Sunday, 5 April 2015

पोस्ट कार्ड पर 7 और अंतर्देशीय पर 5 रुपए का नुकसान

नई दिल्ली । डाक विभाग को हर पोस्टकार्ड पर सात रुपए से अधिक और अंतर्देशीय पत्र पर करीब पांच रुपए का नुकसान हो रहा है क्योंकि अब तक इनसे होने वाली आय वास्तविक लागत से काफी कम रही है। डाक विभाग के 2013-14 के आंकड़ों के मुताबिक पोस्टकार्ड की औसत लागत 753.37 पैसे है जबकि आय 50 पैसे है। इधर, अंतर्देशीय पत्र की लागत 748.39 पैसे है और आय 250 पैसे यानी ढाई रपए है। प्रतिस्पर्धा पोस्टकार्ड, पत्र और पत्र-पत्रिकाओं के बुकपोस्ट को छो़ड़कर डाक विभाग की ज्यादातर सेवाओं पर नुकसान हो रहा है।

पार्सल, रजिस्ट्री, स्पीड पोस्ट, बीमा, मनी ऑर्डर, इंडियन पोस्टल ऑर्डर और पंजीकृत समाचार-पत्र जैसी सेवाओं के लिए अर्जित आय औसत लागत से कम है। डाक विभाग की सालाना रपट के मुताबिक वित्त वर्ष 2013-14 के दौरान विभाग का घाटा 0.87 प्रतिशत बढ़कर 5,473.1 करोड़ रुपए हो गया जबकि पिछले वित्त वर्ष के दौरान 5,425.89 करोड़ रुपए था। डाक विभाग अपने डाक घरों के विशाल नेटवर्क के जरिए लोगों को डाक सेवाएं प्रदान करता है। डाक विभाग ने कहा कि बचत बैंक और बचत प्रमाण-पत्र के जरिए 2013--14 में 10,730.41 करोड़ रुपए की आय हुई जबकि कुल कार्य व्यय 16706.7 करोड़ रुपए रहा। विभाग ने हालांकि अन्य मंत्रालयों और विभागों से 593.18 करोड़ रुपए जुटाए। इस तरह समीक्षाधीन अवधि में घाटा 5473.1 करोड़ रुपए रहा।

33 हजार वस्तुओं की नीलामी करेगा डाक विभाग

डाक विभाग के पास 33 हजार से अधिक ऐसी वस्तुएं पड़ी हैं जो लोगों ने डाक से अपने परिचितों को भेजीं लेकिन भेजे गए पतों पर कोई दावेदार नहीं मिला और वे लौटकर आ गई। इन वस्तुओं में ज्वेलरी, मोबाइल फोन, कैमरा और घड़ियां जैसी कीमती चीजें हैं। अब डाक विभाग इनकी जल्द ही नीलामी के बारे में सोच रहा है। एक आरटीआई आवेदन के जवाब में विभाग ने बताया कि वर्ष 2012 में 8070, 2013 में 11938 और 2014 में 13075 डाक की डिलीवरी लौट आई। अभी तक इन्हें लेने के लिए सही दावेदार सामने नहीं आए हैं। लौटकर आई इन डाक और पार्सलों में ज्वेलरी, घड़ियां, मोबाइल फोन, कैमरा, किताबें, स्टेशनरी आदि हैं। ये डिलीवरी नहीं हुई चीजें रिट‌र्न्ड लेटर ऑफिस में पड़ी हैं। इन डाक और पार्सलों को भेजने वाले और पाने वाले दोनों का ही पता नहीं है। विभाग ने 2010 में दो बार और 2011 में 5 बार नीलामी की थी और इससे 1.11 लाख रुपए मिले थे।
 
नई दिल्ली । डाक विभाग को हर पोस्टकार्ड पर सात रुपए से अधिक और अंतर्देशीय पत्र पर करीब पांच रुपए का नुकसान हो रहा है क्योंकि अब तक इनसे होने वाली आय वास्तविक लागत से काफी कम रही है। डाक विभाग के 2013-14 के आंकड़ों के मुताबिक पोस्टकार्ड की औसत लागत 753.37 पैसे है जबकि आय 50 पैसे है। इधर, अंतर्देशीय पत्र की लागत 748.39 पैसे है और आय 250 पैसे यानी ढाई रपए है। प्रतिस्पर्धा पोस्टकार्ड, पत्र और पत्र-पत्रिकाओं के बुकपोस्ट को छो़ड़कर डाक विभाग की ज्यादातर सेवाओं पर नुकसान हो रहा है।
पार्सल, रजिस्ट्री, स्पीड पोस्ट, बीमा, मनी ऑर्डर, इंडियन पोस्टल ऑर्डर और पंजीकृत समाचार-पत्र जैसी सेवाओं के लिए अर्जित आय औसत लागत से कम है। डाक विभाग की सालाना रपट के मुताबिक वित्त वर्ष 2013-14 के दौरान विभाग का घाटा 0.87 प्रतिशत बढ़कर 5,473.1 करोड़ रुपए हो गया जबकि पिछले वित्त वर्ष के दौरान 5,425.89 करोड़ रुपए था। डाक विभाग अपने डाक घरों के विशाल नेटवर्क के जरिए लोगों को डाक सेवाएं प्रदान करता है। डाक विभाग ने कहा कि बचत बैंक और बचत प्रमाण-पत्र के जरिए 2013--14 में 10,730.41 करोड़ रुपए की आय हुई जबकि कुल कार्य व्यय 16706.7 करोड़ रुपए रहा। विभाग ने हालांकि अन्य मंत्रालयों और विभागों से 593.18 करोड़ रुपए जुटाए। इस तरह समीक्षाधीन अवधि में घाटा 5473.1 करोड़ रुपए रहा।
33 हजार वस्तुओं की नीलामी करेगा डाक विभाग
डाक विभाग के पास 33 हजार से अधिक ऐसी वस्तुएं पड़ी हैं जो लोगों ने डाक से अपने परिचितों को भेजीं लेकिन भेजे गए पतों पर कोई दावेदार नहीं मिला और वे लौटकर आ गई। इन वस्तुओं में ज्वेलरी, मोबाइल फोन, कैमरा और घड़ियां जैसी कीमती चीजें हैं। अब डाक विभाग इनकी जल्द ही नीलामी के बारे में सोच रहा है। एक आरटीआई आवेदन के जवाब में विभाग ने बताया कि वर्ष 2012 में 8070, 2013 में 11938 और 2014 में 13075 डाक की डिलीवरी लौट आई। अभी तक इन्हें लेने के लिए सही दावेदार सामने नहीं आए हैं। लौटकर आई इन डाक और पार्सलों में ज्वेलरी, घड़ियां, मोबाइल फोन, कैमरा, किताबें, स्टेशनरी आदि हैं। ये डिलीवरी नहीं हुई चीजें रिट‌र्न्ड लेटर ऑफिस में पड़ी हैं। इन डाक और पार्सलों को भेजने वाले और पाने वाले दोनों का ही पता नहीं है। विभाग ने 2010 में दो बार और 2011 में 5 बार नीलामी की थी और इससे 1.11 लाख रुपए मिले थे।
- See more at: http://www.jagran.com/news/national-there-is-loss-7-rs-on-post-cards-and-5-rs-on-inland-letters-12234554.html#sthash.3yshNnZ1.dpufनई दिल्ली । डाक विभाग को हर पोस्टकार्ड पर सात रुपए से अधिक और अंतर्देशीय पत्र पर करीब पांच रुपए का नुकसान हो रहा है क्योंकि अब तक इनसे होने वाली आय वास्तविक लागत से काफी कम रही है। डाक विभाग के 2013-14 के आंकड़ों के मुताबिक पोस्टकार्ड की औसत लागत 753.37 पैसे है जबकि आय 50 पैसे है। इधर, अंतर्देशीय पत्र की लागत 748.39 पैसे है और आय 250 पैसे यानी ढाई रपए है। प्रतिस्पर्धा पोस्टकार्ड, पत्र और पत्र-पत्रिकाओं के बुकपोस्ट को छो़ड़कर डाक विभाग की ज्यादातर सेवाओं पर नुकसान हो रहा है।

पार्सल, रजिस्ट्री, स्पीड पोस्ट, बीमा, मनी ऑर्डर, इंडियन पोस्टल ऑर्डर और पंजीकृत समाचार-पत्र जैसी सेवाओं के लिए अर्जित आय औसत लागत से कम है। डाक विभाग की सालाना रपट के मुताबिक वित्त वर्ष 2013-14 के दौरान विभाग का घाटा 0.87 प्रतिशत बढ़कर 5,473.1 करोड़ रुपए हो गया जबकि पिछले वित्त वर्ष के दौरान 5,425.89 करोड़ रुपए था। डाक विभाग अपने डाक घरों के विशाल नेटवर्क के जरिए लोगों को डाक सेवाएं प्रदान करता है। डाक विभाग ने कहा कि बचत बैंक और बचत प्रमाण-पत्र के जरिए 2013--14 में 10,730.41 करोड़ रुपए की आय हुई जबकि कुल कार्य व्यय 16706.7 करोड़ रुपए रहा। विभाग ने हालांकि अन्य मंत्रालयों और विभागों से 593.18 करोड़ रुपए जुटाए। इस तरह समीक्षाधीन अवधि में घाटा 5473.1 करोड़ रुपए रहा।

33 हजार वस्तुओं की नीलामी करेगा डाक विभाग

डाक विभाग के पास 33 हजार से अधिक ऐसी वस्तुएं पड़ी हैं जो लोगों ने डाक से अपने परिचितों को भेजीं लेकिन भेजे गए पतों पर कोई दावेदार नहीं मिला और वे लौटकर आ गई। इन वस्तुओं में ज्वेलरी, मोबाइल फोन, कैमरा और घड़ियां जैसी कीमती चीजें हैं। अब डाक विभाग इनकी जल्द ही नीलामी के बारे में सोच रहा है। एक आरटीआई आवेदन के जवाब में विभाग ने बताया कि वर्ष 2012 में 8070, 2013 में 11938 और 2014 में 13075 डाक की डिलीवरी लौट आई। अभी तक इन्हें लेने के लिए सही दावेदार सामने नहीं आए हैं। लौटकर आई इन डाक और पार्सलों में ज्वेलरी, घड़ियां, मोबाइल फोन, कैमरा, किताबें, स्टेशनरी आदि हैं। ये डिलीवरी नहीं हुई चीजें रिट‌र्न्ड लेटर ऑफिस में पड़ी हैं। इन डाक और पार्सलों को भेजने वाले और पाने वाले दोनों का ही पता नहीं है। विभाग ने 2010 में दो बार और 2011 में 5 बार नीलामी की थी और इससे 1.11 लाख रुपए मिले थे।
 
नई दिल्ली । डाक विभाग को हर पोस्टकार्ड पर सात रुपए से अधिक और अंतर्देशीय पत्र पर करीब पांच रुपए का नुकसान हो रहा है क्योंकि अब तक इनसे होने वाली आय वास्तविक लागत से काफी कम रही है। डाक विभाग के 2013-14 के आंकड़ों के मुताबिक पोस्टकार्ड की औसत लागत 753.37 पैसे है जबकि आय 50 पैसे है। इधर, अंतर्देशीय पत्र की लागत 748.39 पैसे है और आय 250 पैसे यानी ढाई रपए है। प्रतिस्पर्धा पोस्टकार्ड, पत्र और पत्र-पत्रिकाओं के बुकपोस्ट को छो़ड़कर डाक विभाग की ज्यादातर सेवाओं पर नुकसान हो रहा है।
पार्सल, रजिस्ट्री, स्पीड पोस्ट, बीमा, मनी ऑर्डर, इंडियन पोस्टल ऑर्डर और पंजीकृत समाचार-पत्र जैसी सेवाओं के लिए अर्जित आय औसत लागत से कम है। डाक विभाग की सालाना रपट के मुताबिक वित्त वर्ष 2013-14 के दौरान विभाग का घाटा 0.87 प्रतिशत बढ़कर 5,473.1 करोड़ रुपए हो गया जबकि पिछले वित्त वर्ष के दौरान 5,425.89 करोड़ रुपए था। डाक विभाग अपने डाक घरों के विशाल नेटवर्क के जरिए लोगों को डाक सेवाएं प्रदान करता है। डाक विभाग ने कहा कि बचत बैंक और बचत प्रमाण-पत्र के जरिए 2013--14 में 10,730.41 करोड़ रुपए की आय हुई जबकि कुल कार्य व्यय 16706.7 करोड़ रुपए रहा। विभाग ने हालांकि अन्य मंत्रालयों और विभागों से 593.18 करोड़ रुपए जुटाए। इस तरह समीक्षाधीन अवधि में घाटा 5473.1 करोड़ रुपए रहा।
33 हजार वस्तुओं की नीलामी करेगा डाक विभाग
डाक विभाग के पास 33 हजार से अधिक ऐसी वस्तुएं पड़ी हैं जो लोगों ने डाक से अपने परिचितों को भेजीं लेकिन भेजे गए पतों पर कोई दावेदार नहीं मिला और वे लौटकर आ गई। इन वस्तुओं में ज्वेलरी, मोबाइल फोन, कैमरा और घड़ियां जैसी कीमती चीजें हैं। अब डाक विभाग इनकी जल्द ही नीलामी के बारे में सोच रहा है। एक आरटीआई आवेदन के जवाब में विभाग ने बताया कि वर्ष 2012 में 8070, 2013 में 11938 और 2014 में 13075 डाक की डिलीवरी लौट आई। अभी तक इन्हें लेने के लिए सही दावेदार सामने नहीं आए हैं। लौटकर आई इन डाक और पार्सलों में ज्वेलरी, घड़ियां, मोबाइल फोन, कैमरा, किताबें, स्टेशनरी आदि हैं। ये डिलीवरी नहीं हुई चीजें रिट‌र्न्ड लेटर ऑफिस में पड़ी हैं। इन डाक और पार्सलों को भेजने वाले और पाने वाले दोनों का ही पता नहीं है। विभाग ने 2010 में दो बार और 2011 में 5 बार नीलामी की थी और इससे 1.11 लाख रुपए मिले थे।
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