Wednesday, 28 October 2015

हरियाणा पंचायत चुनाव शैक्षणिक योग्यता मामला:हफ्ते बाद होगा फैसला

नई दिल्ली/चंडीगढ़  सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को हरियाणा सरकार द्वारा पंचायती राज संशोधन कानून 2015 को चुनौती देने वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। न्यायमूर्ति जस्ती चेलमेश्वर और न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे की खंडपीठ के समक्ष दोनों पक्षों के बीच बहस पूरी हो गई और सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को एक सप्ताह के भीतर अपना पक्ष अथवा अपनी बात लिखकर देने को कहा है। यानि एक सप्ताह के बाद हरियाणा में पंचायत चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुनाएगी। इससे पहले मंगलवार को सुनवाई दौरान हरियाणा सरकार द्वारा पेश किए गए आंकड़ों पर याचिकाकर्ता के वकील ने सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार ने गुमराह करने वाले आंकड़े पेश किए हैं। एडवोकेट विक्रम मित्तल ने कोर्ट से आग्रह किया कि प्रदेश में 57 प्रतिशत एजुकेशन है और प्रदेश में 84 प्रतिशत घरों में शौचालय है। ऐसे में सरकार द्वारा पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक 43 प्रतिशत लोग चुनाव लड़ने से वंचित रह जाएंगे। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि जो आंकड़े पेश किए गए हैं वह प्राइमरी स्तर के हैं जबकि सरकार ने पंचायत चुनाव में न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता आठवीं व दसवीं पास अनिवार्य की है। यदि दसवीं पास शैक्षणिक योग्यता को मानक मान लिया जाए तो 65 प्रतिशत के करीब लोग चुनाव लड़ने से वंचित रह जाएंगे। जो कि चुनाव लड़ने के इच्छुक लोगों के साथ सरासर अन्याय होगा। गौरतलब है कि हरियाणा सरकार ने पंचायत चुनावों में शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य करने के साथ पंचायत चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार के घर शौचालय होने, दस साल की सजा के प्रावधान मामले में एफआईआर दर्ज न होने, बैंकों व कोआप्रेटिव सोसाइटी का ऋण न होने, बिजली का बिल का भुगतान पैंडिंग न होने का कानून बना दिया है। सरकार ने विपक्षी पार्टियों के विरोध के बावजूद विधान सभा में बिल को पारित कर दिया था। सरकार के इस फैसले को याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रखी है।

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