Friday, 8 May 2015

मोटापे के कारण प्लेन में हुई शर्मिंदा तो घटाया 64 किलो वजन

बीजिंग। लंदन से हांगकांग जाने के लिए ब्रिटिश महिला शेरॉन प्लेन में सवार हुई। लेकिन 11 घंटे का सफर उसने खड़े होकर तय किया। ऐसा इसलिए क्योंकि उसका भारी-भरकम शरीर सीट्स में एडजस्ट नहीं हो पा रहा था। उसे यह डर भी था कि कहीं अगली सीट पर बैठी महिला यात्री को नुकसान न पहुंच जाए।
43 वर्षीय डिजाइनर शेरॉन के लिए यह अनुभव शर्मिंदा करने वाला रहा। उसने इस यात्रा के बाद अपना वजन कम करने का फैसला लिया। उसे अक्सर बिजनेस ट्रिप के लिए लंदन जाना पड़ता था। इसलिए उसने प्लेन की बजाय ट्रेन का विकल्प चुना। उसने हाई-फ्लाइंग जॉब को छोड़कर फ्रीलांस डिजाइनर के तौर पर काम शुरू कर दिया। ताकि ज्यादा से ज्यादा चलना-फिरना पड़े। साथ ही वह घर पर रह सके और रेगुलर वॉक के लिए समय निकाल सके।
पिछले साल उसने मार्च में अपने संकल्प पर काम शुरू किया था। तब से अब तक वह लगभग 64 किलो वजन घटा चुकी है। यानी उसका वजन 125 किलो से घटकर 61 किलो रह गया है। शेरॉन कहती है पता नहीं लोग मोटापा कैसे बर्दाश्त कर लेते हंै, मुझे तो यह बात हमेशा दुखी करती थी। उस समय मेरे दिमाग में मेरे काम के अलावा कुछ भी नहीं था, इसलिए मैं खुद पर ध्यान ही नहीं दे पाती थी। मैं दस वर्षों से लंदन से हॉन्गकॉन्ग आ-जा रही थी लेकिन हर बार यही सोचती थी कि मेरे आगे वाली सीट पर कोई हो। लेकिन इस बार की ट्रिप में मुझे ऐसी कोई चिंता नहीं थी। जबकि मैंने अपना सफर इकोनॉमी क्लास में ही तय किया।
2012 की उस प्लेन यात्रा में मुझे लगा था कि मुझे जबर्दस्ती सीट में घुसा दिया गया, जो मेरे लिए तो असहज था ही, मेरे आगे बैठने वाली महिला यात्री के लिए भी। अंतत: मैं आईपॉड लेकर खड़ी हो गई थी। और पूरा सफर मैंने खड़े-खड़े ही तय किया था। मैं वाकई चिंतित थी कि कहीं आगे बैठी महिला को मेरी वजह से चोट लग जाए। हालांकि उसने कुछ भी नहीं कहा था, लेकिन मुझे ही लगा कि मेरे मोटापे के कारण उसकी यात्रा क्यों तकलीफ से भरी हो? फ्लाइट अटेंडेंट ने मुझे वह सीट भी दी थी जो वह टेकऑफ के दौरान उपयोग करती थी। लेकिन लंबे-चौड़े जेट में खड़े होने की पर्याप्त जगह होती है। मैंने खड़े रहना ही ही तय किया। उसी का परिणाम है कि आज मैं बिल्कुल बेफिक्र होकर यात्रा कर पा रही हूं।

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