Monday, 19 October 2015

पेंशनधारियों को महंगा पड़ेगा गलत सूचना देना!

सख्ती : कार्मिक मंत्रालय ने किया नियमों में संशोधन
नई दिल्ली। सेवानिवृत्ति के दो वर्ष के भीतर किसी एनजीओ या निजी फर्म में शामिल होने की अनुमति मांगने के दौरान सरकार को गलत सूचना देने वाले पेंशनधारियों को आपराधिक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। यह स्पष्ट करते हुए कार्मिक मंत्रालय ने वर्तमान नियमों में संशोधन किया है और पेंशनधारियों के लिए यह घोषित करना अनिवार्य कर दिया कि जिस एनजीओ और कंपनी से वे जुड़ना चाहते हैं, वे किसी ऐसी गतिविधियों में शामिल नहीं हैं, जो भारत के विदेश संबंधों, राष्ट्रीय सुरक्षा और घरेलू सौहार्द के लिए नुकसानदेह या टकराव पैदा करने वाली हो। नए नियमों में कहा गया है कि उन्हेें यह घोषित करने की जरूरत है कि पिछले तीन वर्षों की सेवाओं के दौरान उन्हें संवेदनशील या सामरिक महत्व की ऐसी सूचनाओं की जानकारी नहीं थी, जो सीधे तौर पर संगठन के रूचि या कार्य के क्षेत्र से जुड़ी हों। यह पहल ऐसे समय में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जब सरकार ने विदेशी अनुदान का कथित तौर पर राष्ट्र विरोधी कार्यों के लिए उपयोग करने को लेकर कई गैर सरकारी संगठनों पर कार्रवाई की है। इसके अलावा बदले नियमों के तहत उन्हें उस कंपनी का पूरा ब्यौरा देना होगा, जिससे वे जुड़ना चाहते हैं, जिसमें पैन या टैक्स आईडेंटिफिकेशन नंबर, पता और कार्य की प्रकृति आदि शामिल है। पेंशनधारियों को यह घोषणा करनी होगी कि वे सरकार की ओर से किसी तरह की आपत्ति व्यक्त करने की स्थिति में वाणिज्यिक रोजगार छोड़ने को सहमत हैं। नए नियम के तहत, उन्हें यह घोषित करना होगा कि पिछले तीन वर्षों की सेवाओं के दौरान उन्हें किसी संवेदनशील या सामारिक महत्व की सूचना की जानकारी नहीं थी, जो सीधे उस संगठन के कार्य या रूचि के क्षेत्रों से संबंधित हों जिससे वे जुड़ना चाहते हैं। पेंशनधारियों के लिए यह अनिवार्य रूप से शपथ लेनी होगी कि अगर कोई भी सूचना गलत पाई जाती है, तब बिना कोई कारण बताए अनुमति को वापस लिया जा सकता है और सरकार आपराधिक कार्रवाई करने समेत उपयुक्त कदम करने पर विचार कर सकती है। नए नियमों को कार्मिक मंत्रालय ने हाल ही में अधिसूचित किया है।

No comments:

Post a Comment