बर्न। स्विटजरलैंड ने स्विस बैंकों में खाता रखने वाले पांच और ऐसे भारतीयों का नाम उजागर किया है, जिनके खिलाफ भारत में कर चोरी की जांच चल रही है। मंगलवार को स्विटजरलैंड के संघीय राजपत्र में जिन भारतीयों के नाम सामने आए, उनमें उद्योगपति यश बिड़ला, पोंटी चढ्डा के दामाद गुरजीत सिंह कोचर और दिल्ली की व्यवसायी रितिका शर्मा शामिल हैं। इसके अलावा मुंबई से सिटी लिमोसिन कंपनी के जरिये पोंजी कारोबार करने वाले सैयद मुहम्मद मसूद और उनकी पत्नी कौसर मुहम्मद मसूद काम नाम भी उजागर हुआ है। इन दोनों पर सिटी लिमोसिन घोटाले में भी शामिल रहने का आरोप है।
बिड़ला और रितिका शर्मा के बारे में स्विटजरलैंड पहले भी भारत के साथ कुछ जानकारी साझा कर चुका है। राजपत्र में इन दोनों का भारत में पता भी बताया गया है। हालांकि कौन सी जानकारी भारत को दी गई है, इसका कोई उल्लेख नहीं किया गया है। इससे पहले सोमवार रात को स्नेहलता साहनी और संगीता साहनी के नाम सामने आए थे। स्विटजरलैंड के राजपत्र में पिछले दो दिनों में कुल मिलाकर सात भारतीयों के नामों का खुलासा किया गया है। इसमें अमेरिका और इजरायल समेत कई अन्य विदेशी नागरिकों के नाम भी सार्वजनिक किए गए हैं। इन लोगों के खिलाफ उनके अपने देशों में जांच चल रही है।
क्यों किए नाम उजागर
भारतीय अधिकारियों ने इन लोगों के बारे में स्विस प्रशासन से जानकारी मांगी थी। इसी के तहत स्विटजरलैंड के संघीय राजपत्र में इनके नाम जाहिर किए गए। प्रवर्तन निदेशालय के अनुरोध पर सैयद मसूद और कौसर मसूद के खातों को भी कुछ साल पहले सीज किया गया था।
30 दिन में अपील की सलाह
स्विस फेडरल टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन ने इन लोगों से कहा है कि अगर वे नहीं चाहते हैं कि उनकी विस्तृत जानकारी भारतीय अधिकारियों को दी जाए, तो वे 30 दिन के भीतर स्विस कोर्ट में अपील कर सकते हैं। कर मामलों पर 'आपसी सहायता संधि' के तहत स्विटजरलैंड को भारत के साथ जानकारी साझा करना जरूरी है।
सबने साध रखी है चुप्पी
स्विस राजपत्र में जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उन सबने इसको लेकर चुप्पी साध रखी है। बिड़ला की प्रतिक्रिया जानने के लिए उनके कार्यालय को कई मेल भेजे गए, लेकिन एक का भी जवाब नहीं आया। शर्मा ने भी किसी फोन का जवाब नहीं दिया। कोचर के परिजन ने कुछ भी टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। उनके बारे में माना जा रहा है कि वे विदेश में हैं। वे आयकर विभाग और कुछ अन्य एजेंसियों की जांच का भी सामना कर रहे हैं। मसूद की ओर से भी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
इन भारतीयों के नाम उजागर
--यश बिरला : यश बिड़ला समूह
--गुरजीत सिंह कोचर : पोंटी चढ्डा के दामाद
--रितिका शर्मा : ब्लेसिंग्स अपारेल
--सैयद मुहम्मद मसूद : सिटी लिमोसिन
--कौसर मुहम्मद मसूद : सैयद मुहम्मद की पत्नी
इसके अलावा सोमवार रात को स्नेहलता साहनी और संगीता साहनी के नाम सामने आए। दोनों की जन्मतिथि के अलावा और कोई जानकारी नहीं दी गई है।
आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ
स्विटजरलैंड सरकार के खुलासों से प्रसन्न वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि इससे आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। वित्त मंत्री ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, 'मैं कई बार यह बात कह चुका हूं कि गोपनीयता के जिस पर्दे की आड़ में भारतीयों ने अपना काला धन अन्य देशों में छिपा रखा है, वह अब उठने वाला है। इन खुलासों से आगे की कार्रवाई के लिए हमें पर्याप्त जानकारी मिल सकेगी।' उन्होंने कहा कि सालभर से हमने लगातार इस मुद्दे पर स्विस अधिकारियों से बात की है
बिड़ला और रितिका शर्मा के बारे में स्विटजरलैंड पहले भी भारत के साथ कुछ जानकारी साझा कर चुका है। राजपत्र में इन दोनों का भारत में पता भी बताया गया है। हालांकि कौन सी जानकारी भारत को दी गई है, इसका कोई उल्लेख नहीं किया गया है। इससे पहले सोमवार रात को स्नेहलता साहनी और संगीता साहनी के नाम सामने आए थे। स्विटजरलैंड के राजपत्र में पिछले दो दिनों में कुल मिलाकर सात भारतीयों के नामों का खुलासा किया गया है। इसमें अमेरिका और इजरायल समेत कई अन्य विदेशी नागरिकों के नाम भी सार्वजनिक किए गए हैं। इन लोगों के खिलाफ उनके अपने देशों में जांच चल रही है।
क्यों किए नाम उजागर
भारतीय अधिकारियों ने इन लोगों के बारे में स्विस प्रशासन से जानकारी मांगी थी। इसी के तहत स्विटजरलैंड के संघीय राजपत्र में इनके नाम जाहिर किए गए। प्रवर्तन निदेशालय के अनुरोध पर सैयद मसूद और कौसर मसूद के खातों को भी कुछ साल पहले सीज किया गया था।
30 दिन में अपील की सलाह
स्विस फेडरल टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन ने इन लोगों से कहा है कि अगर वे नहीं चाहते हैं कि उनकी विस्तृत जानकारी भारतीय अधिकारियों को दी जाए, तो वे 30 दिन के भीतर स्विस कोर्ट में अपील कर सकते हैं। कर मामलों पर 'आपसी सहायता संधि' के तहत स्विटजरलैंड को भारत के साथ जानकारी साझा करना जरूरी है।
सबने साध रखी है चुप्पी
स्विस राजपत्र में जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उन सबने इसको लेकर चुप्पी साध रखी है। बिड़ला की प्रतिक्रिया जानने के लिए उनके कार्यालय को कई मेल भेजे गए, लेकिन एक का भी जवाब नहीं आया। शर्मा ने भी किसी फोन का जवाब नहीं दिया। कोचर के परिजन ने कुछ भी टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। उनके बारे में माना जा रहा है कि वे विदेश में हैं। वे आयकर विभाग और कुछ अन्य एजेंसियों की जांच का भी सामना कर रहे हैं। मसूद की ओर से भी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
इन भारतीयों के नाम उजागर
--यश बिरला : यश बिड़ला समूह
--गुरजीत सिंह कोचर : पोंटी चढ्डा के दामाद
--रितिका शर्मा : ब्लेसिंग्स अपारेल
--सैयद मुहम्मद मसूद : सिटी लिमोसिन
--कौसर मुहम्मद मसूद : सैयद मुहम्मद की पत्नी
इसके अलावा सोमवार रात को स्नेहलता साहनी और संगीता साहनी के नाम सामने आए। दोनों की जन्मतिथि के अलावा और कोई जानकारी नहीं दी गई है।
आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ
स्विटजरलैंड सरकार के खुलासों से प्रसन्न वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि इससे आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। वित्त मंत्री ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, 'मैं कई बार यह बात कह चुका हूं कि गोपनीयता के जिस पर्दे की आड़ में भारतीयों ने अपना काला धन अन्य देशों में छिपा रखा है, वह अब उठने वाला है। इन खुलासों से आगे की कार्रवाई के लिए हमें पर्याप्त जानकारी मिल सकेगी।' उन्होंने कहा कि सालभर से हमने लगातार इस मुद्दे पर स्विस अधिकारियों से बात की है
बर्न।
स्विटजरलैंड ने स्विस बैंकों में खाता रखने वाले पांच और ऐसे भारतीयों का
नाम उजागर किया है, जिनके खिलाफ भारत में कर चोरी की जांच चल रही है।
मंगलवार को स्विटजरलैंड के संघीय राजपत्र में जिन भारतीयों के नाम सामने
आए, उनमें उद्योगपति यश बिड़ला, पोंटी चढ्डा के दामाद गुरजीत सिंह कोचर और
दिल्ली की व्यवसायी रितिका शर्मा शामिल हैं। इसके अलावा मुंबई से सिटी
लिमोसिन कंपनी के जरिये पोंजी कारोबार करने वाले सैयद मुहम्मद मसूद और उनकी
पत्नी कौसर मुहम्मद मसूद काम नाम भी उजागर हुआ है। इन दोनों पर सिटी
लिमोसिन घोटाले में भी शामिल रहने का आरोप है।
बिड़ला और रितिका शर्मा के बारे में
स्विटजरलैंड पहले भी भारत के साथ कुछ जानकारी साझा कर चुका है। राजपत्र में
इन दोनों का भारत में पता भी बताया गया है। हालांकि कौन सी जानकारी भारत
को दी गई है, इसका कोई उल्लेख नहीं किया गया है। इससे पहले सोमवार रात को
स्नेहलता साहनी और संगीता साहनी के नाम सामने आए थे। स्विटजरलैंड के
राजपत्र में पिछले दो दिनों में कुल मिलाकर सात भारतीयों के नामों का
खुलासा किया गया है। इसमें अमेरिका और इजरायल समेत कई अन्य विदेशी नागरिकों
के नाम भी सार्वजनिक किए गए हैं। इन लोगों के खिलाफ उनके अपने देशों में
जांच चल रही है।
क्यों किए नाम उजागर
भारतीय अधिकारियों ने इन लोगों के
बारे में स्विस प्रशासन से जानकारी मांगी थी। इसी के तहत स्विटजरलैंड के
संघीय राजपत्र में इनके नाम जाहिर किए गए। प्रवर्तन निदेशालय के अनुरोध पर
सैयद मसूद और कौसर मसूद के खातों को भी कुछ साल पहले सीज किया गया था।
30 दिन में अपील की सलाह
स्विस फेडरल टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन ने
इन लोगों से कहा है कि अगर वे नहीं चाहते हैं कि उनकी विस्तृत जानकारी
भारतीय अधिकारियों को दी जाए, तो वे 30 दिन के भीतर स्विस कोर्ट में अपील
कर सकते हैं। कर मामलों पर 'आपसी सहायता संधि' के तहत स्विटजरलैंड को भारत
के साथ जानकारी साझा करना जरूरी है।
सबने साध रखी है चुप्पी
स्विस राजपत्र में जिन लोगों के नाम
सामने आए हैं, उन सबने इसको लेकर चुप्पी साध रखी है। बिड़ला की प्रतिक्रिया
जानने के लिए उनके कार्यालय को कई मेल भेजे गए, लेकिन एक का भी जवाब नहीं
आया। शर्मा ने भी किसी फोन का जवाब नहीं दिया। कोचर के परिजन ने कुछ भी
टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। उनके बारे में माना जा रहा है कि वे विदेश
में हैं। वे आयकर विभाग और कुछ अन्य एजेंसियों की जांच का भी सामना कर रहे
हैं। मसूद की ओर से भी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
इन भारतीयों के नाम उजागर
--यश बिरला : यश बिड़ला समूह
--गुरजीत सिंह कोचर : पोंटी चढ्डा के दामाद
--रितिका शर्मा : ब्लेसिंग्स अपारेल
--सैयद मुहम्मद मसूद : सिटी लिमोसिन
--कौसर मुहम्मद मसूद : सैयद मुहम्मद की पत्नी
इसके अलावा सोमवार रात को स्नेहलता
साहनी और संगीता साहनी के नाम सामने आए। दोनों की जन्मतिथि के अलावा और कोई
जानकारी नहीं दी गई है।
आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ
स्विटजरलैंड सरकार के खुलासों से
प्रसन्न वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि इससे आगे की कार्रवाई का रास्ता
साफ हो गया है। वित्त मंत्री ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, 'मैं कई
बार यह बात कह चुका हूं कि गोपनीयता के जिस पर्दे की आड़ में भारतीयों ने
अपना काला धन अन्य देशों में छिपा रखा है, वह अब उठने वाला है। इन खुलासों
से आगे की कार्रवाई के लिए हमें पर्याप्त जानकारी मिल सकेगी।' उन्होंने कहा
कि सालभर से हमने लगातार इस मुद्दे पर स्विस अधिकारियों से बात की है
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