मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक बिजली वितरण कंपनियों- टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड, बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड और बीएसईएस यमुना लिमिटेड- ने आप सरकार के सात जनवरी, 2014 के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें इन कंपनियों के खातों का ऑडिट कैग से कराने के आदेश दिए थे।
मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी और न्यायमूर्ति आर एस एंडलॉ की पीठ ने कहा, 'हमने बिजली वितरण कंपनियों की याचिकाओं को स्वीकार कर लिया है। पीठ ने इसके साथ ही स्पष्ट कर दिया कि ऑडिट की अब तक की प्रक्रिया और कैग की मसविदा रिपोर्ट अमान्य मानी जाएगी।'
इससे पहले, दिल्ली सरकार ने अदालत को बताया था कि यहां बिजली वितरण की निजी कंपनियों के खातों का कैग ऑडिट जरूरी है क्योंकि ये कंपनियां एक सार्वजनिक काम करती हैं। बिजली वितरण कंपनियां निजी कंपनियों और दिल्ली सरकार के बीच 51:49 प्रतिशत का साझा उपक्रम हैं।
No comments:
Post a Comment