चौकीदार बनकर चोर-डाकुओं से बचाते थे डाक
बहराइच जिला मुख्यालय से करीब 120 किलोमीटर दूर कतर्निया वन्य जीव
विहार में स्थित वनग्राम टेड़िया आज एक अलग पहचान बना चुका है और इसे पहचान
दी है एक ऐसे शख्स ने जिसके परिवार वाले 40 साल पहले बलिया जिले को छोड़
रोजी-रोटी की तलाश में जंगलों के बीच यहां आकर बस गए। जंगल की ही जमीन पर
खेती करने लगे। घने जंगलों में चोर-डाकुओं और जंगली जानवरों से डाक बचाने
के लिए सेंट्रल स्टेट फॉर्म ने बंशीधर बौद्ध को चौकीदार की नौकरी दी।
हालांकि, कुछ दिनों बाद उन्हें निकाल दिया गया। इसके बाद उन्होंने सत्ता की
तरफ रुख किया।
राजनीति में की दमदार एंट्री
13 सितंबर 2014 के दिन समय ने ऐसी करवट ली कि सबकुछ बदल गया, वो दिन
था बलहा विधानसभा का उपचुनाव। यह चुनाव बहराइच की मौजूदा बीजेपी सांसद
सावित्री बाई फुले के बलहा विधानसभा से पद छोड़ने के कारण हो रहा था। बतौर
सपा उम्मीदवार बंशीधर ने बलहा विधानसभा के उपचुनाव में प्रतिद्वंदी बसपा की
किरण भारती को बड़े अंतर से हराकर राजनीति की दुनिया में कदम रखा। यूं तो
बंशीधर की राजनीति की शुरुआत इससे काफी पहले हो चुकी थी और उन्होंने अपने
इलाके का जिला पंचायत सदस्य के तौर पर दो बार प्रतिनिधित्व किया था, लेकिन
राजनीति में मजबूत एंट्री विधायक बनने के बाद हुई।
कभी बनाते थे पंचर
कभी घर के गुजारे के लिए बिछिया चैराहे पर साइकिल की पंचर बनाने वाले
बंशीधर एक साल पहले आम से खास बन गए। लेकिन हैरानी की बात है कि सबकुछ
बदलने के बाद भी बंशीधर नहीं बदले। सत्ताधारी पार्टी के विधायक होने के बाद
भी आज बंशीधर झोपड़ी में ही रहते हैं और खेत में काम काम करते हैं।
No comments:
Post a Comment