Sunday, 29 November 2015

400 साल की परंपरा तोड़ महिला ने शनि देव को चढ़ाया तेल, मंदिर का हुआ शुद्धिकरण

मुंबई. महाराष्ट्र के शनि शिंगणापुर में एक महिला द्वारा शनि महाराज को तेल चढ़ाने पर विवाद शुरू हो गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रविवार को मंदिर का शुद्धिकरण किया गया। ट्रस्ट का कहना है कि 400 साल की परंपरा में पहली बार किसी महिला ने मंदिर के चबूतरे पर चढ़कर शनि महाराज को तेल चढ़ाया। यहां ऐसा नहीं होता है।
क्यों हुआ बवाल?
> मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो शनिवार दोपहर तीन बजे पुणे की एक महिला अचानक शनि मंदिर के चबूतरे पर पहुंच गई। उसने वहां तेल अर्पित कर दर्शन कर लिए। सिक्युरिटी गार्ड्स को बाद में मामला समझ आया, लेकिन तब तक महिला वहां से निकल चुकी थी। उस वक्त वहां कई श्रद्धालु मौजूद थे।
> 15 साल पहले भी शनि मंदिर में महिलाओं की एंट्री पर बैन का विरोध हुआ था। तब जाने-माने रंगकर्मी डॉ. श्रीराम लागू भी महिलाओं के पक्ष में मुहिम से जुड़े थे।
मंदिर के ट्रस्ट ने क्या कहा?
> शनि मंदिर के ट्रस्टी सयाराम बनकर ने कहा- इस घटना से देवस्थान की सुरक्षा-व्यवस्था की पोल खुल गई। इससे श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुई हैं। घटना के बाद ग्राम सभा ने फैसला किया कि मंदिर का शुद्धिकरण करना जरूरी है।
> परंपरा के मुताबिक, इस मंदिर में पिछले 400 साल से किसी महिला को तेल चढ़ाने या अंदर जाकर पूजन करने की इजाजत नहीं है। ट्रस्ट का दावा है कि मुंबई हाईकोर्ट ने भी पहले इस परंपरा को सही ठहराया था।
क्या हुई कार्रवाई?
इधर, ग्राम सभा ने कार्रवाई करते हुए 7 सिक्युरिटी गार्ड्स को सस्पेंड कर दिया है। घटना के विरोध में शनि शिंगणापुर में बंद का एलान भी हुआ किया गया है। बता दें कि महाराष्ट्र में शिर्डी के पास शनि शिंगणापुर मंदिर स्थित है। रोजाना हजारों श्रद्धालु यहां आते हैं।
लोगों ने किया सपोर्ट?
अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति की सदस्य रंजना गवांदे ने कहा कि महिला की हिम्मत का हम स्वागत करते हैं। जब देश में महिला-पुरुषों को बराबरी हासिल है तो कई मंदिरों में महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी क्यों है? शनि शिंगणापुर में यह क्रांतिकारी घटना हुई है। इस पर राजनीति न हो और मंदिर को महिलाओं के लिए खोला जाए।
क्या है व्यवस्था?
> मंदिर में शनि महाराज की शिला खुले में रखी गई है। वहां दूर से दर्शन होते हैं। चबूतरे के पास तक सिर्फ पुरुष जा सकते हैं। हमारी सहयोगी वेबसाइट divyamarathi.bhaskar.com के मुताबिक, तेल चढ़ाने वाली महिला नहीं, बल्कि 18-20 साल की युवती थी।
> बताया जाता है कि शनि शिंगणापुर कस्बे के किसी भी घर में दरवाजा (गेट) नहीं है और न ही यहां घरों में ताला लगाया जाता है।

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