Saturday, 30 May 2015

सूट-बूट वाली सरकार सूटकेस सरकार से बेहतरः मोदी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी सरकार के एक साल पूरा होने के मौके पर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के 'सूट-बूट वाली सरकार' के जुमले पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि सूट-बूट वाली सरकार सूटकेस सरकार से बेहतर होती है।

न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में प्रधानमंत्री ने कहा, 'सूट-बूट निश्चित तौर पर सूटकेस से अधिक स्वीकार्य है। 60 सालों तक शासन करने के बाद कांग्रेस को अचानक गरीबों का स्मरण हो आया। कांग्रेस की अदूरदर्शी नीति के कारण इस देश के लोगों को काफी सहना पड़ा और वे गरीब बने रहे।' कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए मोदी ने कहा, 'क्या कोयला और स्पेक्ट्रम घोटाले या राष्ट्रमंडल विफलता से गरीबों को कोई लाभ हुआ? सभी लोगों को पता है कि इसके लाभार्थी कौन थे... कुछ चुने हुए उद्योगपति और ठेकेदार।'

यह पूछे जाने पर कि एक साल पूरा होने पर वह अपनी सरकार को 10 में से कितने नंबर देते हैं। उनका जवाब था, 'यह इस देश के लोगों का अधिकार है कि वह हमें किस तरह से आंकते हैं। मैं केवल इतना कह सकता हूं कि हमने एक ठोस बुनियाद रखी है।'

अच्छे दिनों के वादे के साथ सरकार में आई मोदी सरकार पहले साल के बाद कितने वादे पूरे कर पाई है, इसके जवाब में मोदी कहते हैं, 'इस साल की सबसे अच्छी बात यह रही है कि हम इस वादे को पूरा करने में कामयाब रहे हैं कि हमारा इरादा साफ है और हमारा काम लंबे अर्से के लिए देशहित में है। साल भर पहले सरकार के अलग-अलग स्तरों पर भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे थे और अभी की स्थिति इससे अलग है। हमने एक साफ सुथरी और प्रभावशाली सरकार दी है।'

उन्होंने कहा, 'क्या बुरे दिनों की विदाई देश के लिए अच्छे दिन नहीं है?' सरकार के रवैये के सवाल पर मोदी का कहना था, 'हम ब्लैक मनी और कर चोरी से कड़ाई से निपटना चाहते हैं। G-20 की बैठक में हमने इस मुद्दे को उठाया। कैबिनेट की पहली ही बैठक में SIT के गठन का फैसला किया। इस मसले पर हम संसद में कानून ले कर आए जो बेहद सख्त है।'

राजनीतिक रूप से संवेदनशील भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर मोदी ने कहा, 'विपक्ष का विरोध दुर्भाग्यपूर्ण है। भूमि अधिग्रहण का सरकार की भागीदारी वाली विकास गतिविधियों में जरूरी है, खासकर पिछड़े क्षेत्रों में। हम इस मसले पर विपक्षी पार्टियों के साथ बातचीत करने को तैयार हैं।'

केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा भूमि अधिग्रहण अध्यादेश को तीसरी बार लागू करने के निर्णय के बीच मोदी ने एक दूसरे इंटरव्यू में कहा कि यह विधेयक मेरे लिए जीवन या मरण का विषय नहीं है। 'द ट्रिब्यून' अखबार को दिए इंटरव्यू में प्रधानमंत्री ने कहा, 'यह मेरे लिए जीवन या मरण का विषय नहीं है और न ही यह मेरी पार्टी या सरकार का एजेंडा था। मैं इस बारे में कोई भी सुझाव स्वीकार करने को तैयार हूं।'

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