकिंग सेवा बंद करने का फ़ैसला किया है. इस
सेवा के तहत बैंक अमीरों के एसेट का प्रबंधन करते हैं. भारतीय
अर्थव्यवस्था में आई तेज़ी और देश में अमीरों की बढ़ती संख्या से कई विदेशी
बैंकों ने भारत में निजी बैंकिंग सेवा शुरू की, लेकिन बैंकों को जैसी
उम्मीद थी, वैसा कारोबार नहीं कर पा रहे हैं. ग्राहकों को एचएसबीसी की रिटेल शाखा में जाने का विकल्प दिया जाएगा. वेल्थ मैनेजमेंट में काम कर रहे बैंक के 70 कर्मचारियों का भविष्य अगले साल के आरंभ में तय होगा. एचएसबीसी से पहले, आरबीएस और मॉर्गन स्टेनली ने एशिया से अपना व्यापार समेटा लिया था. इसी
साल जून में कंपनी के मुख्य अधिकारी स्टुअर्ट गुलिवर ने घोषणा की थी कि
कंपनी रिस्ट्रक्चरिंग के तहत ज़ारों की संख्या में नौकरियों में कटौती
करेगी. भारत में एचएसबीसी के प्रवक्ता ने कहा, ''एचएसबीसी
ग्रुप की इस स्ट्रैटेजी से बिज़नेस को सरल किया जाएगा और स्थाई प्रगति पर
ध्यान देगा.'' भारत में 32 हज़ार लोग एचएसबीसी की कॉर्पोरेट, खुदरा और पूंजी निवेश बैंकिंग सर्विसेज़ से जुड़े हैं.
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