इलाहाबाद. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्रेटर नोएडा के पतवारी,
तुगलकपुर और इटैहड़ा गांवों में आम्रपाली, सुपरटेक और जगत तारन के
रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स को दो महीने के अंदर गिराने का आदेश दिया है।
सोमवार को इलीगल कन्सट्रक्शन के मामले में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने ये
फैसला दिया। कोर्ट के इस फैसले से ग्रेटर नोएडा में अपने घर का सपना देख
रहे लोगों को बड़ा झटका लगा है।
क्या है विवाद?
ग्रेटर नोएडा के गांव पतवारी की 2 हजार स्क्वॉयर मीटर, तुगलपुर गांव की 35 हजार स्क्वॉयर मीटर और इटैहड़ा की 6 हजार स्क्वॉयर मीटर जमीन पर तीनों बिल्डर कंपनियों के प्रोजेक्ट हैं। जमीन के इन टुकड़ों का पहले श्मशान, चारागाह के तौर पर इस्तेमाल हो रहा था। वहीं, कुछ हिस्सा ग्रामसभा का था। इसी को मु्द्दा बनाते हुए जन कल्याण ट्रस्ट नाम के एक संगठन ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
ग्रेटर नोएडा के गांव पतवारी की 2 हजार स्क्वॉयर मीटर, तुगलपुर गांव की 35 हजार स्क्वॉयर मीटर और इटैहड़ा की 6 हजार स्क्वॉयर मीटर जमीन पर तीनों बिल्डर कंपनियों के प्रोजेक्ट हैं। जमीन के इन टुकड़ों का पहले श्मशान, चारागाह के तौर पर इस्तेमाल हो रहा था। वहीं, कुछ हिस्सा ग्रामसभा का था। इसी को मु्द्दा बनाते हुए जन कल्याण ट्रस्ट नाम के एक संगठन ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
कोर्ट ने क्या कहा?
सोमवार को जन कल्याण ट्रस्ट की पीआईएल पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने
बिल्डिंग्स गिराने का फैसला सुनाया। जस्टिस बीके बिड़ला की बेंच ने
गौतमबुद्धनगर जिले के डीएम को दो महीने में बिल्डिंग्स गिराकर ज़मीन का
कब्ज़ा हटाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा, "गांव के किसानों को 2 महीने
के अंदर उनकी जमीन वापस करने और पिछले 10 साल के दौरान अधिग्रहीत जमीनों का
पूरा ब्योरा दिया जाए। ऐसा नहीं करने पर संबंधित अफसर अदालत की अवमानना
(कंटेम्ट ऑफ कोर्ट) के लिए सजा के हकदार होंगे।"
PIL दाखिल करने वाले ट्रस्ट के वकील ने क्या कहा?
पीआईएल दाखिल करने वाले जन कल्याण ट्रस्ट के वकील गौतम उपाध्याय ने बताया, "तीनों डेवलपर्स ने श्मशान, चारागाह और ग्रामसभा की जमीन पर इलीगल तरीके से कब्जा किया था। सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक, ग्रामसभा की जमीन पर किसी तरह का कोई कॉन्सट्रक्शन नहीं किया जा सकता, फिर भी यहां ऊंची बिल्डिंग्स खड़ी कर दी गईं। यूपी सरकार ने इनके खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया। अब कोर्ट ने दो महीने के अंदर इन्हें गिराने का आदेश दिया है।"
पीआईएल दाखिल करने वाले जन कल्याण ट्रस्ट के वकील गौतम उपाध्याय ने बताया, "तीनों डेवलपर्स ने श्मशान, चारागाह और ग्रामसभा की जमीन पर इलीगल तरीके से कब्जा किया था। सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक, ग्रामसभा की जमीन पर किसी तरह का कोई कॉन्सट्रक्शन नहीं किया जा सकता, फिर भी यहां ऊंची बिल्डिंग्स खड़ी कर दी गईं। यूपी सरकार ने इनके खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया। अब कोर्ट ने दो महीने के अंदर इन्हें गिराने का आदेश दिया है।"
पुराना है विवाद
इससे पहले इसी मामले में 19 जुलाई, 2011 को हाईकोर्ट ने पतवारी गांव
की 589 हेक्टेयर जमीन के अधिग्रहण को रद्द कर दिया था। अदालत ने उस समय
यूपी सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए किसानों की जमीन वापस करने को कहा था।
पहले भी सुपरटेक की बिल्डिंग तोड़ने का आदेश दे चुका है हाईकोर्ट
इसी साल अप्रैल में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा में सुपरटेक के एक
प्रोजेक्ट के दो टावरों को गिराने का आदेश दिया था। लेकिन सुपरटेक ने इस
फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज किया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामलें
में टावरों को गिराने पर रोक लगाते हुए बिल्डर को फ्लैट की बिक्री या
ट्रांसफर करने पर रोक लगा दी थी।
आगे क्या?
इस मामले में ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी, बिल्डर और फ्लैट बुक कराने वाले
कस्टमर भी सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकते हैं। अगर वहां से कोई राहत मिली
तो तीनों बिल्डरों के प्रोजेक्ट्स बच सकते हैं।
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