ये कहानी है उस शख्सियत की जिसके काम को आज कर्नाटक सरकार ने पहचाना और कर्नाटक राज्योत्सव अवॉर्ड से नवाजा. अकाई पद्मशाली पहली ट्रांसजेंडर हैं, जिन्हें इस पुरस्कार के लिए चुना गया है.
12 साल की उम्र तक वो
जगदीश हुआ करता था. बेंगलुरु के मध्यवर्गीय परिवार में जन्मा. लेकिन
जैसे-जैसे बड़ा होने लगा अपने ही शरीर में घुटने लगा. उसने खुदकुशी करने की
सोची, लेकिन नहीं की. साहस जुटाया. अपनी पहचान जाहिर कर जीने का. जैसे ही
पहचान सामने आई, पहला झटका लगा. पढ़ाई छूट गई. ज्यादतियां होने लगी तो वह
सेक्स वर्कर बन गई.
आज वही अकाई पद्मशाली उस समुदाय की बड़ी एक्टिविस्ट हैं, जिसे दुनिया थर्ड जेंडर के नाम से जानती है.
पद्मशाली सेक्शुअलिटी पर जागरुकता फैला रहे संगठन ऑनडीड के संस्थापक हैं. कन्नड़ में इसका मतलब होता है कन्वर्जेंस.
पब्लिक टॉयलेट तक इस्तेमाल नहीं करने देते थे लोग
अवॉर्ड मिलने पर पद्मशाली ने हैरानी जताई. उन्होंने कहा- मुझे किसी ने फोन कर इसकी सूचना दी. मैं हैरान रह गया. लेकिन यह अवॉर्ड सिर्फ अकाई के लिए नहीं, बल्कि पूरे समुदाय के लिए है. पद्मशाली ने अपने जीवन संघर्ष के बारे में बात करते हुए बताया कि लोग उन्हें पब्लिक टॉयलेट तक इस्तेमाल नहीं करने देते थे. बसों में सफर करने में दिक्कत होती थी. लेकिन यह अवॉर्ड साबित करता है कि लोगों का नजरिया बदल रहा है.
अवॉर्ड मिलने पर पद्मशाली ने हैरानी जताई. उन्होंने कहा- मुझे किसी ने फोन कर इसकी सूचना दी. मैं हैरान रह गया. लेकिन यह अवॉर्ड सिर्फ अकाई के लिए नहीं, बल्कि पूरे समुदाय के लिए है. पद्मशाली ने अपने जीवन संघर्ष के बारे में बात करते हुए बताया कि लोग उन्हें पब्लिक टॉयलेट तक इस्तेमाल नहीं करने देते थे. बसों में सफर करने में दिक्कत होती थी. लेकिन यह अवॉर्ड साबित करता है कि लोगों का नजरिया बदल रहा है.
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