Saturday, 31 October 2015

राजस्थान के शाही सफर पर ले जाती है पैलेस ऑन व्हील्स


जैसे ही आप यहां आएंगे, अटेंडेंट आपको झुक कर नमस्कार करेगा और सबसे पहले छोटे से लाउंज और फिर गैलरी से होते हुए केबिन में ले जाएगा। लाउंज और गैलरी से होते हुए केबिन तक पहुंचने का पहला एहसास ही आपके अंदर महाराजा होने की गलतफहमी पैदा कर देगा। यहां भीनीभीनी खुशबू से महकता माहौल, उसमें बिखरा मधुर संगीत और आसपास की खूबसूरत सजावट मन को मोहने के लिए काफी है।
शाही यात्रा वैसे तो दिल्ली से शुरू होती है। लेकिन परम्पराओं से रूबरू होने का मौका पर्यटकों को राजस्थान में आने पर ही मिलता है। यहां की सरजमीं पर कदम रखते ही शहनाई गूंज उठती है। राजस्थानी बाला से फूलमालाएं पहन कर कोई भी सैलानी इतरा उठता है। शाही रेलगाड़ी जयपुर के अलावा जैसलमेर, जोधपुर, सवाई माधोपुर, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, भरतपुर, आगरा और फतेहपुर सीकरी की सैर कराती है।
सैलानी पर्यटन स्थलों पर जो कुछ देखता है उसकी एक झलक शाही रेलगाड़ी के अंदर भी मिलती है। गाड़ी के सैलूनों के नाम राजस्थानी रियासतों के नाम पर रखे गये हैं। दीवारों पर वहां की ऐतिहासिक इमारतों के चित्र और पेंटिंग लगी हैं। फर्श की गुदगुदी कालीन, रेशमी चादर, खूबसूरत परदे, कांच के जगमगाते झूमर, कलात्मक लैंप शेड, छत की रंगीन चित्रकारी, बेलबूटे, कांच की जड़ाई यानी यहां की हर चीज नायाब है।
गाड़ी में संगीत के अलग−अलग चैनल हैं, जो मर्जी आए उसे सुनिए। आराम के पल आप सैलून के लाउंज में गुजार सकते हैं। यहां बैठ कर पुस्तकालय से पत्र−पत्रिकाएं और अखबार मंगवा कर भी पढ़ सकते हैं।
आप चाहें तो बड़े लाउंज में भी आराम फरमा सकते हैं। यहां छोटे−मोटे सांस्कृतिक आयोजनों का आनंद भी उठाया जा सकता है। अलग−अलग देश, भाषा व संस्कृति के लोग यहां हर शाम एकत्रित होते हैं। सात दिन तक पारम्परिक माहौल में रहते−रहते ये विदेशी सैलानी भारतीय रंग में रंगे नजर आते हैं। कुछ सैलानियों को तो राजस्थानी साफे और अटेंडेंट की शेरवानी इतनी पसंद आती है कि वे उनसे इन्हें पहनने की पेशकश भी करते हैं।
अटेंडेंट जगह के हिसाब से अपनी पोशाकें भी बदलते रहते हैं। जैसे गुलाबी नगरी जयपुर में गुलाबी, जोधपुर व जैसलमेर में पीली, रणथंभौर में हरी तथा उदयपुर में नीली शेरवानी पहनी जाती है, जिससे पर्यटक अचंभित रह जाते हैं।
सैलानी यहां कभी−कभी खास मौके का चुनाव भी करते हैं। ऐसे में अचानक सारी लाइटें बंद हो जाती हैं फिर 'हैप्पी बर्ड डे टू यू' की आवाज के साथ मोमबत्ती जलती है। केक काटा जाता है और सब मिल कर खाते हैं। इस तरह के अप्रत्याशित मौके सफर को और ज्यादा यादगार बनाते हैं।

No comments:

Post a Comment