Sunday, 1 November 2015

साहित्यकारों की सम्मान वापसी के खिलाफ 'किताब वापसी अभियान' शुरू

कलबुर्गी हत्याकांड और दादरी घटनाक्रम के बाद केंद्र सरकार का विरोध करते हुए कई साहित्यकारों ने अपना सम्मान लौटा दिया था। अब सोशल मीडिया पर इन साहित्यकारों के विरोध में 'किताब वापसी अभियान' शुरू हुआ है। सबसे खास बात यह है कि इस अभियान के शुरू होने के कुछ ही घंटों में हजारों लोग इससे जुड़ चुके हैं।
 जिन लेखकों ने अपना सम्मान लौटाया है, उनकी किताबें, जो हम सबने भूलवश खरीद ली हैं, उन्हें वापस करेंगे, क्योंकि हमने जिन लेखक की किताब खरीदी थी, वह एक स्वतंत्र चिंतक था। आज वह लेखक राजनीति पर उतर आया है, तो वह राजनीति ही करें। हम
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सभी पाठक के तौर पर उनके पुरस्कार लौटाने की कार्यवायी की आलोचना करते हैं।
अभियान के द्वारा जिन साहित्यकारों की किताबें वापस की जा रही हैं उनमें उदय प्रकाश, अशोक वाजपेयी, कृष्णा सोबती, मंगलेश डबराल, जी एन देवी, नयनतारा सहगल, केकी दारुवाला, अनिल जोशी, वरियम सिंह संधु, सुरजीत पातर, जसविन्दर, गुरबचन भुल्लर, आतमजीत, बलदेव सिंह, दर्शन बत्तर, अजमेर सिंह औलख, मोहन भंडारी, प्रगट सिंह सतौज, नंद भारद्वाज, कुम वीरभद्रप्पा, रहमत तारिकी, गुलाम नबी ख्याल, मुनव्वर राना, सारा जोसेफ, होमेन बरगोहेन और कात्यानी विदमहे के नाम शामिल हैं।
इस अभियान से जुड़े अनिल पांडेय और संजीव सिन्हा के अनुसार सिर्फ किताबें लिख देना, फ़िल्में बना देना या कुछ रिसर्च कर देना ही सब कुछ नहीं हो सकता। अगर किताबें लिखी हैं और उस पर अपने आपको सम्मानित होते देखा, तो वो सम्मान किसी लेखक का नहीं बल्कि उस पाठक का है जिसने उक्त विषय को सराहा है। इतने बड़े-बड़े विद्वान इस छोटी सी बात को क्यों भूल गए और अपने लाभ-हानि के आधार पर एक बड़ी आबादी, जिसे विषय के आधार पर कभी पाठक तो कभी दर्शक तो कभी उपभोक्ता कहते हैं, को विस्मृत कैसे कर दिया। और जब उन्होंने विस्मृत कर ही दिया, तो फिर उनकी रचनाओं को अपने सेल्फ में सजाने से क्या लाभ।
अभियान से जुड़े हुए  शिवानंद द्विवेदी सहर का कहना है कि आइये, इस बड़े अभियान से जुड़ते हैं और उनकी अपनी सामग्री को उनके घर तक पहुंचा कर उन महान साहित्यकारों का सम्मान करते हैं जिन्होंने अपना सम्मान वापस कर दिया है।
वहीं, अभियान से जुड़े हुए  आशीष अंशु  का कहना है कि साहित्य अकादमी पुरस्कार अब तक एक हजार एक सौ दस लोगों को दिया गया है, जिसमें 536 लोग जीवित हैं। इनमें 26 साहित्यकारों ने अपना साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाया है। बाल साहित्य की श्रेणी में 144 लेखकों को पुरस्कृत किया गया। जिनमें 128 लेखक जीवित हैं। इसमें सिर्फ एक लेखक ने अपना पुरस्कार लौटाया है। अनुवाद में 500 लेखकों को सम्मानित किया गया है। सभी अनुवादक जीवित हैं। तीन लेखकों ने पुरस्कार लौटाया है। युवा पुरस्कार 111 लेखकों दिया गया है। उनमें सिर्फ एक लेखक ने पुरस्कार लौटाने की सूचना ई-मेल के माध्यम से अकादमी को दी है। पुरस्कार लौटाया नहीं है। वैसे अकादमी ने सम्मान लौटाने वाले लेखकों को एक पत्र लिखा है, जिसमें उनसे यह आग्रह किया गया है कि वे अपने सम्मान वापसी पर पुनर्विचार करें।

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