जयपुर। एक साढ़े पांच महीने के बच्चे को उसके मां-बाप द्वारा
एक बाबा को सौंप दिए जाने के बाद बच्चे के दादा द्वारा उसकी कस्टडी को लेकर
कोर्ट जाने का मामला सामने आया है। मां-बाप पर आरोप है कि उन्होंने बेटे
को बाबा की अरबों की संपत्ति का वारिस बनाने के लिए ऐसा किया। वहीं, दादा
का कहना है कि बाबा एक तांत्रिक है, जो उसके पोते की बलि चढ़ाना चाहता है।
यहां की एक अदालत को इस मामले में शनिवार को फैसला करना है।
क्या है पूरा मामला?
राजस्थान के अजमेर के रहने वाले कपल ने 23 जुलाई को अपने दूसरे बच्चे को खंडवा के बाबा रामदयाल को सौंप दिया। बच्चे की मां डॉ पूजा लेक्चरर हैं, जबकि पिता पवन बिल्डर हैं। रामदयाल का खंडवा में आश्रम है। उनके अनुयायी उन्हें छोटे सरकार कहकर पुकारते हैं। खबरों के मुताबिक, रामदयाल इंजीनियर रह चुके हैं। रामदयाल का कहना है कि यदि उन्होंने यह बच्चा नहीं सौंपा गया होता तो उनकी अरबों की संपत्ति का वारिस मिलना मुश्किल हो जाता। खबर के मुताबिक, मां-बाप ने बच्चे का नाम मुल्कराज रखा था। रामदयाल ने उसका नाम बदलकर अनंतदयाल कर दिया। पवन और पूजा का एक बेटा और है, जिसकी उम्र 8 साल है।
राजस्थान के अजमेर के रहने वाले कपल ने 23 जुलाई को अपने दूसरे बच्चे को खंडवा के बाबा रामदयाल को सौंप दिया। बच्चे की मां डॉ पूजा लेक्चरर हैं, जबकि पिता पवन बिल्डर हैं। रामदयाल का खंडवा में आश्रम है। उनके अनुयायी उन्हें छोटे सरकार कहकर पुकारते हैं। खबरों के मुताबिक, रामदयाल इंजीनियर रह चुके हैं। रामदयाल का कहना है कि यदि उन्होंने यह बच्चा नहीं सौंपा गया होता तो उनकी अरबों की संपत्ति का वारिस मिलना मुश्किल हो जाता। खबर के मुताबिक, मां-बाप ने बच्चे का नाम मुल्कराज रखा था। रामदयाल ने उसका नाम बदलकर अनंतदयाल कर दिया। पवन और पूजा का एक बेटा और है, जिसकी उम्र 8 साल है।
कोर्ट में क्यों पहुंचा मामला?
बच्चे के दादा राजेंद्र पुरोहित ने कोर्ट में कहा कि बाबा तांत्रिक है और बच्चे पर जादू-टोना करेगा। सीआरपीएफ से रिटायर राजेंद्र को डर है कि कहीं रामदयाल उनके पोते की बलि न दे दे। राजेंद्र के मुताबिक, वह अपने पोते को वापस लेने रामदयाल के पास गए थे, लेकिन उन्हें डरा धमकाकर वापस भेज दिया गया। राजेंद्र के वकील की दलील है कि रामदयाल की शादी नहीं हुई। ऐसा व्यक्ति परिवार या बच्चा गोद लेने के बारे में कैसे सोच सकता है?
बच्चे के दादा राजेंद्र पुरोहित ने कोर्ट में कहा कि बाबा तांत्रिक है और बच्चे पर जादू-टोना करेगा। सीआरपीएफ से रिटायर राजेंद्र को डर है कि कहीं रामदयाल उनके पोते की बलि न दे दे। राजेंद्र के मुताबिक, वह अपने पोते को वापस लेने रामदयाल के पास गए थे, लेकिन उन्हें डरा धमकाकर वापस भेज दिया गया। राजेंद्र के वकील की दलील है कि रामदयाल की शादी नहीं हुई। ऐसा व्यक्ति परिवार या बच्चा गोद लेने के बारे में कैसे सोच सकता है?
क्या कहा कोर्ट ने?
शुक्रवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने सवाल किया, ''कोई कैसे किसी बाबा को साढ़े पांच माह का बच्चा दान कर सकता है?'' फिर आदेश दिए कि बच्चे को कोर्ट में पेश किया जाए। कोर्ट के मुताबिक, बच्चा अभी खुद फैसला करने की हालत में नहीं है कि उसे किसके साथ रहना है, ऐसे में यह मामला बेहद अहम है। कोर्ट ने शनिवार को दोबारा से सुनवाई करने का फैसला किया।
शुक्रवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने सवाल किया, ''कोई कैसे किसी बाबा को साढ़े पांच माह का बच्चा दान कर सकता है?'' फिर आदेश दिए कि बच्चे को कोर्ट में पेश किया जाए। कोर्ट के मुताबिक, बच्चा अभी खुद फैसला करने की हालत में नहीं है कि उसे किसके साथ रहना है, ऐसे में यह मामला बेहद अहम है। कोर्ट ने शनिवार को दोबारा से सुनवाई करने का फैसला किया।
क्या है मां-बाप का पक्ष?
बच्चे के मां-बाप की ओर से वकील हेमंत नाहटा ने दलील दी कि रामदयाल बेहद सम्मानित व्यक्ति हैं। उनसे बच्चे को कोई खतरा नहीं है। वे उसकी अच्छे से देखभाल करेंगे और एजुकेशन के लिए विदेश भी भेजेंगे। मां-बाप का पक्ष रखने वाले एक अन्य वकील अमित पारिक ने भी कहा कि बच्चे को अडॉप्ट किए जाने की प्रक्रिया बिलकुल ठीक है।
क्या कहते हैं कानून के जानकार बच्चे के मां-बाप की ओर से वकील हेमंत नाहटा ने दलील दी कि रामदयाल बेहद सम्मानित व्यक्ति हैं। उनसे बच्चे को कोई खतरा नहीं है। वे उसकी अच्छे से देखभाल करेंगे और एजुकेशन के लिए विदेश भी भेजेंगे। मां-बाप का पक्ष रखने वाले एक अन्य वकील अमित पारिक ने भी कहा कि बच्चे को अडॉप्ट किए जाने की प्रक्रिया बिलकुल ठीक है।
सीनियर एडवोकेट एके जैन का कहना है कि हिंदू एडॉप्शन एक्ट में बच्चे को गोद लेने का प्रावधान है, लेकिन कुछ बातें परंपराओं के आधार पर तय होती हैं। अभी तक ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है जिसमें किसी बाबा को मां ने अपना बच्चा दिया हो। कानून के पास यह अधिकार है कि वह मां की इच्छा के खिलाफ बच्चे को ऐसे हाथों में सौंप सकता है, जहां उसके अधिकार सुरक्षित हों।
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