Saturday, 18 April 2015

J&K प्रदर्शनः पुलिस ने माना-CRPF की गलती से मारा गया नौवीं का स्टूडेंट

श्रीनगर. जम्मू-कश्मीर के नारबल में शनिवार को हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान नौवीं एक छात्र की सीआरपीएफ की फायरिंग में मौत मामले में पुलिस ने सुरक्षा बल को जिम्मेदार ठहराया है। पुलिस ने इस मामले में हत्या का मामला दर्ज किया है। राज्य पुलिस का कहना है कि सीआरपीएफ की ओर से शनिवार को विरोध-प्रदर्शन पर काबू पाने के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर (एसओपी) का पालन नहीं किया गया, जिसके कारण स्टूडेंट गोली का शिकार हुआ। नारबाल में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पोस्ट को आग के हवाले कर दिया था जिसके बाद जवानों की फायरिंग में सुहेल अहमद नाम का एक 16 साल का स्टूडेंट मारा गया था, जबकि अन्य दो घायल हुए। बता दें कि अलगाववादी नेता मसरत आलम की गिरफ्तारी और त्राल में पिछले दिनों हुए एनकाउंटर के खिलाफ शनिवार को हुर्रियत ने घाटी में बंद का आह्वान किया था।
फायरिंग की जांच के आदेश
जानकारी के मुताबिक, सीआरपीएफ की ओर से की गई फायरिंग की प्राथमिक जांच के आदेश दे दिए गए हैं। पुलिस प्रवक्ता ने बताया,'' मागाम क्षेत्र में नरबल-गुलमर्ग सड़क पर भी वाहनों पर पथराव के बाद पुलिस के साथ अर्द्धसैन्य बलों को वहां तैनात किया गया था। उसी दौरान प्रदर्शनकारियों की ओर से भारी पथराव किया गया। स्थिति पर काबू में करने के लिए पुलिस ने हवा में गोलियां चलाई जिससे कि सुहेल घायल हो गया।'' वहीं, जम्मू-कश्मीर पुलिस ने इस मामले में हत्या का मामला दर्ज किया है। पुलिस प्रवक्ता ने कहा “हमें इस घटना पर दुख है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि सुरक्षाबलों ने कानून के उल्लंघन के आरोप में कार्रवाई की। इस संबंध में मागाम पुलिस थाणे में भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 147, 149, 341, 427 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और आगे कार्रवाई की जाएगी।”
गिलानी के बाद मीरवाइज भी नज़रबंद
हुर्रियत कांफ्रेंस के कट्टरपंथी धड़े के अध्यक्ष सैयद अली शाह गिलानी के बाद मीरवाइज मौलवी उमर फारूक को भी आज नजरबंद कर दिया गया। त्राल में शुक्रवार को मीरवाइज ने रैली की अगुआई की थी। मीरवाइज ने त्राल की घटना के बाद शेर-ए-खास के नौहत्ता क्षेत्र में जुमे की नमाज के बाद एक विरोध रैली का नेतृत्व किया था ,जिसके बाद उस क्षेत्र में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प हो गई थी।
राज्य सरकार के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि घाटी में कानून एवं व्यवस्था बनाये रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। बता दें कि गत 15 अप्रैल को नई दिल्ली से लौटे गिलानी तथा मसरत आलम और कुछ अन्य के खिलाफ बड़गाम जिले के हुमहामा थाने में गैरकानूनी गतिविधि निरोधक कानून के तहत मामला दर्ज कराए जाने के बाद गत 16 अप्रैल की शाम को नजरबंद किया गया था। प्रशासन का कहना है कि अगले आदेश तक मीरवाइज को रिहा नहीं किया जाएगा। डेमोक्रेटिक फ्रीडम पार्टी (डीएफपी) के अध्यक्ष शबीर अहमद शाह और नेशनल फ्रंट (एनएफ) के प्रमुख नइम अहमद खान भी पिछले दो दिनों से नजरबंद हैं।

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