लाइफस्टाइल डेस्कः दिल से जुड़े रोग, पार्किंसन्स, डायबिटीज व
मेमोरी लॉस तब होते थे, जब व्यक्ति रिटायरमेंट के करीब पहुंचता था। आज तो
ये करियर की शुरुआत या बीच में ही लोगों को घेरने लगे हैं। रिसर्च से
साबित हो चुका है कि युवा न तो खानपान पर ध्यान दे पा रहे हैं, न ही नींद
पूरी ले रहे हैं। इससे बढ़ रहे तनाव का सेहत पर बहुत ही बुरा असर पड़ रहा
है।
हार्ट, मेमोरी और शुगर से जुड़ी बीमारियां पहले उम्रदराज लोगों को ही
होती थीं, लेकिन अब यह धारणा गलत साबित हो रही है। आज 40 से कम उम्र के लोग
भी बुढ़ापे में होने वाली इन बीमारियों से जूझ रहे हैं।
हार्ट डिसीज
पहले हार्ट से जुड़ी बीमारियां आमतौर पर अधेड़ उम्र में ही होती थीं,
लेकिन अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी की एक रिसर्च बताती है कि अब 30 से 35
साल के युवाओं में दिल संबंधी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों
के मुताबिक, यंग एज में ही हार्ट डिसीज की समस्या पूरी दुनिया में बढ़ती जा
रही है और इसके पीछे लाइफस्टाइल में आया चेंज है।
सबसे बड़ा कारण- हार्टकेयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के मुताबिक इसकी
वजह तनाव, असंतुलित भोजन, कम सो पाना और शराब व तंबाकू का अधिक यूज करना
है। करियर की महत्वाकांक्षा और प्रतिस्पर्धा के कारण युवा जबरदस्त तनाव से
गुजर रहे हैं।
30 एमएमएचजी या इससे ऊपर ब्लड प्रेशर बना रहा तो वो हाई ब्लड प्रेशर की श्रेणी में आ जाता है।
Other diseases: डायबिटीज, पार्किंसन्स, याददाश्त कम होना, थायरॉइड
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