Friday, 8 May 2015

350 साल बाद 20 साल की ब्लैक बनीं ब्रिटेन की सबसे युवा सांसद

पैस्ले (ब्रिटेन)। ब्रिटेन में हुए आम चुनाव के शुक्रवार को आए नतीजों में 20 साल की माहैरी ब्लैक सांसद चुनी गई हैं। बीते करीब 350 साल के इतिहास में पहली बार ब्रिटेन में इतनी कम उम्र का कोई जन प्रतिनिधि चुना गया है। 2006 में ब्रिटेन चुनाव में खड़े होने के लिए न्यूनतम उम्र सीमा 21 से घटाकर 18 कर दी गई थी। इससका फायदा ब्लैक को मिला। बता दें कि 1667 में 13 वर्षीय क्रिस्टोफर मॉन्क ( शाही उपाधि- सेकंड ड्यूक ऑफ एल्बेमार्ले) सबसे युवा सांसद बने थे। हाल-फिलहाल की बात करें तो 1983 में चार्ल्स कैनेडी ने 23 साल की उम्र में चुनाव जीता था।
धुरंधर नेता को हराया
स्कॉटिश नेशनल पार्टी (एसएनपी) की ब्लैक ने पैस्ले और रेनफ्रेशर साउथ इलाके से लेबर पार्टी के 47 वर्षीय धुरंधर नेता और पूर्व सांसद डगलस एलेक्जेंडर को 5000 वोटों से हराया। एलेक्जेंडर पहली बार 1997 में पैस्ले और रेनफ्रेशर साउथ सीट से सांसद चुने गए थे। वे 2010-2011 में लेबर पार्टी की सरकार में विदेश सचिव रह चुके हैं। ब्लैक के कुल 23,548 वोट के मुकाबले उन्हें सिर्फ 17,864 वोट ही मिले। जीत के बाद ब्लैक ने आम स्कॉटिश व्यक्ति के जीवन को बेहतर बनाने की कसम खाई। जीत के बाद पत्रकारों ने ब्लैक से पूछा कि आप अगला काम क्या करेंगी, तो उन्होंने कहा कि वह सोना चाहती हैं। इसके बाद इस महीने के आखिर तक अपनी डेजर्टेशन पूरा करेंगी।
पॉलिटिकल साइंस की स्टूडेंट, फुटबॉल बेहद पसंद
ब्लैक ग्लास्गो यूनिवर्सिटी में पॉलिटिकल साइंस की स्टूडेंट हैं। हाल ही में उन्होंने फाइनल एग्जाम दिए हैं। फुटबॉल की जबरदस्त प्रशंसक मानी जाने वाली ब्लैक अपने स्कूल में फुटबॉल टीम की सदस्य भी थीं। उन्हें म्यूजिक सुनना और कई तरह के साज बजाना पसंद है।
लेबर पार्टी का समर्थन करता था परिवार
ब्लैक की परवरिश लेबर पार्टी का समर्थन करने वाले आम स्कॉटिश परिवार में हुई। हालांकि, बाद में उनका पार्टी से मोहभंग हो गया। ब्लैक का कहना है कि लेबर पार्टी ने अपने समर्थकों और वामपंथी जड़ों से काफी दूरी बना ली है, जिस कारण उन्होंने लेबर पार्टी से हाथ खींच लिया।
स्कॉटलैंड में चलाया था राष्ट्रवादी कैम्पेन
ब्लैक की इस जीत में बीते साल सितंबर में ब्रिटेन से अलग होने के लिए स्कॉटलैंड में कराया गया जनमत संग्रह अहम मोड़ साबित हुआ। अक्टूबर में ब्लैक ने ऐसे कई कैम्पेन चलाए, जिसमें स्कॉटलैंड के हक में वोट न देने वालों को सेल्फिश (स्वार्थी) करार दिया गया। इसके बाद वह मीडिया की नजरों में आ गईं। नतीजा यह हुआ कि राष्ट्रवादी स्कॉटिश लोगों ने उन्हें अपना नेता चुन लिया। ब्लैक की जीत को स्कॉटलैंड में राष्ट्रवादियों की जीत का प्रतीक माना जा रहा है।

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