नई दिल्ली. उपहार सिनेमा में आग लगने के 15 साल पुराने केस में
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने सिनेमा हॉल के
मालिक सुशील और गोपाल अंसल को उतनी ही सजा सुनाई, जितनी दोनों जेल में काट
चुके हैं। इसका मतलब यह हुआ कि अब दोनों को जेल नहीं जाना पड़ेगा। हालांकि,
कोर्ट ने दोनों को 30-30 करोड़ रुपए बतौर जुर्माना अदा करने को कहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अंसल भाइयों को 60 करोड़ रुपए की यह रकम तीन महीने
में देनी होगी। दिल्ली सरकार वेलफेयर स्कीम्स में इस रकम का इस्तेमाल कर
सकेगी। बता दें कि सिनेमा हॉल की लापरवाही के कारण इस हादसे में 59 लोगों
की जान गई थी।
इससे पहले क्या हुआ? अंसल ब्रदर्स ने कितने दिन जेल में गुजारे?
- सुशील अंसल पांच महीने 22 दिन और गोपाल अंसल चार महीने 22 दिन की जेल में काट चुके हैं।
- पिछले साल 5 मार्च को जस्टिस टी. एस. ठाकुर और जस्टिस ज्ञानसुधा मिश्रा की बेंच ने अंसल ब्रदर्स को दोषी ठहराया था। लेकिन सजा तय करने के मसले पर दोनों की राय अलग थी।
- जस्टिस ठाकुर ने दिल्ली हाईकोर्ट के 2008 के उस फैसले को सही ठहराया था, जिसमें अंसल ब्रदर्स को एक-एक साल की सजा सुनाई गयी थी।
- लेकिन जस्टिस ज्ञानसुधा मिश्रा ने कहा था कि सुशील बंसल की जेल में काटी गई सजा को कुल सजा में गिनाया जाए और गोपाल अंसल की सजा बढाकर दो साल किया जाए।
- इसके बाद यह केस सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच को सौंपा गया। इसी बेंच ने बुधवार को फैसला सुनाया।
सुप्रीम कोर्ट में आज क्या हुआ?
- जस्टिस ए.आर. दवे, जस्टिस कुरियन जोसेफ और जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की बेंच ने इस केस पर सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि अंसल ब्रदर्स को तीन महीने में दिल्ली सरकार को जुर्माने की राशि अदा करनी होगी। दिल्ली सरकार इस रकम का इस्तेमाल वेलफेयर के कामों में कर सकेगी।
- अंसल ब्रदर्स के वकील राम जेठमलानी ने सुप्रीम कोर्ट से दरख्वास्त की थी कि उनके क्लाइट्ंस को जिन सबूतों के आधार पर दोषी ठहराया गया है, उन पर फिर बहस की इजाजत दी जाए। बेंच ने इसे ठुकरा दिया। कहा- इस पर दोबारा बहस नहीं की जा सकती। यह सुनवाई सिर्फ सजा के मामले में हो रही है। बेंच ने जेठमलानी से कहा कि वे चाहें तो रीव्यू पिटीशन लगा सकते हैं।
- सीबीआई की तरफ से पेश वकील हरीश साल्वे ने कहा कि दोषियों को उनकी बची हुई सजा पूरी करने के लिए फिर जेल भेजा जाना चाहिए।
- वहीं, एसोसिएशन ऑफ विक्टिम्स ऑफ उपहार ट्रैजडी की तरफ से पेश वकील केटीएस तुलसी ने भी कहा कि दोषियों को न सिर्फ जेल भेजा जाए, बल्कि उनकी सजा भी बढ़ा दी जाए। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने दोनों की दरख्वास्त ठुकरा दी।
‘कोर्ट की तरफ देखूंगी भी नहीं'
उपहार कांड में अपनों को खोने वाली एन कृष्णमूर्ति ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निराशा जताई। उन्होंने कहा, ‘मेरा ज्यूडिश्यरी से भरोसा उठ गया है। आज के बाद मैं शायद कोर्ट की तरफ देखूंगी भी नहीं।'
जब 'बॉर्डर' फिल्म देखते जिंदा जल गए थे 59 लोग
गौरतलब है कि साउथ दिल्ली के ग्रीन पार्क इलाके में मौजूद उपहार सिनेमा में 13 जून, 1997 को फिल्म ‘बॉर्डर’ के शो के दौरान आग लग गई थी। आग लगने के बाद दम घुटने से सिनेमा हॉल की बालकनी में मौजूद 59 लोगों की मौत हुई थी। 100 से ज्यादा लोग जख्मी हो गए थे। आग सिनेमा हाल के बेसमेंट में रखे जनरेटर से शुरू हुई और धीरे-धीरे पूरे हाल को आग ने अपने आगोश में ले लिया। बाद में सीबीआई ने इस केस की जांच की थी
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