आजमगढ़ : जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में बुधवार को नाग पंचमी का पर्व श्रद्धा व उल्लास के साथ मनाया गया। शहर से लेकर गांव तक हर जगह नाग देवता की पूजा अर्चना करने के साथ दूध पिलाया। नाग देवता का दर्शन कराने के लिए सपेरे इधर उधर घूमते रहे। लोग नाग देवता का दर्शन कर अपने को धन्य महसूस कर रहे थे। बच्चे झूले का आनंद ले रहे थे तो महिलाएं भी दिख रही थीं। इस अवसर पर कहीं कबड्डी तो कहीं दंगल का आयोजन किया गया।
नाग पंचमी को लेकर सुबह से ही तैयारियां शुरू हो गईं थीं। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं अपने घरों की जहां साफ-सफाई कीं वहीं गाय के गोबर से घर को स्वच्छ बनाया गया। पूरे घर को गोबर से गोंठा गया। इसके बाद दूध-लावा नाग देवता को चढ़ाया गया। घरों में पकवान भी बनाए गए। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों ने कबड्डी खेलते नजर आए। महिलाएं व बच्चे झूले का आनंद ले रही थीं। शहर क्षेत्र में सुबह से ही सपेरे मुहल्लों में घूम-घूम कर नाग देवता का दर्शन करा रहे थे। लोग अपने मंशानुसार दान भी कर रहे थे।
--------नाग पंचमी को नागानामनंदकरी तिथि की संज्ञा दी गई है। अर्थात ऐसी तिथि जो
नागों को आह्लादित कर देती हैं। इस दिन नागों का पूजन-अर्चन होता है। नागों
का मूल स्थान पाताल लोक बताया जाता है। नागों का उद्गम पुराणों के अनुसार
महर्षि कश्यप एवं उनकी पत्नी कद्र से माना गया है। भारतीय संस्कृति में
नागों को यक्ष, किन्नर, गंधर्व आदि के साथ-साथ देव रूप में पूजा जाता है।
इसलिए ग्राम में लोक देवता के रूप में नाग देवताओं के पूजा स्थल विद्यमान
हैं।
-डा. राय पीएन प्रसाद, स्वामी विवेकानंद हायर रिसर्च फाउंडेशन के अध्यक्ष।
----------कहीं कबड्डी तो कहीं कुश्ती
नाग पंचमी को लेकर सुबह से ही तैयारियां शुरू हो गईं थीं। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं अपने घरों की जहां साफ-सफाई कीं वहीं गाय के गोबर से घर को स्वच्छ बनाया गया। पूरे घर को गोबर से गोंठा गया। इसके बाद दूध-लावा नाग देवता को चढ़ाया गया। घरों में पकवान भी बनाए गए। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों ने कबड्डी खेलते नजर आए। महिलाएं व बच्चे झूले का आनंद ले रही थीं। शहर क्षेत्र में सुबह से ही सपेरे मुहल्लों में घूम-घूम कर नाग देवता का दर्शन करा रहे थे। लोग अपने मंशानुसार दान भी कर रहे थे।
--------नाग पंचमी को नागानामनंदकरी तिथि की संज्ञा दी गई है। अर्थात ऐसी तिथि जो
नागों को आह्लादित कर देती हैं। इस दिन नागों का पूजन-अर्चन होता है। नागों
का मूल स्थान पाताल लोक बताया जाता है। नागों का उद्गम पुराणों के अनुसार
महर्षि कश्यप एवं उनकी पत्नी कद्र से माना गया है। भारतीय संस्कृति में
नागों को यक्ष, किन्नर, गंधर्व आदि के साथ-साथ देव रूप में पूजा जाता है।
इसलिए ग्राम में लोक देवता के रूप में नाग देवताओं के पूजा स्थल विद्यमान
हैं।
-डा. राय पीएन प्रसाद, स्वामी विवेकानंद हायर रिसर्च फाउंडेशन के अध्यक्ष।
----------कहीं कबड्डी तो कहीं कुश्ती
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