राजपक्षे अपनी श्रीलंका फ्रीडम पार्टी को सत्ता में वापस लाकर उसकी
सरकार बनाने और खुद प्रधानमंत्री बनने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि,
उन्हें राष्ट्रपति चुनाव में करारी शिकस्त देने वाले मैत्रीपाला सिरीलेना
उनके प्रधानमंत्री बनने की संभावना से इनकार कर रहे हैं।
दोनों नेताओं के बीच प्रतिस्पर्धा श्रीलंका के संसदीय चुनाव पर हावी
रही। सोमवार हो रहे चुनाव में दो करोड़ मतदाता हैं। कोलंबो में कुछ
मतदाताओं का कहना था कि वह मेल-मिलाप और सुशासन के लिए वोट दे रहे हैं।
उनकी सहानुभूति युनाइटेड नेशनलिस्ट पार्टी प्रधानमंत्री रानिल विक्रमासिंघे
के प्रति रही।
अल्पसंख्यक तमिल और मुस्लिम मतदाता युनाइटेड नेशनलिस्ट पार्टी के
गठबंधन के साथ हैं। 225 सदस्यीय संसद में इस पार्टी के सबसे बड़े दल के रूप
में उभरने की संभावना देखी जा रही है। विक्रमासिंघे का कहना है कि वह जीत
के प्रति आश्वस्त हैं।
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