जब जिस वक्त उसे अपने जीवनसाथी की सबसे ज्यादा जरुरत थी तब उसकी पत्नी ने भी उसका साथ छोड़ दिया और अपने बच्चों एक 7 साल के बेटे और 3 साल की बेटी को भी उसके पास छोड़ कर चली गई। अब उसका 7 साल का बेटा यंग्लिन उसकी केयर कर रहा है और अपने पिता को खाना खिलाने से लेकर उसके सारे काम करता है । उसका बेटा स्कूल भी पढ़ने जाता है और स्कूल से आने के बाद सड़कों की सफाई करता है जिससे उनके घर का गुजारा चल सके और अपाहिज लोगों को हर महीने मिलने वाले 300 रेन्मेन्बी के भत्ते में ही गुजारा करते है।
पिता ने बताया कि वह खुद यह सोचकर आत्महत्या करने की कगार पर था कि वह अपने बेटे पर कितना बोझ बन रहा हूं। इससे बेहतर मैं उसे अकेला छोड़ जाऊं। लेकिन मैं निश्चित हो गया कि मैं अपने बेटे को अनाथ नहीं छोड़ सकता। यंग्लिन ने बताया कि उसे किसी और बात के अलावा बस इतनी उम्मीद है कि जल्दी ही वह बड़ा होगा और अपने पिता के इलाज के लिए पैसे कमाएगा। उसने कहा, ''मैं अपने पिता के बिना नहीं रह सकता।''
No comments:
Post a Comment