Monday, 12 October 2015

लगातार हार से दबाव में धोनी, अजहर बोले- अब पहले जैसी बात नहीं रही

नई दिल्ली. दनदनाते छक्के के साथ मैच फिनिश करने के लिए पहचाने जाने वाले महेंद्र सिंह धोनी रविवार को कानपुर वनडे में 31 बॉल खेलकर सिर्फ एक बाउंड्री लगा पाए। लगातार गिरती परफॉर्मेंस की वजह से अब धोनी की कप्तानी और बैटिंग पर सवाल उठ रहे हैं। साउथ अफ्रीका के खिलाफ पहले दो टी-20 और अब कानपुर वनडे में हार के बाद धोनी पर दबाव बढ़ रहा है। पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन का कहना है कि धोनी में अब पहले जैसी बात नहीं रही। (मैच एनालिसिस पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

क्या उम्र का असर है?
दैनिक भास्कर के क्रिकेट एक्सपर्ट अयाज का कहना है कि कड़वी हकीकत यही है कि धोनी की उम्र बढ़ रही है। इसलिए उन्हें लगातार खुद को साबित करना होगा। धोनी के फेवर में सिर्फ कुंबले नजर आए। उन्होंने कहा, "एक मैच से धोनी को लेकर नजरिया न बदलें। वे अब भी अच्छे फिनिशर हैं।" dainikbhaskar.com आपको बता रहा है कि धोनी की कप्तानी और पर्सनल परफॉर्मेंस के बारे में फैक्ट्स क्या कहते हैं, खुद धोनी का क्या कहना है और क्रिकेट एक्सपर्ट्स उन्हें किस नजरिए से देख रहे हैं?
धोनी तब और अब
तब
अब
2007 में कप्तानी संभाली। और कोई दावेदार नहीं। तब उम्र 26 साल थी।
टेस्ट टीम की कप्तानी पिछले साल छोड़ चुके हैं। वनडे के लिए भी अब कोहली हैं दावेदार। धोनी की उम्र 34 साल हो चुकी है।
टी-20 वर्ल्ड कप, चैम्पियंस ट्रॉफी और वर्ल्ड कप 2011 में जीत दिलाई।
2015 के वर्ल्ड कप में सेमीफाइनल में टीम बाहर।
2013 में धोनी का वनडे में स्ट्राइक रेट 151 था।
अब स्ट्राइक रेट 114 पर है।
धोनी अच्छे फिनिशर रहे।
आखिरी 5 वनडे में खुद सिर्फ 152 रन बनाए। 4 मैचों में मिली हार।
धोनी पर उठते सवालों पर क्या है एक्सपर्ट्स की राय?
1. पहले जानिए, खुद धोनी क्या कह रहे हैं

धोनी ने कानपुर वनडे के बाद कहा, "अगर आप लोअर ऑर्डर में बैटिंग करते हैं तो आपको जिम्मेदारी लेनी होती है। अगर आप फिनिशर के तौर पर जाने जाते हैं, तो लोग हमेशा यह याद रखेंगे कि अापने अच्छी तरह फिनिश नहीं किया। इंग्लैंड और श्रीलंका के साथ पहले एक-एक मैच में ऐसा हो चुका है, जब हम कम मार्जिन से हार गए। लेकिन यह आसान नहीं होता। आपको बड़े शॉट खेलने होते हैं। कानपुर जैसे विकेट पर एेसे शॉट खेलना मुश्किल होता है। जब आप बड़े शॉट खेलने जाते हैं, तो कभी वे काम कर जाते हैं, कभी नहीं। यह एक तरह का गैम्बल होता है और टीम में यह जोखिम उठाने की जिम्मेदारी मुझ पर है।"
2. धोनी की उम्र बढ़ रही है, यही कड़वा सच है : अयाज मेमन

भास्कर एक्सपर्ट अयाज मेमन ने कहा, "जहां तक मेरा मानना है, धोनी अब भी दुनिया के बेस्ट वनडे प्लेयर्स में से एक हैं। वनडे टीम की कप्तानी के लिए भी सबसे अच्छे खिलाड़ी हैं। लेकिन अब वे 35 साल के हो चुके हैं। खेल का कड़वा सच यह भी है कि बढ़ती उम्र के कारण उन्हें अपनी काबिलियत बार-बार और लगातार साबित करनी होगी। उनका एक्सपीरियंस टीम की बड़ी ताकत है। इन सारी खूबियों के बावजूद आलोचकों को चुप कराने के लिए उन्हें लगातार रन बनाने होंगे और मैच जीतने होंगे। बोलने के लिए यह बड़ा आसान होता है, लेकिन जब चीजें आपके खिलाफ जाने लगें तो यही सबसे मुश्किल हो जाता है। यह वक्त मुश्किल हालात को अपनी तरफ बदलने का है और धोनी को खुद ही ऐसा करना होगा।"
3. धोनी को बनाया जा रहा बलि का बकरा : गावसकर
पूर्व इंडियन क्रिकेटर सुनील गावसकर ने कहा कि कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को बलि का बकरा बनाया जा रहा है। वे अभी भी टीम इंडिया के नंबर-वन फिनिशर हैं। उन्होंने कहा, "इसमें कोई शक नहीं कि धोनी अभी भी भारत के नंबर वन फिनिशर हैं। जाहिर-सी बात है कि उम्र बढ़ने के साथ शारीरिक क्षमता घटती जाती है, लेकिन यह बात सिर्फ खेल ही नहीं, बल्कि सभी जगह लागू होती है।" (गावसकर बॉलर्स पर बहुत गुस्सा हुए, उनकी पूरी प्रतिक्रिया पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

3. धोनी को बदलना होगा बैटिंग ऑर्डर : अजहरुद्दीन

पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन ने कहा, "धोनी अब पहले जैसे प्लेयर बिल्कुल नहीं हैं। उन्हें दोबारा एग्जाम्पल सेट करने की जरूरत है। उन पर बेशक दबाव है, लेकिन अगर वे परफॉर्म नहीं करेंगे तो सिलेक्टर्स को उनके बारे में सोचना होगा। उन्हें अपना बैटिंग ऑर्डर बदलना होगा। हालांकि, फिनिशर क्या होता है, यह मैं नहीं जानता। हर किसी बैट्समैन में मैच फिनिशिंग स्किल्स होने चाहिए। ऐसा नहीं हो सकता है कि 50 रन बनने बाकी हैं और आप 70 पर खेल रहे हैं, तो आप मैच को किसी दूसरे के भरोसे छोड़ देंगे। आप क्रीज पर हैं तो आपको ही टीम को जीत तक ले जाना होगा। दूसरी टीमों में कप्तान लंबे समय से टिके हुए हैं, क्योंकि वहां सेकंड लाइन तैयार नहीं है। टीम इंडिया के साथ हालात अलग हैं। धोनी की जगह लेने के लिए विराट कोहली तैयार बैठे हैं।"
4. धोनी पहले जैसा परफॉर्म करेंगे, यह कहना मुश्किल : श्रीकांत

पूर्व कप्तान के. श्रीकांत का कहना है, "जब बॉल में अच्छा उछाल आता है तो धोनी अच्छा परफॉर्म करते हैं। मुझे नहीं लगता कि आने वाले दिनों में हमें वैसे ही खतरनाक धोनी नजर आएंगे, जैसे पहले होते थे। धोनी ने अपने करियर में लंबे समय तक बैटिंग ऑर्डर नहीं बदला। लेकिन अब उन्हें सोचने की जरूरत है।"
5. धोनी अब भी अच्छे फिनिशर हैं, एक मैच से नजरिया न बदलें : कुंबले

पूर्व कप्तान और महान लेग स्पिनर रहे अनिल कुंबले ने कहा, "मुझे नहीं लगता कि धोनी का रोल बदला है। वे अब भी अच्छे फिनिशर हैं। मुझे नहीं लगता कि उन्हें अपना बैटिंग ऑर्डर बदलकर 4 या 3 नंबर पर आना चाहिए। अगर कानपुर वनडे में धोनी का एक बड़ा शॉट लगा देते तो शायद आज हम कुछ और बातें कर रहे होते।"

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