फिल्म के बारे में बात करते हुए नीतू ने कहा कि फिल्म की कहानी बिहार से लोगों के पलायन पर आधारित है। ये सिर्फ बिहार के युवाओं की कहानी ही नहीं है बल्कि पूरे देश की कहानी है लेकिन इसकी पृष्ठभूमि बिहार की है। नीतू ने कहा कि बिहार कि छवि को धूमिल करने में बॉलीवुड भी पीछे नहीं रहा है। फिल्मों में बिहार की सच्चाई ना दिखा कर मजाक उड़ाया जाता है या फिर अपराध को बढ़ा चढ़ा कर दिखाया जाता है।उन्होंने कहा 'बॉलीवुड में बिहार को मजाकिया तौर पर फिल्माया जाता है या किरदार को मजाक के तौर पर पेश किया जाता है अथवा भाषा का मजाक उड़ाया जाता है। नीतू ने कहा फिल्म में एक डायलॉग हैं 'बिहार को लोग कानों से देखते है, आंखों से नहीं।' उन्होंने कहा, सुनी सुनाई बातों से लोगों ने एक धारणा बना ली है कि वहां कट्टा चलाया जाता है। वहां अपहरण हो जाता है। मैनें वहीं पर अपना पूरा बचपन बिताया है लेकिन कभी मैनें कोई कट्टा नहीं देखा। जो देश के दूसरे हिस्से में होता है वहां भी वहीं होता है।'नीतू ने कहा कि बिहार से ही जुड़े कुछ फिल्मकारों ने बिहार की ऐसी छवि बना दी है की लोग वहां जाने से भी डरते हैं। लेकिन फिल्मकार बिहार के आईएएस, आईपीएस, वैज्ञानिक, डॉक्टर, इंजिनियर्स और मीडिया पर्सन्स की सफलता की कहानी नहीं दिखाते।नीतू ने कहा 'मेरे लिए ये सिर्फ फिल्म नहीं बल्कि एक मुहिम है और मुझे उम्मीद हैं कि इस फिल्म से बिहार की छवि बदलेगी।'
Wednesday, 4 November 2015
बिहार को बदनाम करने में बॉलीवुड का भी हाथ: नीतू चंद्रा
फिल्म के बारे में बात करते हुए नीतू ने कहा कि फिल्म की कहानी बिहार से लोगों के पलायन पर आधारित है। ये सिर्फ बिहार के युवाओं की कहानी ही नहीं है बल्कि पूरे देश की कहानी है लेकिन इसकी पृष्ठभूमि बिहार की है। नीतू ने कहा कि बिहार कि छवि को धूमिल करने में बॉलीवुड भी पीछे नहीं रहा है। फिल्मों में बिहार की सच्चाई ना दिखा कर मजाक उड़ाया जाता है या फिर अपराध को बढ़ा चढ़ा कर दिखाया जाता है।उन्होंने कहा 'बॉलीवुड में बिहार को मजाकिया तौर पर फिल्माया जाता है या किरदार को मजाक के तौर पर पेश किया जाता है अथवा भाषा का मजाक उड़ाया जाता है। नीतू ने कहा फिल्म में एक डायलॉग हैं 'बिहार को लोग कानों से देखते है, आंखों से नहीं।' उन्होंने कहा, सुनी सुनाई बातों से लोगों ने एक धारणा बना ली है कि वहां कट्टा चलाया जाता है। वहां अपहरण हो जाता है। मैनें वहीं पर अपना पूरा बचपन बिताया है लेकिन कभी मैनें कोई कट्टा नहीं देखा। जो देश के दूसरे हिस्से में होता है वहां भी वहीं होता है।'नीतू ने कहा कि बिहार से ही जुड़े कुछ फिल्मकारों ने बिहार की ऐसी छवि बना दी है की लोग वहां जाने से भी डरते हैं। लेकिन फिल्मकार बिहार के आईएएस, आईपीएस, वैज्ञानिक, डॉक्टर, इंजिनियर्स और मीडिया पर्सन्स की सफलता की कहानी नहीं दिखाते।नीतू ने कहा 'मेरे लिए ये सिर्फ फिल्म नहीं बल्कि एक मुहिम है और मुझे उम्मीद हैं कि इस फिल्म से बिहार की छवि बदलेगी।'
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