लंदन। जिस तरह धरती पर
मौजूद पानी यहां क्षुद्र ग्रहों और धूमकेतुओं के टकराने से पहुंचा, उसी तरह
अन्य ग्रहों पर भी इन भपडों के जरिये पानी पहुंचने की संभावनाएं काफी
ज्यादा हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि इन संभावनाओं के चलते धरती की तरह
अन्य ग्रहों पर भी समुद्र हो सकते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ वॉरविक के
शोधकर्ताओं के मुताबिक क्षुद्र ग्रह और धूमकेतुओं सहित ऐसे कई भपडों के
साक्ष्य मिले हैं, जिन पर बड़ी मात्रा में पानी मौजूद है। शोधकर्ताओं के
मुताबिक धरती की तरह अन्य ग्रहों पर भी इन भपडों के जरिये पानी पहुंचा हो,
इस बात की पर्याप्त संभावनाएं हैं।
यूनिवर्सिटी के खगोल विज्ञान और खगोल
भौतिकी समूह के डॉ रॉबर्टो रद्दी का कहना है कि शोध में पाया गया है कि
हमारे सौरमंडल में पाए जाने वाले पानी की प्रचुर मौजूदगी वाले भपड अन्य
जगहों पर भी बड़ी संख्या में मौजूद हो सकते हैं। कई ग्रहों पर धरती के
बराबर ही पानी मौजूद हो सकता है। माना जाता है कि शुरुआत में धरती पर पानी
नहीं था, लेकिन पानी की मौजूदगी वाले भपडों और धूमकेतुओं के धरती से टकराने
के कारण यहां पानी आया।
एनसेलेडस पर जीवन होने की संभावना
वैज्ञानिकों ने शनि के उपग्रह एनसेलेडस पर
मौजूद झरने जैसी एक संरचना में पानी का पीएच नंबर होने का पता लगाया है।
इस खोज से संकेत मिलता है कि एनसेलेडस पर जीवन हो सकता है। विभिन्न पदार्थो
की अम्लीयता और क्षारीयता की मात्रा उसके पीएच नंबर से पता की जाती है।
कार्नेगी मेलोन यूनिवॢसटी के क्रिस्टोफर ग्लेन सहित वैज्ञानिकों के एक समूह
ने शनि के छठवें सबसे बड़े उपग्रह पर पानी की मौजूदगी के यह साक्ष्य खोजे
हैं।
इससे यह संभावना बढ़ी है कि एनसेलेडस पर
या तो अभी जीवन मौजूद होगा या फिर पहले कभी रहा होगा। यह उपग्रह भूगर्भ
विज्ञान की दृष्टि से काफी सक्रिय है और माना जाता है कि इसकी बर्फ वाली
सतह के नीचे पानी का समुद्र मौजूद हो सकता है। संभव है कि इसी समुद्र से
पानी और बर्फ का यह झरना फूट रहा हो। शनि की कक्षा में गए कैसिनी
स्पेसक्राफ्ट ने एनसेलेडस का जायजा लिया था। एनसेलेडस की इन्हीं तस्वीरों
के हवाले से विश्लेषण से वैज्ञानिकों ने ताजा निष्कर्ष पेश किया है।
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