Friday, 9 October 2015

बदहाल पुजारी की मदद को आगे आया नावेद, मंदिर की देखरेख के लिए भी दिए पैसे

लखनऊ: हालिया वक्त में देश में सांप्रदायिक तनाव के कई मामले सामने आए हैं। इस बीच, यूपी की राजधानी में कौमी एकता की एक अनूठी मिसाल सामने आई है।
शहर के आलम नगर इलाके स्थित सिद्धेश्वर हनुमान मंदिर के महंत श्याम सुंदर दास की माली हालत बेहद खराब है। इसे देखते हुए मंदिर के सामने आटा चक्की चलाने वाले नावेद अख्तर राशन और पैसे देकर उनकी मदद कर रहे हैं। महंत श्याम सुंदर दास ने बताया कि नावेद अख्तर उन्हें खाने के लिए आटा, तेल और जरूरी सामान मुहैया कराते हैं। इसके साथ ही मंदिर की देखभाल के लिए पैसे भी देते हैं।
क्या कहना है पुजारी का?
पुजारी श्याम सुंदर का कहना है कि मंदिर की बाउंड्री से लगी 30 दुकानें हैं। इन दुकानदारों ने अब अपनी यूनियन बना ली है। पिछले तीन साल से न तो किराया दे रहे हैं और न ही लोगों को मंदिर में पूजा करने देते हैं। ऐसे में, मंदिर में कोई चढ़ावा नहीं आता। इससे मंदिर के रख-रखाव का खर्च नहीं निकल पा रहा। साथ ही, खाने के भी लाले पड़ गए। पुजारी के मुताबिक, जब उन्होंने इस बात का विरोध किया तो दुकानदारों ने उनकी पिटाई कर दी। इस साल फरवरी में उन्होंने थाने में एफआईआर भी दर्ज कराई, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
क्या कहना है नावेद का?
नावेद अख्तर का कहना है कि वह अपनी क्षमता के मुताबिक, मंदिर और महंत की मदद करते रहेंगे। वह अपने जीते जी न तो मंदिर टूटने देंगे और न ही पुजारी को कुछ होने देंगे। नावेद अख्तर के मुताबिक, वह दिन में पांच बार नमाज अदा करते हैं। अपने मजहब से उन्होंने इंसानियत के फर्ज को जाना है और उसी को निभा रहे हैं। उनके पिता बाबू मियां भी इस मंदिर में भंडारा लगवाने में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते थे। उन्होंने ही सिखाया कि धर्म अहम है, लेकिन सबसे ऊपर इंसानियत और नेकी है। यही इंसान के साथ ऊपर जाती है।

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