Wednesday, 13 May 2015

7 साल से दिल से चिपका है बम का छर्रा, संदिग्ध मानकर बार-बार पकड़ लेती है पुलिस

जयपुर। सुभाष नगर के रहने वाले 45 वर्षीय सुनील पारीक 13 मई 2008 से सीने में बम का दर्द लिए घूम रहे हैं। इनके सीने में आज भी बम का एक बड़ा छर्रा है जो दिल से महज आधे इंच की दूरी पर है। यह छर्रा जयपुर बम ब्लास्ट के दैारान सीने को चीरता हुआ अंदर घुस गया था। तब डॉक्टर्स ने छर्रा निकालने से मना कर दिया। कहा पसलियां टूट जाएंगी। अब यही छर्रा पारीक को पुलिस की नजर में बार-बार संदिग्ध बना एक और दूसरा दर्द देता है।
पारीक हर मंगलवार को चांदपोल स्थित हनुमान जी के मंदिर में दर्शन करने जाते हैं। उस दिन भी दर्शन करके ही बाहर आए थे। एक हाथ में प्रसाद और दूसरे हाथ से एक मित्र के अभिवादन को स्वीकार कर रहे थे। तभी अचानक जोर का धमाका हुआ। जब इन्होंने खुद को देखा तो ये खून से लथपथ हो चुके थे। कुछ भी सुनाई नहीं दे रहा था। आंखों के सामने अंधेरा छाने लगा। ईश्वर की कृपा से बच गए, लेकिन बिना अपराधी के भी पुलिस की नजर में यह धमाका उन्हें संदिग्ध बना गया।
होती है गहन चेकिंग
आज भी जब ये किसी मेटल डिटेक्टर से गुजरते हैं तो इनकी गहन जांच-पड़ताल होती है। मेटल डिटेक्टर उन्हें अटका देता है और पुलिस पकड़ लेती है। फिर बार-बार चेक किया जाता है। जब ये बताते हैं कि इनके सीने में मेटल का एक छर्रा दफन है और बम विस्फोट के दौरान घुस गया था तो कभी छोड़ दिया जाता है और कभी प्रूफ देने की बात की जाती है। कई बार किसी बड़े कार्यक्रम में घुसने तक नहीं दिया जाता। परिवार के साथ जब किसी कार्यक्रम में इस प्रकार की घटना होती है तो स्थिति बेहद खराब हो जाती है।
सीने में छेद हो गया
जब इन्होंने सीने में दर्द महसूस करते हुए अपना हाथ उस ओर बढ़ाया तो पाया कि दिल के पास एक बड़ा सुराख हो गया और इनकी अंगुलियां उसमें आसानी से चली गईं। इसके बाद इन्हें बस इतना याद है कि कुछ लोग इन्हें एसएमएस हॉस्पिटल ले गए, जहां उन्हें जमीन पर लिटा दिया गया। पूरे हॉस्पिटल में चीख-पुकार का आलम था।
नहीं कर रहे थे ऑपरेशन
सुनील पारीक ने बताया कि इन्हें शहर के एसके सोनी हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया। वहां पांच दिन तक आईसीयू में रखा गया। ऑपरेशन नहीं किया गया तो परिजनों ने मीडिया को बताया। दैनिक भास्कर ने इसे प्रमुखता से प्रकाशित करते हुए घायलों के दर्द को सरकार के कानों तक पहुंचाया। तब जाकर इनका ऑपरेशन हुआ। ऑपरेशन में शरीर से कीलें और कंधे व हाथ से छर्रे निकाले गए। ऑपरेशन के बाद डॉक्टर्स ने इन्हें साधारण घायल की श्रेणी में डाल दिया, जिससे इन्हें पर्याप्त मुआवजा भी नहीं मिला। इनका आरोप है कि डॉक्टर्स ने इनके परिजनों के विरोध का बदला लिया। इन्हें डेढ़ लाख की जगह महज 25 हजार रुपए मिले।
कब तक भुनाते रहोगे बम विस्फोट को :
शहर के स्कूलों में जब ये अपने बच्चों के एडमिशन के लिए रियायत की बात करते हैं, तो स्कूल संचालकों का टका सा जवाब होता है, आखिर कब तक भुनाते रहोगे इस बम विस्फोट को।
साइकिल बम का हुआ था इस्तेमाल
3 मई, 2008 को जयपुर में लगातार सात बम विस्फोट हुए थे। ये विस्फोट 12 मिनट के भीतर ऐसे स्थान पर हुए जहां घनी आबादी है। ये धमाके त्रिपोलिया बाजार, जौहरी बाजार, माणक चौक, बड़ी चौपड़ और छोटी चौपड़ पर हुए। त्रिपोलिया बाजार में भी एक विस्फोट हुआ, जहां एक हनुमान मंदिर है और उस समय वहां भारी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।

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