Thursday, 22 October 2015

रिक्शा चालक से वैज्ञानिक बने धर्मवीर कंबोज

main अगर जज्बा हो तो इंसान क्या नहीं कर सकता। इसकी बेहतरीन मिसाल हैं यमुनानगर के रहने वाले धर्मवीर कंबोज। कभी दिल्ली की सड़कों पर रिक्शा चलाने वाले यमुनानगर के धर्मवीर कंबोज अब कृषि वैज्ञानिक हैं।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी की दुनिया में धर्मवीर ने कुछ नया और अलग करने की ठानी। धर्मवीर की इसी लगन और हौसले के बल पर इन्हें न सिर्फ देश के नंबर 1 किसान का तमगा मिला बल्कि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इन्हें 21 दिन तक राष्ट्रपति भवन में भी बतौर मेहमान रखा। नई तकनीकि और नई सोच के जरिए खेतों में दाल, चावल, गन्ना और दलहन की खेती न करके धर्मवीर कंबोज ने औषधीय खेती की। धर्मवीर ने जब हर्बल खेती शुरु की तो तमाम मुश्किलें आईं। शुरुआत में फसल खराब हो जाती थी, लेकिन फसलों में दवा के छिड़काव के लिए धर्मवीर ने नई मशीन भी तैयार कर ली।
इसे धर्मवीर की कई सालों की तपस्या ही कहेंगे कि अब यमुनानगर के आसपास एलोवीरा, आंवला ईसबगोल, और ग्वारपाठा समेत तमाम औषधीय बूटियों की खेती की जा रही है। धर्मवीर की ये नई सोच सिर्फ खेती तक ही नहीं थी। इन्होंने गुलाब की पत्तियों से गुलाब का अर्क भी बनाना शुरु कर दिया। जो गुलाब का अर्क लोगों को महंगा मिलता था उसे धर्मवीर सस्ते दाम में सप्लाई करने लगे। गुलाब अर्क की मांग बढ़ी तो धर्मवीर ने एलोविरा और आंवले का जूस भी बनाना शुरु किया।

धर्मवीर के नंबर 1 किसान बनने की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं। धर्मवीर दिल्ली में रिक्शा चलाते थे...एक हादसे के बाद गंभीर तौर पर घायल हुए तो वापस अपने शहर यमुनानगर आ गए। परिवार गरीबी से जूझ रहा था लेकिन बीमारी की हालत में उन्होंने खेती की नई तकनीकि का आइडिया कौंधा। धर्मवीर जैसे किसानों के हौसले और नई सोच की वजह से हिंदुस्तान को किसानों का देश कहा जाता है।धर्मवीर की कुछ नया करने की सोच ही थी कि अब भारत का नाम विदेशों में भी रौशन है।

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