बूचड़खानों पर बैन लगाने से स्वयं ही गो वंश की संख्या में इजाफा नहीं होता
है। सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो एमपी जैसे राज्य में गौ हत्या पर
पाबंदी है लेकिन पिछले एक दशक में वहां के ग्रामीण क्षेत्रों में गोवंश की
संख्या में 40 फीसदी की कमी पाई गई है।
नेशनल सैंपल सर्वे के अनुसार, 2003 से 2013 के बीच कम से कम नौ राज्यों के ग्रामीण परिवारों में गोवंश की संख्या में कमी देखी गई है।
केरल, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल, एमपी, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, पंजाब और मणिपुर के ग्रामीण परिवारों में पिछले 10 सालों में एक करोड़ 60 लाख गोवंश की कमी देखने को मिली है।
आंकड़ों के अनुसार, केरल, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल के ग्रामीण इलाकों में गोवंश की संख्या में क्रमशः 75 फीसदी, 31 फीसदी और 27 फीसदी की कमी देखी गई है। हालांकि वहां पर बूचड़खानों पर बैन नहीं है।
लेकिन एमपी, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड और पंजाब में गोवंश की संख्या में क्रमशः 43, 27, 18, 7 और 2 फीसदी की कमी पाई गई है। इन राज्यों में गोवध पर प्रतिबंध है। इन राज्यों में भाजपा या उनके सहयोगी दलों की सरकारें हैं।
हालांकि पूर्वोत्तर के राज्यों में बूचड़खानों पर कोई प्रतिबंध नहीं है और बीफ ज्यादा खाया जाता है फिर भी वहां पर गोवंश की संख्या में इजाफा देखा गया है।
बिहार, यूपी, ओडिशा, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडू और आंध्र प्रदेश में गोवंश की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है, जबकि पिछले दशक में इन राज्यों में गोवंश की हत्या पर कोई बैन नहीं था।
केरल, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल, एमपी, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, पंजाब और मणिपुर के ग्रामीण परिवारों में पिछले 10 सालों में एक करोड़ 60 लाख गोवंश की कमी देखने को मिली है।
आंकड़ों के अनुसार, केरल, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल के ग्रामीण इलाकों में गोवंश की संख्या में क्रमशः 75 फीसदी, 31 फीसदी और 27 फीसदी की कमी देखी गई है। हालांकि वहां पर बूचड़खानों पर बैन नहीं है।
लेकिन एमपी, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड और पंजाब में गोवंश की संख्या में क्रमशः 43, 27, 18, 7 और 2 फीसदी की कमी पाई गई है। इन राज्यों में गोवध पर प्रतिबंध है। इन राज्यों में भाजपा या उनके सहयोगी दलों की सरकारें हैं।
हालांकि पूर्वोत्तर के राज्यों में बूचड़खानों पर कोई प्रतिबंध नहीं है और बीफ ज्यादा खाया जाता है फिर भी वहां पर गोवंश की संख्या में इजाफा देखा गया है।
बिहार, यूपी, ओडिशा, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडू और आंध्र प्रदेश में गोवंश की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है, जबकि पिछले दशक में इन राज्यों में गोवंश की हत्या पर कोई बैन नहीं था।
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