कम्प्यूटर
और सूचना क्रांति ने जीवन के हर क्षेत्र में बदलाव ला दिया है। आज कोई भी
व्यवसाय इससे अछूता नहीं है। और इस तकनीकी में हर रोज बदलाव भी हो रहे हैं।
इन्हीं तकनीकी बदलावों की वजह से ऑडियो इंजीनियरिंग की शुरूआत हुई है।
व्यावसायिक संगीत के क्षेत्र में ऑडियो इंजीनियरिंग अपना एक अलग मुकाम कायम
किया है। संगीत से जुड़े क्षेत्रों में ऑडियो इंजीनियरों के लिए कारोबारी
अपने पलकें बिछाए रहते हैं।
ध्वनि और उच्च तकनीकी के
संगम का नाम है ऑडियो इंजीरियरिंग। आज टीवी, रेडियो, फिल्मों में ध्वनि के
कारनामों से अपने ग्राहकों को आकर्षित करने की होड़ लगी है। आवाज और सुर
से जुड़ी दुनिया में नई से नई तकनीकी का इस्तेमाल किया जाता है। ऑडियो
इंजीनियर सुरों में तालमेल इलेक्ट्रोनिक तरीके से करते हैं। ऑडियो इंजीनियर
के कमाल की वजह से ही नए−नए डिजिटल रिकॉर्डिंग से फिल्म और टीवी की दुनिया
में हलचल पैदा हो रही है।
हालांकि ऑडियो
इंजीनियरिंग का क्षेत्र भारत में नया है। दूसरे देशों के मुकाबले भारत में
इसकी पढ़ाई बहुत ही सीमित संस्थानों में होती है। ध्वनि तकनीकी, माइक्रोफोन
और रिकॉर्डिंग तकनीकी, संगीत के सिद्धान्त, डिजिटल ऑडियो स्टूडियो
रिकॉर्डिंग तकनीकी, संगीत के सिद्धान्त, डिजिटल ऑडियो रिकॉर्डिंग, कंपनियों
के कार्य प्रणाली, लाइव प्रसारण और संगीत में कानून की शिक्षा ऑडियो
इंजीनियरिंग पाठ्यक्र
म कोर्स के तहत दी जाती है।
इस
पाठ्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा करने वाले अभ्यर्थी को सहायक ऑडियो
इंजीनियर, स्टूडियो मैनेजर, साउंड इफेक्ट एडीटर साउंड मिक्सर के रूप में
मनोरंजन और समाचार टीवी चैनलों, रेडियो और फिल्मों में नौकरी मिल जाती है।
भारत में आमतौर पर इस व्यवसाय से जुड़े लोग अपने कॅरियर की शुरूआत स्टूडियो
डायरेक्टर के सहायक के तौर पर शुरू करते हैं। जैसे−जैसे वे काम सीखते जाते
हैं उनका प्रमोशन होता जाता है। क्योंकि भारत में इस पाठ्यक्रम की पढ़ाई
सीमित जगहों पर ही होती है। सफल ऑडियो इंजीनियर बनने की चाह रखने वाले
अभ्यर्थी इस पाठ्यक्रम की पढ़ाई के लिए आस्ट्रेलिया, यूके, अमेरिका और
स्पेन जैसे देशों में जाते हैं।
भारत में भी अब कई
संस्थाएं इस पाठ्यक्रम की शुरूआत कर चुकी हैं। मीडिया एजुकेशन कालेज और
एसआई टेक्नोलॉजी कालेज से इस पाठ्यक्रम की ज्यादा जानकारी ले सकते हैं। ये
दोनों संस्थाएं इस पाठ्यक्रम को संचालित भी करते हैं।
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