न्यूयार्क के इथाका कॉलेज में सहायक प्रोफेसर शोषन्ना कोल ने मिट्टी के
नीचे के इस प्राचीन चट्टान के बारे में पता लगाने के लिए 2003 मार्स
एक्सप्लोरेशन रोवर स्पिरिट के विभिन्न उपकरणों द्वारा प्राप्त कई प्रकार के
आंकड़ों का उपयोग किया। कॉर्नेल यूनिवर्सिटी में अपने पीएचडी शोधलेख के
लिए इस क्षेत्र का अध्ययन शुरू करने वाली कोल ने कहा कि उनका अध्ययन
कंबरलैंड रिज के वॉचटावर क्लास और हस्बैंड हिल पर केंद्रित था।
उन्होंने कहा वाचटावर क्लास के बारे में विशेष बात यह है कि ये व्यापक
क्षेत्र में फैला है और हम लोग इसे विभिन्न जगहों पर देख सकते हैं। जहां तक
हम लोग बता सकते हैं कि यह वहां की भूमि का हिस्सा है जिसका मतलब है कि ये
पर्वत पर्यावरण के साक्षी रहे हैं जो अरबों वर्ष पहले मंगल पर अस्तित्व
में था। मंगल के इस क्षेत्र पर पूर्व के अध्ययनों के आंकडों को संयोजित
करने पर कोल को कुछ पेचीदा पैटर्न दिखा।
स्पिरिट के अल्फा प्रोटॉन एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर (एपीएक्सएस) द्वारा
प्राप्त आंकड़ों में इन पर्वतों की रासायनिक संरचना समान थी लेकिन विभिन्न
उपकरणों से चट्टान अलग दिखाई दिये। इसी आधार पर जब कोल ने विश्लेषण किया तो
वह इस निष्कर्ष पर पहुंची कि मंगल पर अम्लीय कोहरा है।
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