नई दिल्ली. प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी के कहा कि इस बात में कोई संदेह नहीं है कि 21वीं सदी एशिया
की होगी, लेकिन बुद्ध के विचारों का समावेश होना जरूरी है। बुद्ध के
विचारों को अपनाए बिना ऐसा नहीं हो सकता।
सोमवार को बुद्ध पूर्णिमा के मौके पर दिल्ली में आयोजित एक
अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि आज दुनिया
जिन मुद्ददों के प्रति काम कर रहे हैं, बुद्ध ने हमे उनके बारे में 25
हजार साल पहले ही बता दिया था। चाहे वह मजदूरों से संबंधित हो या महिलाओं
से संबंधित।
बु्द्ध का एक मंत्र ही ढेरों किताबों पर भारी
महात्मा बुद्ध ने व्यक्ति विकास के बारे में भी हमें पहले बता दिया
था। आप व्यक्तित्व विकास से जुड़ी ढेरों किताबें ले आएं। इन्हें एक पलड़े
में रख दें और बुद्ध के एक मंत्र को तराजू के दूसरे पलड़े में रख दें, तो
भी बुद्ध का एक मंत्र उन किताबों से भारी साबित होगा। उनका यह मंत्र है,
'आत्म दीपो भव'। बुद्ध ने हमें अष्ट सम्यक मार्ग दिखाए, जो मानव जीवन के
आधार हैं।
संकटों का समाधान बुद्ध के पास
नरेंद्र मोदी ने
कहा कि आज हम जिन संकटों से जूझ रहे हैं, उनका जवाब बुद्ध के पास ही है।
अगर हमें युद्ध और इन संकटों से मुक्ति पाना है, तो हमें त्याग का मार्ग
अपनाना होगा, जो बुद्ध ने हमें दिया है। गौतम बुद्ध का परिवार को छोड़ना
बताता है कि उनके मन में करुणा की तीव्रता कितनी रही होगी।
मोदी के भाषण के अन्य चुनिंदा अंश
-आज का दिन विशेष है, लेकिन इस समय हम दुखी हैं, क्योंकि जिस नेपाल को हम प्यार करते हैं, वह मुसीबत में है।
-वह देश जहां भगवान बुद्ध का जन्म हुआ, आज एक कठिन दौर से गुजर रहा है। मूझे नहीं पता कि नेपाल को कब तक इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
-हम जब भी भगवान बुद्ध के बारे में चर्चा करते हैँ, हमेशा यह बात स्पष्ट होती है कि उनकी जिंदगी और संदेश हमेशा ही प्रासंगिक है।
-आज के दौर में यह बात की जा रही है कि करुणा का संदेश कहां से आया? इसका जवाब है बुद्ध।
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