Friday, 23 October 2015

हरियाणा में न्यू इंटीग्रेटिड लाइसेंसिंग पॉलिसी-2015 लागू

  • अब बाजार भाव में बेच सकेंगे जमीन
  • शहरीकरण विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार ने तैयार की योजना
हरियाणा के किसानों के लिए खुशखबरी है। किसान अब अपनी जमीन को अपनी मर्जी से बेच सकेंगे और वो भी बाजार भाव में। अब किसानों पर जबरन अधिग्रहण का दबाव नहीं बनाया जाएगा। हरियाणा सरकार ने शुक्रवार को प्रदेश में न्यू इंटीग्रेटिड लाइसेंसिंग पॉलिसी-2015 लागू कर दी है। इस नीति को आमूल-चूल बदलाव लाने वाली नीति बताते हुए मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि यह नीति किसानों व भूमि मालिकों, आवासीय भूखण्डों और फ्लैट्स के खरीददारों-उपभोक्ताओं, रियल एस्टेट डिवेलपर्स की आकांक्षाओं और सरकार के बीच सही सन्तुलन स्थापित करने में कारगर सिद्घ होगी। यहां हरियाणा निवास में पॉलिसी की घोषणा के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि एनआईएलपी, 2015 नामक नई नीति द्वारा हस्तांतरणीय विकास अधिकारों (टीडीआर) के अंतरराष्टÑीय स्तर पर प्रशंसित मानदण्ड स्थापित होंगे और इस नीति के अनूठे प्रावधानों से सरकार को किसानों की निजी भूमि का अनिवार्य अधिग्रहण नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यह नीति छोटे भूमि मालिकों को सम्पूर्ण लाइसैंस प्रक्रिया, रियल एस्टेट डिवेलपमेंट और विपणन तथा अपने हस्तांतरण योग्य विकास अधिकारों (टी.डी.आर.) की बिक्री में भागीदार बनाकर उनको स्वेच्छा से भूमि को बाजारी भाव प्राप्त करने में सक्षम बनाएगी। उन्होंने बताया कि पहले की नीति में केवल वही बिल्डर इन क्षेत्रों में प्लॉटिड कालोनी विकसित कर सकता था, जिसके पास 100 एकड़ से अधिक भूमि होती थी। उन्होंने बताया कि भूमि की न्यूनतम आवश्यकता को 100 एकड़ से कम करके 25 एकड़ पर कालोनी विकसित करने के मानदण्ड बनाते हुए इस नीति में कुल एफएआर 25 एकड़ से 50 एकड़ की कालोनी में 1.0 और 50 एकड़ से अधिक की कॉलोनियों के लिए 1.25 रखा गया है। बिल्डर किसानों से टीडीआर खरीदकर अपना एफएआर क्रमश: 1.25 (50 एकड़ तक की कालोनी में) और 1.5 (50 एकड़ से अधिक की कालोनी में) कर सकेंगे। किसानों को खुली छूट होगी कि वे एक बड़े भौगोलिक क्षेत्र में किसी भी बिल्डर को अपना एफएआर अपनी दरों पर बेचें। प्रत्येक किसान को टीडीआर में अपनी भूमि पर एफएआर (यानि प्रत्येक एकड़ पर करीब 4047 वर्ग मीटर या 43264 वर्ग फुट) का सर्टिफिकेट मिलेगा, जिसे वह बाजारी भाव पर बेच सकेगा। शहरी क्षेत्रों में अत्यधिक कीमती भूमि का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के लिए लागू सघनता बढ़ाकर 250 व्यक्ति प्रति एकड़ की जा रही है।

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