Thursday, 26 November 2015

संसद में विपक्ष और सत्तापक्ष में टकराव

असहिष्णुता मुद्दा: संसद में विपक्ष और सत्तापक्ष में टकराव; सरकार पर सोनिया का पलटवार, बोलीं- खतरे में संविधानसंसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन असहिष्णुता के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोपों-प्रत्यारोपों के तीर चले। विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया कि संविधान के जिन आदर्शों ने हमें दशकों से प्रेरित किया, उस पर खतरा मंडरा रहा है, उस पर हमले हो रहे हैं। वहीं सरकार ने पलटवार में कहा कि संविधान की प्रस्तावना में बाद में शामिल किये गए ‘सेकुलर’ शब्द का सर्वाधिक राजनीतिक दुरूपयोग किया जा रहा है।
बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर की 125वीं जयंती के अवसर पर भारत के संविधान के प्रति प्रतिबद्धता’ विषय पर दो दिवसीय विशेष चर्चा का आयोजन किया गया है। राज्यसभा में भी यही चर्चा होनी थी लेकिन उसके सदस्य खेखिहो झिमोमी का आज सुबह निधन हो जाने के कारण उनके सम्मान में उच्च सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई।
लोकसभा में चर्चा में हिस्सा लेते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने ‘असहिष्णुता’ के मुद्दे पर नरेन्द्र मोदी सरकार को निशाने पर लेते हुए आरोप लगाया कि संविधान के जिन आदर्शों ने हमें दशकों से प्रेरित किया, उस पर खतरा मंडरा रहा है, उस पर हमले हो रहे हैं।
सोनिया ने राजग सरकार का नाम लिये बिना कहा, ‘ हमें पिछले कुछ महीनों में जो कुछ देखने को मिला है, वह पूरी तरह से उन भावनाओं के खिलाफ है जिन्हें संविधान में सुनिश्चित किया गया है।’
चर्चा की शुरूआत करते हुए गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि कांग्रेस पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि 42वें संशोधन के तहत संविधान की प्रस्तावना में शामिल किए गए ‘सेक्युलर ’ शब्द का आज की राजनीति में सर्वाधिक दुरूपयोग हो रहा है, जो बंद होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे देश में सद्भाव का माहौल बनाने में कठिनाई आ रही है। उन्होंने साथ ही कहा कि संविधान की प्रस्तावना में 42वें संशोधन के जरिए जोड़े गए सेक्युलर शब्द का औपचारिक अनुवाद पंथ निरपेक्ष है , धर्म निरपेक्ष नहीं। उन्होंने कहा, ‘ धर्मनिरपेक्ष शब्द का प्रयोग बंद होना चाहिए। इसके स्थान पर पंथ निरपेक्षता का इस्तेमाल होना चाहिए।’
चर्चा के समय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सदन में मौजूद थे। गृह मंत्री ने देश में कथित असहिष्णुता के नाम पर देश छोड़ने की बात करने वालों को निशाने पर लेते हुए कहा कि संविधान निर्माता बाबा साहब डा. भीमराव अम्बेडकर को समाज के निचले तबके से ताल्लुक रखने के कारण कई बार अपमान, प्रताड़ना और तिरस्कार का शिकार होना पड़ा लेकिन ‘‘उन्होंने कभी देश छोड़ने की बात नहीं कही।’ उनकी यह टिप्पणी फिल्म अभिनेता आमिर खान की उन टिप्पणियों को लेकर पैदा हुए विवाद की पृष्ठभूमि में आयी हैं जिनमें बालीवुड अभिनेता ने देश में हालिया कुछ घटनाओं पर चिंता जाहिर करते हुए अपनी पत्नी किरण राव के हवाले से कहा था कि उन्हें हिंदुस्तान छोड़कर चले जाना चाहिए।
सोनिया गांधी ने सत्ता पक्ष पर प्रहार करते हुए कहा, ‘ जिन लोगों
को संविधान में कोई आस्था नहीं रही, न ही इसके निर्माण में जिनकी कोई भूमिका रही है, वो इसका नाम जप रहे है, अगुवा बन रहे हैं। संविधान के प्रति वचनबद्ध होने पर बहस कर रहे हैं। इससे बड़ा मजाक और क्या हो सकता है। ’ अपने हमले को धारदार बनाने के लिए डा. अंबेडकर को उद्धृत करते हुए सोनिया ने कहा, ‘ डा. अबेडकर ने चेताया था कि कोई भी संविधान कितना भी अच्छा क्यों न हो लेकिन अगर उसे लागू करने वाले बुरे होंगे तो वह निश्चित रूप से बुरा ही साबित होगा और कितना भी बुरा संविधान क्यों न हो लेकिन उसे लागू करने वाले अच्छे हो तो वह अच्छा साबित हो सकता है।’
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत की आरक्षण संबंधी टिप्पणी की पृष्ठभूमि में राजनाथ ने कहा कि बाबा साहब ने कहा था कि आरक्षण की व्यवस्था की सामाजिक राजनीतिक आवश्यकता है। उन्होंने कहा, ‘ बाबा साहब मानते थे कि सबको समान स्तर पर लाना है तो आरक्षण तो हो ही साथ ही छुआछूत पहले खत्म हो।’ उन्होंने इस बात पर अफसोस जताया कि आज आरक्षण को राजनीतिक मुद्दे के रूप में लिया जाता है जबकि यह चुनावी , राजनीतिक मुद्दा नहीं है। उन्होंने कहा, ‘ इस पर बहस की जरूरत ही नहीं है।’ आरक्षण पर उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, ‘ यह संवैधानिक व्यवस्था है। आरक्षण की व्यवस्था सोच-समझकर की गयी थी। इसको किसी भी सूरत में हल्का नहीं किया जाना चाहिए।’ अम्बेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ ही राजनाथ ने राष्ट्र निर्माण में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू , पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल के योगदान को भी याद किया।

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