वाराणसी। अमेरिका
में रहने वाली भारतीय मूल की एक मशहूर आयुर्वेदिक महिला डॉक्टर के साथ
बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) में छेड़छाड़ और रेप की कोशिश का मामला
सामने आया है। डॉक्टर बासवती भट्टाचार्य का आरोप है कि यूनिवर्सिटी कैंपस
में पांच लोगों ने उनके साथ रेप करने की कोशिश की। बासवती बीएचयू में
पीएचडी कर रही हैं। वह डायबिटीज के इलाज के क्षेत्र में रिसर्च कर रही हैं।
डॉक्टर के मुताबिक, शुरुआत में पुलिस ने इस मामले में एफआईआर तक दर्ज नहीं
की। बाद में सीनियर पुलिस अफसरों की दखल के बाद रिपोर्ट दर्ज हुई।
क्या थी घटना
एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, डॉक्टर बासवती ने बताया कि
22 अप्रैल की शाम 7 बजकर 45 मिनट पर वह यूनिवर्सिटी कैंपस में अपने एक
दोस्त के साथ टहल रही थीं, जब यह घटना हुई। डॉक्टर ने बताया, ''वे मेरा
सेलफोन ले गए, लेकिन मेरा लैपटॉप छोड़ गए, इसलिए यह महज लूटपाट का मामला
नहीं है। पांच लोग मेरे पास आए और रेप की कोशिश की। मैंने सेल्फ डिफेंस की
ट्रेनिंग ली है और इसलिए मैं उनका मुकाबला कर पाई। मैं घायल हो गई। वे मेरा
रेप नहीं कर पाए और मौके से फरार हो गए।''
जांच कर रहे डॉक्टरों ने भविष्य बताने को कहा
डॉक्टर ने बताया, ''सिस्टम की बेरुखी का पता उस वक्त चला जब लंका इलाके की पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने के बजाए मुझे मुंह बंद रखने को कहा। मेरा पुलिस स्टेशन जाना जारी रहा, लेकिन इससे कोई मकसद हल नहीं हुआ। एसपी की दखल के बाद मुझे मेडिकल जांच के लिए बुलाया गया। जांच एक महिला पुलिस इंस्पेक्टर और दो पुरुष डॉक्टरों ने की। इस दौरान मैंने बहुत पीड़ा झेली।'' डॉक्टर ने आगे बताया, ''जब जांच कर रहे डॉक्टरों को पता चला कि मैं ब्राह्मण हूं और आयुर्वेद की जानकार हूं तो उन्हें मुझे अपना हाथ देकर भविष्य बताने के लिए मजबूर किया।''
डॉक्टर ने बताया, ''सिस्टम की बेरुखी का पता उस वक्त चला जब लंका इलाके की पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने के बजाए मुझे मुंह बंद रखने को कहा। मेरा पुलिस स्टेशन जाना जारी रहा, लेकिन इससे कोई मकसद हल नहीं हुआ। एसपी की दखल के बाद मुझे मेडिकल जांच के लिए बुलाया गया। जांच एक महिला पुलिस इंस्पेक्टर और दो पुरुष डॉक्टरों ने की। इस दौरान मैंने बहुत पीड़ा झेली।'' डॉक्टर ने आगे बताया, ''जब जांच कर रहे डॉक्टरों को पता चला कि मैं ब्राह्मण हूं और आयुर्वेद की जानकार हूं तो उन्हें मुझे अपना हाथ देकर भविष्य बताने के लिए मजबूर किया।''
मौके पर ले गई पुलिस
डॉक्टर के मुताबिक, मामले की जांच करने वाला सब इंस्पेक्टर उन्हें मौका-ए-वारदात पर ले गया और घटना के बारे में दोबारा से बताने को कहा। एक महिला इंस्पेक्टर ने तो इस मामले में केस करने की वजह जाननी चाही। डॉक्टर ने कहा, ''यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर की सुरक्षा में हथियारबंद सुरक्षागार्ड तैनात हैं। उनमें से कई को यूनिवर्सिटी के असुरक्षित मानी जाने वाली जगहों पर तैनात किया जा सकता है।''
डॉक्टर के मुताबिक, मामले की जांच करने वाला सब इंस्पेक्टर उन्हें मौका-ए-वारदात पर ले गया और घटना के बारे में दोबारा से बताने को कहा। एक महिला इंस्पेक्टर ने तो इस मामले में केस करने की वजह जाननी चाही। डॉक्टर ने कहा, ''यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर की सुरक्षा में हथियारबंद सुरक्षागार्ड तैनात हैं। उनमें से कई को यूनिवर्सिटी के असुरक्षित मानी जाने वाली जगहों पर तैनात किया जा सकता है।''
मोदी पर जमकर निशाना
एक अंग्रेजी अखबार से बातचीत में डॉक्टर ने कहा, ''ऐसा मोदी राज में
हो रहा है। उनके पीएम बने हुए एक साल होने वाले हैं। उनके शासन में महिलाएं
असुरक्षित महसूस कर रही हैं, जैसा कि कांग्रेस के शासन में था। मैं 28
अप्रैल को एक दोस्त के माध्यम से वाराणसी के एसपी से मिली और अपने साथ हुई
घटना के बारे में बताया। इसके बाद 1 मई को मामला दर्ज हुआ।'' बता दें कि
वाराणसी पीएम मोदी का संसदीय क्षेत्र है। डॉक्टर ने आरोप लगाया कि मोदी घर
में दीया जलाने के बजाए विदेश पर फोकस किए हुए हैं। डॉक्टर ने कहा, ''मोदी
को यह याद रखना चाहिए कि वह सिर्फ अमीर और प्रभावशाली लोगों के पीएम नहीं
हैं। वह सिर्फ कॉरपोरेट का नहीं, बल्कि हर तबके का प्रतिनिधित्व करते हैं।
मोदी को विदेशों में घूमकर निवेश लाने के बजाए अपने देश पर ध्यान देना
चाहिए। हम भारतीय किसी विदेशी निवेश से ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।''
क्या कहना है पुलिस का
वहीं, इस पूरे मामले पर पुलिस ने कहा कि मामला दर्ज करने में देरी इस
वजह से हुई, क्योंकि डॉक्टर इस मामले में बयान नहीं देना चाहती थीं। लंका
पुलिस स्टेशन के एसएचओ रमेश यादव ने कहा कि जब एसपी ने डॉक्टर को राजी
किया, उसके बाद उन्होंने बयान दिया। हमने उनके फोन को सर्विलांस पर डाल
दिया है और दोषियों को पकड़ने की कोशिश की जा रही है।
क्या कहना है यूनिवर्सिटी प्रशासन का
बीएचयू के चीफ प्राक्टर प्रो. सत्येंन्द्र सिंह ने बताया, ''डॉक्टर ने
मामले को लेकर हमसे शिकायत की थी। हमने लिखित में मांगा था लेकिन उन्होंने
हमें न देकर सीधे पुलिस को दिया। विश्वविद्यालय प्रशासन इस मामले के
आरोपियों की तलाश अपने स्तर पर कर रहा है और पुलिस को हर तरह का सहयोग भी
किया जा रहा है।''
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