Monday, 6 April 2015

यह शहर भाई-भतीजावाद पर बसा है

यह शहर भाई-भतीजावाद पर बसा है।’
अमेरिकी एक्टर और कॉमेडी किंग डेमन वाएंस का यह एक मशहूर कथन है। यह बताता है कि दुनिया में प्रतिभा को सबसे बड़ा खतरा परिवारवाद से ही है। काफी प्रतिभाएं भाई-भतीजों के चक्रव्यूह के आगे पलायन कर जाती हैं या कुंठित होकर रह जाती हैं।
चंडीगढ़ के प्रतिष्ठित संस्थान पीजीआई में इस बीमारी के लक्षण लंबे समय से देखे जा रहे हैं। मरीजों से ज्यादा संस्थान की प्रतिभाएं, इसके साये में घुट रही हैं। विदेशी मित्रों के बीच यह गर्वोक्ति भी उन्हें भारी पड़ती है कि पीजीआई में हर साल 1100 से ज्यादा रिसर्च होते हैं। पलट कर पूछ लिया जाता है, ‘अच्छा! कितने नोबेल मिले हैं?’
दुनिया हमारे रिसर्च के स्तर का इसी पैमाने पर मूल्यांकन करती है। दूसरी ओर हमारे कर्त्ता-धर्त्ता इसी गर्व में फूले रहते हैं कि वे और उनके भाई-भतीजे, बेटी-दमाद ही दुनिया में सबसे योग्य हैं। दुनिया सवाल करती है कि पीजीआई के हार्ट ट्रांसप्लांट, पैंक्रियाज ट्रांसप्लांट क्यों फेल हो जाते हैं। दुनिया में अब यह काम कोई अजूबा नहीं रहा है।
भाई-भतीजावाद के समर्थक ये कह सकते हैं कि प्रत्यारोपण के केस सफल और असफल होना मरीज और परिस्थिति पर निर्भर करता है। असफलताओं के बावजूद भी हम सब योग्य हैं। इस पर सवाल नहीं उठाया जा सकता। मगर वे नहीं जानते कि भाई-भतीजावाद से जुड़ी एक सबसे बड़ी समस्या ही यह है कि लोग इसे समस्या ही नहीं मानते। इस वजह से जो क्षति होती है, उसे हर प्रतिभा भोगती है। पूरा राष्ट्र भोगता है।
मुंबई। सुशांत सिंह राजपूत की फिल्म 'डिटेक्टिव ब्योमकेश बक्शी' ने रविवार को भी बॉक्स-ऑफिस पर ठीक-ठाक कलेक्शन बटोरा। रविवार को फिल्म की कमाई 5.36 करोड़ रही।
दीपिका पादुकोण ने इस हीरो के साथ बिताई पूरी रात...!
वीकेंड पर फिल्म ने 14.06 करोड़ का बिजनेस किया है। व्यापार विश्लेषक तरण आदर्श ने ट्विटर पर फिल्म के कलेक्शन की जानकारी दी। उन्होंने ट्वीट किया, 'डिटेक्टिव ब्योमकेश बक्शी ने शुक्रवार को 4.20 करोड़, शनिवार को 4.50 करोड़ और रविवार को 5.36 करोड़ कमाए। भारत में कुल व्यापार 14.06 करोड़।'
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