सड़क परिवहन और सुरक्षा अधिनियम बिल-2015 के प्रारूप में परिवहन
मंत्रालय ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जैसे प्रावधान
शामिल करने से पीछे हट रहा है। पहली बार दुर्घटना बीमा की सीमा तय कर दी गई
है। सूत्रों का कहना है कि बीमा कंपनियों के दबाव के चलते अब दुर्घटना
बीमा राशि किसी भी सूरत में 15 लाख रुपये से अधिक नहीं मिलेगी।
इसके अलावा बच्चों की सुरक्षा से जुड़े तमाम प्रावधान भी हटा दिए गए हैं। सीट बेल्ट और हेलमेट के मामले में भी नरमी दिखाई है। राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा अथॉरिटी एवं राज्य सुरक्षा अथॉरिटी के गठन से पहले ही उनके पर कतरने का प्रावधान कर दिया गया है। गत वर्ष केंद्रीय मंत्री गोपीनाथ मुंडे की सड़क हादसे में हुई मौत के बाद नए सड़क परिवहन और सुरक्षा अधिनियम बिल पर काम शुरू हुआ था।
बिल के पहले प्रारूप में ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की बात कही गई। कई ट्रैफिक उल्लंघनों में जुर्माना राशि 50 हजार रुपये तक रखी गई थी। अब वह राशि दो हजार रुपये तक पहुंच गई है। इसके बाद सरकार पर जब विभिन्न संगठनों का दबाव पड़ा तो बिल के चौथे प्रारूप में उनका असर भी दिख गया। कई अहम प्रावधान, जो पहले प्रारूप में शामिल थे, अब कहीं भी दिखाई नहीं पड़ रहे हैं।
सूत्र बताते हैं कि अगले सप्ताह आने वाले बिल के पांचवें और अंतिम प्रारूप में सड़क सुरक्षा से जुड़ी 45 धाराओं में से 40 अध्यायों को हटाने की तैयारी हो गई है। इसके पीछे तर्क दिया गया है कि बाद में इन अध्यायों पर नियम बनेंगे। फिलहाल वे अध्याय कानून बनने की प्रक्रिया का हिस्सा नहीं होंगे। मतलब साफ है कि इन नियमों में कोई भी परिवहन मंत्री अपनी मर्जी से बदलाव कर सकेगा। सरकार ने इस बिल को महज एक नया मोटर वाहन अधिनियम बना दिया है।
इसके अलावा बच्चों की सुरक्षा से जुड़े तमाम प्रावधान भी हटा दिए गए हैं। सीट बेल्ट और हेलमेट के मामले में भी नरमी दिखाई है। राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा अथॉरिटी एवं राज्य सुरक्षा अथॉरिटी के गठन से पहले ही उनके पर कतरने का प्रावधान कर दिया गया है। गत वर्ष केंद्रीय मंत्री गोपीनाथ मुंडे की सड़क हादसे में हुई मौत के बाद नए सड़क परिवहन और सुरक्षा अधिनियम बिल पर काम शुरू हुआ था।
बिल के पहले प्रारूप में ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की बात कही गई। कई ट्रैफिक उल्लंघनों में जुर्माना राशि 50 हजार रुपये तक रखी गई थी। अब वह राशि दो हजार रुपये तक पहुंच गई है। इसके बाद सरकार पर जब विभिन्न संगठनों का दबाव पड़ा तो बिल के चौथे प्रारूप में उनका असर भी दिख गया। कई अहम प्रावधान, जो पहले प्रारूप में शामिल थे, अब कहीं भी दिखाई नहीं पड़ रहे हैं।
सूत्र बताते हैं कि अगले सप्ताह आने वाले बिल के पांचवें और अंतिम प्रारूप में सड़क सुरक्षा से जुड़ी 45 धाराओं में से 40 अध्यायों को हटाने की तैयारी हो गई है। इसके पीछे तर्क दिया गया है कि बाद में इन अध्यायों पर नियम बनेंगे। फिलहाल वे अध्याय कानून बनने की प्रक्रिया का हिस्सा नहीं होंगे। मतलब साफ है कि इन नियमों में कोई भी परिवहन मंत्री अपनी मर्जी से बदलाव कर सकेगा। सरकार ने इस बिल को महज एक नया मोटर वाहन अधिनियम बना दिया है।
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