मंदिर ट्रस्ट ने भगवान के मंदिरों को सिनेमा हॉल का बिजनेस बना
दिया है। जैसे सिनेमा में 500 रुपए का टिकट लेने वालों को ऑडी सीट, 200
वालों को बालकनी, 100 वालों को सबसे नीचे की सीट मिलती है। वैसे ही
सामान्य, वीआईपी और वीवीआईपी क्लास बना भगवान को भी मूवी टिकट की तरह बेचा
जा रहा है। जबकि, भगवान को पैसे की जरूरत नहीं है। ऐसे में लोग मंदिरों में
दान देना बंद करें।' वर्ल्ड काउंसिल ऑफ आर्यसमाज के प्रेसिडेंट और समाज
सुधारक स्वामी अग्निवेश के इस बयान से बाबा रामदेव और श्रीश्री रविशंकर भी
सहमत हैं।
देश के 4 बड़े मंदिरों द्वारा आपके दान किए पैसों का इस्तेमाल करने से जुड़ी dainikbhaskar.com की स्पेशल रिपोर्ट पर देश के 3 बड़े धर्मगुरु (बाबा रामदेव, स्वामी अग्निवेश और श्रीश्री रविशंकर),
नामी मंदिरों को चलाने वाले ट्रस्ट अधिकारी आमने-सामने खड़े हो गए हैं। 15
हजार से ज्यादा रीडर्स कमेंट कर अपनी प्रतिक्रिया दे चुके हैं। पढ़ें...
देश के 3 नामी धर्मगुरुओं की दो टूक
धर्मगुरुओं की दो टूक पर देश के 4 बड़े मंदिरों का जवाब...|
सवाल
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स्वामी अग्निवेश का जवाब
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बाबा रामदेव का जवाब
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श्रीश्री रविशंकर का जवाब
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मंदिर में दान के इस्तेमाल को लेकर क्या कहना है?
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- dainikbhaskar.com ने बहुत गंभीर मुद्दा उठाया है। इस खबर के लिए उन्हें धन्यवाद।
- मंदिरों में दान देना मेरे हिसाब से बिल्कुल गलत है। मंदिर ट्रस्ट आपके दान का गलत इस्तेमाल करते हैं। वो भगवान को बेचकर आपके दान से कमाई करते हैं, हिस्सा नेताओं को भी देते हैं। मंदिर ट्रस्ट हमारी आस्था का मजाक बनाते हैं। दान देने से आस्था के इस खिलवाड़ को बढ़ावा मिलता है। - भगवान को पैसे की जरूरत नहीं है। लोगों को मंदिरों में दान नहीं देना चाहिए। |
- देश में ऐसा कई बार हुआ है कि मंदिरों में आए दान का पैसा हज या
चर्च के लिए दे दिया गया। मुझे इस पर घोर अापत्ति है। ऐसा करना दान की
परम्परा और आस्था का अपमान है। मंदिर के पैसों का अन्य तरीकों से भी गलत
इस्तेमाल हो रहा है।
- मंदिर में दान किए पैसों के इस्तेमाल करने की व्यवस्था में सुधार होने तक लोगों को दान देना बंद कर देना चाहिए। |
- VIP कल्चर के नाम पर मंदिर ट्रस्ट भगवान का बिजनेस करने लगे हैं। ये गलत है।
- दान के पैसों का गलत इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। कर्नाटक के कुछ मंदिरों में ट्रस्ट द्वारा दान का गलत इस्तेमाल होने की बात मुझे भी पता चली थी। मैंने राज्य के देवस्थान कमिश्नर को लेटर लिखकर इसकी शिकायत भी की थी। |
| देश का सबसे अमीर पद्मनाभस्वामी मंदिर |
काशी विश्वनाथ मंदिर | शिर्डी साईं बाबा मंदिर | सिद्धि विनायक मंदिर |
| मंदिर के पीआरओ ने कहा, 'धर्मगुरुओं की बात से मैं पूरी तरह से सहमत हूं। मंदिर में दान देने से बचना चाहिए।' | मंदिर के डिप्टी सीईओ पी. एन. द्विवेदी ने कहा, 'मैं धर्मगुरुओं की बात से सहमत नहीं हूं। इसका विरोध भी करता हूं। मंदिरों में भ्रष्टाचार तो है लेकिन भ्रष्टाचार कहां नहीं है? रामदेव जैसे लोगों को मंदिरों की ग्राउंड रियल्टी नहीं पता है। सिर्फ राजनीतिक फायदे के लिए मंदिरों में दान न देने की बात कर रहे हैं।' | मंदिर के चेयरमैन विनय जोशी ने मामले को लेकर कोई भी कमेंट करने से मना कर दिया। |
मंदिर के एक्जीक्यूटिव ऑफिसर मंगेश शिंदे ने भी धर्मगुरुओं की बात पर प्रतिक्रिया नहीं दी।
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15 हजार से ज्यादा रीडर्स के कमेंट/रिप्लाई पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें...
आपने कभी सोचा कि मंदिरों के दान के जिस गलत इस्तेमाल पर धर्मगुरुओं
से लेकर मंदिर ट्रस्ट आमने-सामने हैं, वो दान का पैसा आता कहां-कहां से है
और ये इतने पैसे का करते क्या हैं? देश के 4 बड़े मंदिरों (तिरुपति, शिर्डी
साईं बाबा, सिद्धि विनायक और काशी विश्वनाथ) के माध्यम से dainikbhaskar.com अापको बताने जा रहा है कि मंदिर आपके दान किए हुए पैसों का कैसे करते हैं इस्तेमाल...
कंटेंट सोर्स: चारों मंदिरों की ऑडिट रिपोर्ट। सुप्रीम
कोर्ट द्वारा एक मंदिर के खजाने की जांच के लिए बनाई कमेटी के चेयरमैन और
पूर्व कैग विनोद राय। कर्नाटक के पूर्व देवस्थान (Muzrai) मंत्री प्रकाश
बब्बाना हुकेरी। तिरुपति तिरुमला ट्रस्ट के चीफ अकाउंट ऑफिसर एस.
रविप्रसादन, सिद्धि विनायक मंदिर ट्रस्ट के चेयरमैन नरेंद्र मुरारी राणा,
काशी विश्वनाथ मंदिर के डिप्टी सीईओ वी. के. द्विवेदी, सुप्रीम कोर्ट के
सीनियर लॉयर विराग गुप्ता, गोपाल सुब्रमण्यम की मंदिर पर आधारित रिपोर्ट और
इंटरनेट रिसर्च।
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