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क्या है मामला?
- मामला शनिवार-रविवार की रात का है। दरअसल, बेंगलुरु से
यशवंतपुर-बीकानेर एक्सप्रेस में बैठे पंकज जैन सफर की शुरुआत के साथ ही
चिंता में थे। उनकी ट्रेन रविवार सुबह 4 बजे मेड़तारोड पहुंचनी थी।
- पंकज को चिंता थी कि सिफ पांच मिनट की स्टॉपेज में वह अपने बीमार पिता सुमेरमल जैन और सामान के साथ कैसे स्टेशन पर उतरेंगे।
- पंकज के साथ उसकी मां और बहन भी थीं।
- इस चिंता के बीच उन्होंने अपने मिलने वालों को फोन लगाए। किसी ने
सुझाव दिया कि रेल मंत्री सुरेश प्रभु को ट्वीट कर अपनी परेशानी बताओ।
- पंकज ने शाम साढ़े छह बजे अपनी बात ट्वीट के जरिए रेलमंत्री तक पहुंचाई। तुरंत रेलमंत्री का जवाब आया - आपको परेशानी नहीं होगी।
- रात साढ़े आठ बजे आबूरोड में टीटी उनकी बर्थ तक आए और कहा कि मेड़तारोड में पूरे इंतजाम मिलेंगे, आप जरा भी चिंता नहीं करें।
बुटाटीधाम के लिए टैक्सी भी करवाई
-आश्वासन के बाद भी पंकज पूरी रात सो नहीं पाए। ट्रेन तय वक्त से करीब
एक घंटे देर से रविवार सुबह साढ़े चार बजे मेड़तारोड के तीन नंबर
प्लेटफॉर्म पर पहुंची।
- पंकज ने कोच का गेट खोला तो सामने स्टेशन मास्टर अमर सिंह, एक कुली और व्हीलचेयर के साथ मददगार तैयार खड़े थे।
- सभी ने लकवाग्रस्त सुमेरमल जैन को मिलकर उतारा। इस दौरान ट्रेन दस मिनट तक रुकी रही।
- मुख्य गेट तक पहुंचने के लिए लंबा रास्ता तय करना होता है। स्टेशन
मास्टर और उनकी टीम उनके साथ रही। उन्होंने रेल लाइन क्रॉस कर मुख्य गेट तक
पहुंचाया।
- पंकज ने बताया कि उन्हें अपने पिता के इलाज के लिए बुटाटी धाम जाना है। इस पर उन्हें टैक्सी भी मुहैया करवाई गई।
पंकज को नहीं थी सरकारी सिस्टम से ऐसी मदद की उम्मीद
- पंकज के मुताबिक, शनिवार को मैसेज मिलने के बाद भरोसा नहीं था कि
सरकारी सिस्टम से ऐसी मदद मिलेगी। लेकिन अब इस बात का भरोसा नहीं हो रहा है
कि इतनी मदद मिल भी सकती है।
इसके पहले ट्वीट ने महिला को छेड़छाड़ से बचाया था
- इससे पहले महाराष्ट्र में भी एक महिला द्वारा ट्विटर हैंडल पर मैसेज करने पर रेल मंत्री ने उसके लिए मदद भेजी थी।
- वह महिला अकेले सफर कर रही थी और एक पैसेंजर परेशान कर रहा था।
- उसके इस मैसेज के बाद अगले ही स्टेशन पर आरपीएफ के जवान आए और उस पैसेंजर को ले जाकर अगले कोच में बिठा दिया।
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