Friday, 27 November 2015

दुनिया के देशों में आज भी होता है औरतों का खतना

दुनिया के 29 देशों में आज भी होता है औरतों का खतना
फ्रीकी देश जाम्बिया ने देश में औरतों के खतने पर पाबंदी लगा दी है। इन्फॉर्मेशन मिनिस्ट्री ने दो दिन पहले सरकार के इस फैसले की पुष्टि की। मिनिस्ट्री के बयान के मुताबिक, राष्ट्रपति याहया जामेह ने कहा कि एफजीएम के लिए न तो इस्लाम में कोई जगह है और न ही देश की मॉडर्न सोसाइटी में। एंटी-एफजीएम एक्टिविस्ट बरहेन रासवर्क ने इसे पॉजिटिव स्टेप करार दिया। उन्होंने कहा कि ये गैर सरकारी संगठनों और महिला एक्टिविस्ट्स द्वारा एफजीएम के खिलाफ 30 साल से किए जा रहे संघर्ष का नतीजा है।
जाम्बिया अब उन 20 अफ्रीका देशों में शामिल हो गया है, जिन्होंने एफजीएम पर पाबंदी लगा दी है। हालांकि, दुनिया में अब भी ऐसे 29 देश हैं, जहां बच्चियों और महिलाओं के लिए खतना जैसी परंपरा जारी है। खासकर अफ्रीका और मिडल ईस्ट के देशों में ये परंपरा बिल्कुल आम है। इन देशों में ये मान्यता है कि लड़कियों को शादी के लिए तैयार करने के लिए क्लिटोरिस (भग्नासा) को काटना जरूरी होता है। इसका नतीजा ये हो रहा है कि महिलाओं में जननांग विकृतियां (जेनेटाइल मालफॉर्मेशन) समेत स्वास्थ्य से जुड़ी तमाम तकलीफें हो रही हैं।
मिस्र
मिस्र में इस प्रक्रिया से गुजरने वाली लड़कियों और महिलाओं की संख्या सबसे ज्यादा है। आमतौर पर 9 से 12 साल की उम्र में ही लड़कियों का खतना कर दिया जाता है। मिस्र सरकार की ओर से मई में जारी रिपोर्ट के मुताबिक, यहां 92 फीसदी शादीशुदा महिलाएं खतना की प्रक्रिया से गुजर चुकी हैं। 2000 में ये आंकड़ा 97 फीसदी था। यूएन के आंकड़ों के मुताबिक, इस प्रक्रिया से गुजरने वाली सबसे ज्यादा महिलाएं मिस्र की हैं।
 
फ्रेंच गुयाना
दक्षिण अफ्रीकी देश गुयाना को आधिकारिक तौर फ्रेंच गुयाना के नाम से जाना जाता है। यहां खतना गैरकानूनी है, इसके बावजूद
दुनिया में खतने के मामले में यह दूसरे नंबर पर है। 2005 के एक सर्वे के मुताबिक, 15 से 49 साल की 96 फीसदी महिलाएं खतना की प्रक्रिया से गुजरीं। इसके लिए यहां धर्म या क्षेत्र का कोई भेद नहीं है।

माली
दक्षिण अफ्रीका में स्थित माली में भी खतना परंपरा आम है। डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों के मुताबिक, माली में 2006 में 15-49 साल की उम्र की 85.2 फीसदी महिलाएं इस प्रक्रिया से गुजरीं। वहीं, 2007 की एक रिपोर्ट में यह आंकड़ा करीब 92 फीसदी देखा गया। यहां के सोनरई, तामाचेक और बोजो लोगों में ही इसका आंकड़ा कम है। माली में 64 फीसदी महिलाएं एफएमजी को धार्मिक दृष्टि से जरूरी मानती हैं। यहां इसके खिलाफ अब तक कोई सख्त कानून भी नहीं है।

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