रह गई बस चीखें और चित्कार
11 मौतों के बाद दहल उठा इलाका
कई बच्चे हुए अनाथ तो कई मलिाओं की उजड़ गई मांग
मलबे में दफन छह लोगों को निकाल अस्पताल पहुंचाया
राजस्थान व यूपी के मृतक
नारनौल(सच कहूं ब्यूरो)। धोलेड़ा गांव में दोपहर तक सब कुछ सामान्य था। अचानक एक जोरदार धमाका हुआ और स्टोन क्रेशर की निर्माणाधीन दीवार भरभराकर गिर गई। देखते ही देखते चारों तरफ चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हर तरफ से लोग उसी तरफ दौड़ पड़े जिस तरफ से धमाके की आवाज आई थी। भारी तादाद में लोग घटनास्थल पर जमा हो गए तथा मलबे के नचे दबे मजदूरों को निकालने में जुट गए। इस बीच दमकल वाहन व प्रशासनिक अमला भी मौके पर पहुंच गया था। दीवार ढहने की खबर से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। इस घटना के बाद लोगों ने ठेकेदारों को जमकर कोसा। कुछ भी हो धोलेड़ा हादसा कई लोगों के लिए बदनसीबी की ईबारत लिख गया। हाल ये है कि किसी का सब कुछ ही खत्म हो गया हालांकि कई लोग ऐसे हैं जो दीवार गिरते ही लावारिस हो गए। कई परिवारों का तो सबूत ही मिट गया और कुछ ऐसे भी परिवार हैं जिनके जीने का सहारा खत्म हो गया। हादसे ने कई परिवारों को तबाह कर दिया है। कई बच्चे अनाथ हो गए तो कई महिलाओं की मांग उजड़ गई। कुछ इतने बदनसीब कि अपनी आंखों के सामने अपनों को दम तोड़ते देखा। शहर के अस्पतालों में शुक्रवार दोपहर से ही मातम का माहौल था। हर तरफ सिसकियों, रोने और चीखने की आवाजें थी। परिजन व रिश्तेदार एक-दूसरे को संभालते हुए फफक-फफक कर रो पड़ते थे।
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मलबे के ढेर में जिंदगी की तलाश
दर्द जब दिल से निकलकर आंखों से छलकता है तो उसे किसी जुबां की जरूरत नहीं होती। नारनौल के धोलेड़ा गांव में स्टोन क्रेशर की दीवार गिरने से मारे गए उन बदनसीबों के परिजनों के हिस्से भी कुछ ऐसा ही दर्द है। निर्माणाधीन दीवार ने जहां 11 जिंदगीयों को लील लिया वहीं 35 से 40 लोग मलबे में दफन जिंदगी व मौत के बीच जूझ रहे हैं। मातम के बाद अब यह सितम का सिलसिला है। समाचार लिखे जाने तक प्रशासनिक अमला व स्थानीय लोग मलबे में दफन जिंदगीयों को निकालने में जुटे थे।
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जिसने सुना वही दौड़ा चला आया
धोलेड़ा गांव में दीवार ढहने की खबर जिसने भी सुनी उससे रहा नहीं गया तथा वह घटनास्थल की और दौड़ पड़ा। समाचार लिखे जाने तक 10 शवों को नारनौल के सिविल अस्पताल ले आया जा चुका है, जहां उनकी शिनाख्त की जा रही है। वहीं काफी संख्या में मजदूर अभी भी नीचे दबे हुए हैं। इस वजह से मृतकों का आंकड़ा बढ़ भी सकता है। बारिश आ जाने के कारण राहत व बचाव कार्य में बाधा आ रही है। गंभीर रुप से घायल 6 लोगों को रोहतक पीजीआई रेफर किया गया है। मृतक यूपी व राजस्थान के रहने वाले बताए जा रहे हैं।
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मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख
चंडीगढ़। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने गांव धोलेड़ा में हुए स्टोन क्रेशर हादसे के मृतकों के परिवारों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना प्रकट की है। उन्होंने मृतकों के परिवार को एक-एक लाख रुपये की राशि बीमा योजना के तहत तथा दो-दो लाख रुपये की राशि मुख्यमंत्री राहत कोष से देने की घोषणा की। इसके अलावा, उन्होंने हादसे में हुए घायलों को 50-50 हजार रुपये देने की भी घोषणा की है। उन्होंने कहा कि महेन्द्रगढ़ और रोहतक जिले के सरकारी अस्पतालों में दाखिल लोगों का ईलाज भी मुफ्त करवाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि हादसे की जांच के आदेश पहले की दिए जा चुके हैं। यदि इसमें कोई दोषी पाया गया तो उसके विरूद्ध कार्यवाही की जाएगी।
11 मौतों के बाद दहल उठा इलाका
कई बच्चे हुए अनाथ तो कई मलिाओं की उजड़ गई मांग
मलबे में दफन छह लोगों को निकाल अस्पताल पहुंचाया
राजस्थान व यूपी के मृतक
नारनौल(सच कहूं ब्यूरो)। धोलेड़ा गांव में दोपहर तक सब कुछ सामान्य था। अचानक एक जोरदार धमाका हुआ और स्टोन क्रेशर की निर्माणाधीन दीवार भरभराकर गिर गई। देखते ही देखते चारों तरफ चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हर तरफ से लोग उसी तरफ दौड़ पड़े जिस तरफ से धमाके की आवाज आई थी। भारी तादाद में लोग घटनास्थल पर जमा हो गए तथा मलबे के नचे दबे मजदूरों को निकालने में जुट गए। इस बीच दमकल वाहन व प्रशासनिक अमला भी मौके पर पहुंच गया था। दीवार ढहने की खबर से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। इस घटना के बाद लोगों ने ठेकेदारों को जमकर कोसा। कुछ भी हो धोलेड़ा हादसा कई लोगों के लिए बदनसीबी की ईबारत लिख गया। हाल ये है कि किसी का सब कुछ ही खत्म हो गया हालांकि कई लोग ऐसे हैं जो दीवार गिरते ही लावारिस हो गए। कई परिवारों का तो सबूत ही मिट गया और कुछ ऐसे भी परिवार हैं जिनके जीने का सहारा खत्म हो गया। हादसे ने कई परिवारों को तबाह कर दिया है। कई बच्चे अनाथ हो गए तो कई महिलाओं की मांग उजड़ गई। कुछ इतने बदनसीब कि अपनी आंखों के सामने अपनों को दम तोड़ते देखा। शहर के अस्पतालों में शुक्रवार दोपहर से ही मातम का माहौल था। हर तरफ सिसकियों, रोने और चीखने की आवाजें थी। परिजन व रिश्तेदार एक-दूसरे को संभालते हुए फफक-फफक कर रो पड़ते थे।
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मलबे के ढेर में जिंदगी की तलाश
दर्द जब दिल से निकलकर आंखों से छलकता है तो उसे किसी जुबां की जरूरत नहीं होती। नारनौल के धोलेड़ा गांव में स्टोन क्रेशर की दीवार गिरने से मारे गए उन बदनसीबों के परिजनों के हिस्से भी कुछ ऐसा ही दर्द है। निर्माणाधीन दीवार ने जहां 11 जिंदगीयों को लील लिया वहीं 35 से 40 लोग मलबे में दफन जिंदगी व मौत के बीच जूझ रहे हैं। मातम के बाद अब यह सितम का सिलसिला है। समाचार लिखे जाने तक प्रशासनिक अमला व स्थानीय लोग मलबे में दफन जिंदगीयों को निकालने में जुटे थे।
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जिसने सुना वही दौड़ा चला आया
धोलेड़ा गांव में दीवार ढहने की खबर जिसने भी सुनी उससे रहा नहीं गया तथा वह घटनास्थल की और दौड़ पड़ा। समाचार लिखे जाने तक 10 शवों को नारनौल के सिविल अस्पताल ले आया जा चुका है, जहां उनकी शिनाख्त की जा रही है। वहीं काफी संख्या में मजदूर अभी भी नीचे दबे हुए हैं। इस वजह से मृतकों का आंकड़ा बढ़ भी सकता है। बारिश आ जाने के कारण राहत व बचाव कार्य में बाधा आ रही है। गंभीर रुप से घायल 6 लोगों को रोहतक पीजीआई रेफर किया गया है। मृतक यूपी व राजस्थान के रहने वाले बताए जा रहे हैं।
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मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख
चंडीगढ़। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने गांव धोलेड़ा में हुए स्टोन क्रेशर हादसे के मृतकों के परिवारों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना प्रकट की है। उन्होंने मृतकों के परिवार को एक-एक लाख रुपये की राशि बीमा योजना के तहत तथा दो-दो लाख रुपये की राशि मुख्यमंत्री राहत कोष से देने की घोषणा की। इसके अलावा, उन्होंने हादसे में हुए घायलों को 50-50 हजार रुपये देने की भी घोषणा की है। उन्होंने कहा कि महेन्द्रगढ़ और रोहतक जिले के सरकारी अस्पतालों में दाखिल लोगों का ईलाज भी मुफ्त करवाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि हादसे की जांच के आदेश पहले की दिए जा चुके हैं। यदि इसमें कोई दोषी पाया गया तो उसके विरूद्ध कार्यवाही की जाएगी।
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