रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी काण्ड की सुनवाई कर
रहे एनआईए के जज एमडी कातुलकर को दोबारा नक्सली धमकी मिली है। उनके बंगले
के गेट के बाहर 24 अगस्त की सुबह चिट्ठी फेंकी गई थी, इस चिट्ठी को
उन्होंने 25 अगस्त को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए हुई एनआईए की सुनवाई में
वकीलों के सामने पेश किया था। वकीलों से इस संबंध में चर्चा के बाद 26
अगस्त को उन्होंने मामला दर्ज कराया है।
नहीं मिली है सुरक्षा
12 जून को भी कातुलकर के बंगले के बाहर धमकी भरी चिट्ठी छोड़ कर बम
फोड़ा गया था। इसके बाद उन्होंने अपने घर के बाहर सुरक्षा बढ़ाने और
सीसीटीवी कैमरा लगाने की मांग की थी, लेकिन अभी तक उनके घर के बाहर
सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए गए हैं।
क्या लिखा है चिट्ठी में
'अब तू समझ गया होगा पुलिस के कुत्ते तेरा कोई साथ नहीं देंगे, तूने
बस्तर में चेनसी, उदल जैसे जाने कितने क्रांतिकारी कार्यकर्ताओं को जेल
भेजा है। जिसकी सजा तुझे भुगतनी ही होगी। उन्हें जेल भेजकर तू अपने आपको
तीसमार खां समझ रहा होगा, हम उसका भी प्रतिशोध लेंगे। झीरम मामले को
सुनवाई के लिए जगदलपुर भेज दे या यहां से चला जा। नहीं तो तू अदालत से घर
जिंदा नहीं पहुंचेगा। और तेरे परिवार को भी हम कुत्ते की मौत मारेंगे। तुझे
और तेरे परिवार को जलाकर राख करके ऐसा उदाहरण रखेंगे कि कोई भी जज हमारे
खिलाफ नहीं आएगा।'
कब हुआ था हमला?
25 मई 2013 को झीरम घाटी में नक्सलियों ने कांग्रेस की परिवर्तन रैली
के बाद लौट रहे नेताओं के काफिले पर हमला किया था। हमले में पूर्व
केन्द्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, बस्तर टाइगर कहे जाने वाले महेंद्र
कर्मा, तत्कालीन पीसीसी अध्यक्ष नंद कुमार पटेल समेत 30 कांग्रेसी मारे गए
थे। इस हमले की जांच एनआईए को सौंपी गई है और इसकी सुनवाई के लिए बिलासपुर
में महादेव कातुलकर की विशेष अदालत में चल रही है।
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