लिटिलवुड कपल का 75 सालों का एक्सपीरिएंस इसे ‘बहस’ कहता है और दूसरी
तरफ़, 40 हज़ार सालों का एक्सपीरिएंस इसे ‘संवाद’ का नाम देता है। जी हां,
लम्बे रिश्ते में बंधे 700 से अधिक जोड़ों के बीच हुए सर्वे में सुखद और
पक्की गृहस्थी के लिए जो प्रमुख सूत्र निकलकर आए, उनमें सबसे ऊपर था-
संवाद। इन तमाम जोड़ों का कुल मिलाकर वैवाहिक अनुभव 40 हज़ार सालों का था। यह
सर्वे करने वाले प्रोफेसर कार्ल पिलेमर के अनुसार, ‘बूढ़े दम्पतियों ने
लगभग छूटते ही जो बात कही, वह थी- बातचीत, बातचीत और बातचीत। उनका पक्का
विश्वास था कि मैरिड लाइफ से जुड़ी ज़्यादातर समस्याएं खुली बातचीत से सुलझाई
जा सकती हैं।’
ध्यान रहे कि इस बातचीत में सुनना भी शािमल है। कपल्स के बीच बहुत
सारी समस्याएं न सुनने के कारण ही गहराती हैं और सिर्फ़ सुन लिए जाने पर ही
ख़त्म हो जाती हैं। 87 वर्ष का कपल जीवन बिताने वाले ज़ेल्माइरा और हर्बर्ट
फिशर इसे ‘झगड़ा’ कहते थे। झगड़ा- मतभिन्नता की मौखिक अभिव्यक्ति। इस दम्पती
के अनुसार, ‘हम इस बात पर हमेशा से सहमत हैं कि असहमत हुआ जा सकता है और जो
चीज़ हमारे लिए मायने रखती है, उसके लिए लड़ा जा सकता है। लेकिन इसके साथ ही
झुकना सीखना भी ज़रूरी है, न कि टूटना।’ आप इसे संवाद कहें या बहस और झगड़ा
कह लें, मूल विचार है अपनी बात रखना और दूसरे की बात सुनना। इस
सुनने-सुनाने से ही दिल का गुबार निकलता है, ग़लतफ़हमियां दूर होती हैं और
कोई राह निकलती है।
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