कराची। पाकिस्तान के कराची में बुधवार को मोटरसाइकिल सवार आठ
बंदूकधारियों ने एक बस में घुस कर अंधाधुंध फायरिंग की। इसमें कम से कम 43
लोग मारे गए और 16 जख्मी हो गए। एक बच्ची सीट के नीचे जा बैठी तो वह
सलामत रही। मरने वालों में 16 महिलाएं थीं। बताया जाता है कि हमलावार पुलिस
की वर्दी पहने थे। हमले की जिम्मेदारी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान
(टीटीपी) ने ली है।
सीट के नीचे छिपकर एक लड़की ने बचाई जान
पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक मेमन मेडिकल सेंटर के सिक्योरिटी
एडवाइजर राणा एम रज्जाक ने बताया कि जो लोग बच गए वे गंभीर रूप से घायल हो
गए थे। सिर्फ एक लड़की को कुछ नहीं हुआ क्योंकि गोलियां चलने के वक्त उसने
सीट के नीचे छिपकर अपनी जान बचा ली थी।
इस्माइली मुस्लिमों को पाकिस्तान में अमन पसंद, तरक्की पसंद और सियासत से दूर रहने वाला समुदाय माना जाता है। पाकिस्तान के हेल्थ और एजुकेशन सेक्टर में इस्माइली समुदाय के लोगों की संख्या ज्यादा है। समुदाय के अधिकतर लोग प्रिंस करीम आगा खान को अपना आध्यात्मिक गुरु मानते हैं। 2013 में भी कराची के आयशा मंजिल इलाके में इस समुदाय के खिलाफ हुए हमले में 4 लोगों की मौत हुई थी और 42 घायल हुए थे। पाकिस्तान में बीते 2 साल में 1000 शिया मुस्लिमों की आतंकी हमलों में जान जा चुकी है।
हर रोज सुबह 9 बजे इलाके से गुजरती है बस
हमला कराची के सफूरा चौक इलाके में हुआ। सिंध पुलिस के आईजी गुलाम हैदर जमाली ने बताया कि जिस बस पर हमला हुआ, वह हर सुबह 9 बजे सफूरा चौक से निकलती है। बस में इस्माइली समुदाय के 60 लोग सवार थे। आतंकियों ने लोगों की हत्या करने के लिए 9 एमएम की पिस्तौल का इस्तेमाल किया। हमले के बाद वे भाग निकलने में कामयाब रहे।
हमला कराची के सफूरा चौक इलाके में हुआ। सिंध पुलिस के आईजी गुलाम हैदर जमाली ने बताया कि जिस बस पर हमला हुआ, वह हर सुबह 9 बजे सफूरा चौक से निकलती है। बस में इस्माइली समुदाय के 60 लोग सवार थे। आतंकियों ने लोगों की हत्या करने के लिए 9 एमएम की पिस्तौल का इस्तेमाल किया। हमले के बाद वे भाग निकलने में कामयाब रहे।
बस में घुसे और बरसा दीं गोलियां
एक चश्मदीद के मुताबिक तीन-चार मोटरसाइकिल पर सवार आठ लोगों ने बस पर
अंधाधुंध फायरिंग कर दी। हालांकि, वीडियो फुटेज में बस पर गोलियों के
निशान नहीं दिखाई दे रहे हैं। इससे लगता है कि हमलावर बस के अंदर घुस गए
थे। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर 'डॉन'
अखबार को बताया कि आतंकी बस के अंदर घुस गए थे। उन्होंने मुसाफिरों के
सिर में गोलियां मारीं।
पुलिस की वर्दी में आए थे हमलावर
हमले के बाद बस के अंदर खाली कारतूसों के अलावा नीले रंग की टोपियां भी मिली हैं। ऐसी टोपियां कराची में पुलिसकर्मी पहनते हैं। इसलिए माना जा रहा है कि वे पुलिस की वर्दी पहनकर हमला करने आए थे।
हमले के बाद बस के अंदर खाली कारतूसों के अलावा नीले रंग की टोपियां भी मिली हैं। ऐसी टोपियां कराची में पुलिसकर्मी पहनते हैं। इसलिए माना जा रहा है कि वे पुलिस की वर्दी पहनकर हमला करने आए थे।
हमला इस्माइली समुदाय के खिलाफ था
इस हमले को इस्माइली समुदाय के खिलाफ माना जा रहा है। इस समुदाय के लोग शिया मुस्लिम होते हैं। शिया मुस्लिमों की पाकिस्तान में आबादी 20% है। हमले का शिकार हुई बस अल अजहर गार्डन कॉलोनी से आ रही थी जो इस्माईली समुदाय का इलाका है।
तरक्की पसंद है यह समुदायइस हमले को इस्माइली समुदाय के खिलाफ माना जा रहा है। इस समुदाय के लोग शिया मुस्लिम होते हैं। शिया मुस्लिमों की पाकिस्तान में आबादी 20% है। हमले का शिकार हुई बस अल अजहर गार्डन कॉलोनी से आ रही थी जो इस्माईली समुदाय का इलाका है।
इस्माइली मुस्लिमों को पाकिस्तान में अमन पसंद, तरक्की पसंद और सियासत से दूर रहने वाला समुदाय माना जाता है। पाकिस्तान के हेल्थ और एजुकेशन सेक्टर में इस्माइली समुदाय के लोगों की संख्या ज्यादा है। समुदाय के अधिकतर लोग प्रिंस करीम आगा खान को अपना आध्यात्मिक गुरु मानते हैं। 2013 में भी कराची के आयशा मंजिल इलाके में इस समुदाय के खिलाफ हुए हमले में 4 लोगों की मौत हुई थी और 42 घायल हुए थे। पाकिस्तान में बीते 2 साल में 1000 शिया मुस्लिमों की आतंकी हमलों में जान जा चुकी है।
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