नई दिल्ली. संसद में मंगलवार को भारी हंगामा हुआ। राज्यसभा में
सरकार ने जीएसटी बिल तो पेश कर दिया लेकिन उस पर चर्चा नहीं हो सकी। वहीं,
लोकसभा में वेल में आए कांग्रेस सदस्यों ने डिप्टी स्पीकर की तरफ कागज के
टुकड़े उछाल दिए। कांग्रेस सदस्यों के रवैये से स्पीकर सुमित्रा महाजन काफी
नाराज हो गईं। उधर, सूत्रों के हवाले से खबर है कि सरकार जीएसटी बिल के
लिए स्पेशल सेशन बुलाएगी। बता दें कि मानसूत्र सेशन गुरुवार को ही खत्म हो
रहा है। इस सेशन में लोकसभा में 41% और राज्यसभा 8% ही काम हो पाया है।
जबकि पिछले सेशन में लोकसभा में 122% और राज्यसभा में 102% काम हुआ था।
लोकसभा में क्या हुआ?
- मंगलवार को कांग्रेस सांसदों के लगातार हंगामे के बाद स्पीकर
सुमित्रा महाजन ने कहा- ये 40 लोग (कांग्रेस के सांसद) 440 (बाकी सांसदों)
का अधिकार मार रहे हैं। यह सही नहीं है। लोकसभा टीवी वाले इसे चैनल पर जरूर
कैमरा घुमाकर दिखा दें ताकि देश भी देख ले कि ये लोग कैसे हंगामा कर रहे
हैं? मैं सदन को स्थगित नहीं करूंगी।
- इसके बाद भी सुषमा स्वराज, वसुंधरा राजे और शिवराज सिंह चौहाने की
इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस का हंगामा जारी रहा। वेल में आकर
तख्तियां दिखाने के चलते स्पीकर ने पिछले हफ्ते 25 सांसदों को 5 दिन के लिए
सस्पेंड किया था।
- दोपहर 3 बजे के बाद चेयर पर लोकसभा के डिप्टी स्पीकर एम थंबीदुराई
थे। लेकिन कांग्रेस के सदस्य वेल में ही टिके रहे। थंबीदुराई ने जब कामकाज
कराना चाहा तो कुछ कांग्रेस सदस्यों ने कागज फाड़कर टुकड़े उनकी तरफ फेंक
दिए। इसके विरोध में वेल में बीजेपी की तरफ से उमा भारती, जगदंबिका पाल और
किरण खेर आ गईं। इसके बाद थंबीदुराई ने कार्यवाही स्थगित कर दी।
- कामकाज जब दोबारा शुरू हुआ, तब भी हंगामा जारी रहा। इस पर स्पीकर
महाजन ने कहा- मैं चेयर के प्रति आप लोगों के बर्ताव से बेहद आहत हूं। जिस
तरह से आप लोगों ने डिप्टी स्पीकर पर कागज फेंके, उसे माफ नहीं किया जा
सकता। क्या यही तरीका है आपका? मैं आपको वॉर्निंग दे रही हूं... कागज
फेंकना सही नहीं है।
राज्यसभा में क्या हुआ?
- सरकार ने यहां जीएसटी बिल पेश कर दिया। लेकिन कांग्रेस का हंगामा
जारी रहा। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि कांग्रेस के हंगामे की असली
वजह यह है कि वे ग्रोथ रोकना चाहते हैं। इस पर कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने
कहा कि जब बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की मीटिंग में इस बिल का मुद्दा शामिल
नहीं था तो सरकार ऐन वक्त पर इसे पेश नहीं कर सकती।
आगे क्या?
- संसद का मानसून सेशन 13 अगस्त को खत्म हो रहा है। जीएसटी बिल पारित हो पाएगा या नहीं, इस पर सवाल उठ रहे हैं।
- ऐसे में सरकार स्पेशल सेशन बुलाने पर विचार कर रही है। यह सेशन 3-4
का दिन का हो सकता है जो 13 अगस्त के बाद और बिहार में अक्टूबर-नवंबर में
होने वाले चुनाव से पहले कभी भी बुलाया जा सकता है।
जेटली ने कहा- कांग्रेस वादे से मुकर रही है
बाद में जेटली ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पिछले सेशन में यह बिल
संसद की सिलेक्ट कमेटी (प्रवर समिति) में भेजे जाने के समय कांग्रेस के साथ
यह सहमति बनी थी कि कमेटी की सिफारिशों के आधार पर इसे मानसून सेशन में
पारित किया जायेगा । लेकिन अब कांग्रेस अपने वादे से मुकर रही है। उन्होंने
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी का नाम लिए बिना
कहा कि कांग्रेस के दो नेता कुछ कारणों से इसे पारित नहीं होने देना चाहते।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के ये नेता 2014 के लोकसभा चुनाव की करारी हार
को अभी पचा नहीं पाए हैं। वे नहीं चाहते कि देश में गांधी परिवार के अलावा
कोई और राज करे। उन्होंने कहा कि सभी पार्टियां इस बिल को पारित कराने के
मुद्दे पर सरकार के साथ हैं और कांग्रेस अलग-थलग पड़ गई है।
कांग्रेस बोली- मोदी का अहंकार ही संसद न चल पाने के लिए जिम्मेदार
कांग्रेस प्रवक्ता आनंद शर्मा ने कहा, ''प्रधानमंत्री हर मुद्दे पर
बोलते हैं, पर करप्शन के आरोपों पर चुप हैं। उनका अहंकार ही संसद न चलने के
लिए जिम्मेदार है। हम जीएसटी बिल के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उसे पेश करने
के लिए तय प्रॉसेस नहीं अपनाई गई।'' बता दें कि देश भर में एक टैक्स सिस्टम
लाने वाला जीएसटी बिल यूपीए सरकार के समय से ही पेंडिंग है।
फिर हाथ में काली पट्टी बांधकर पहुंचे कांग्रेस सांसद
मंगलवार को भी कांग्रेस के सांसद हाथ में काली पट्टी बांधकर संसद
पहुंचे। लोकसभा में जैसे ही कार्यवाही शुरू हुई, कांग्रेस सांसदों ने
हंगामा और नारेबाजी शुरू कर दी। इस पर संसदीय कार्यमंत्री वेंकैया नायडू ने
कहा कि कांग्रेस का मकसद जीएसटी बिल को रोकना है। नायडू ने कहा कि सरकार
हर मुद्दे पर बातचीत को तैयार है, लेकिन कांग्रेस सिर्फ हंगामा करना चाहती
है। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र के लिए अच्छी बात नहीं है। बीजेपी नेता
रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सोनिया और राहुल गांधी से हम आज भी अपील करेंगे
कि संसद चलने दें। सिर्फ अपने अहंकार के लिए संसद ठप करना सही नहीं है।
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