Friday, 1 May 2015

काठमांडू. नेपाल में आए भूकंप के 22 घंटे बाद मलबे से जीवित बचाए निकाले गए चार महीने के सोनित अवाल की मां का कहना है कि जितनी देर वह मलबे में दबा रहा उसके रोने और चीखों की आवाज उन्हें सुनाई देती रही। सोनित जिस जगह मलबे में दबा था वहां उसके ऊपर एक मजबूत कपबोर्ड उसके ऊपर था और राहतकर्मी मान रहे हैं कि इस कपबोर्ड के चलते ही सोनित का बाल भी बांका नहीं हुआ।
क्या कहा सोनित की मां ने
सोनित की मां रशिमला अवाल अब राहत कर्मियों का तहेदिल से शुक्रिया अदा कर रही हैं। हालांकि सोनित को बचाने में उसके पिता का भी योगदान कम नहीं रहा। उसके पिता ने अकेले के दम पर खाली हाथों से उस चट्टान को हटाने की कोशिश की जहां सोनित दबा था और जहां से उसके रोने की आवाज लगातार सुनाई दे रही थी। जिस समय भूकंप आया उस समय सोनित सो रहा था और उसकी मां कुछ काम कर रही थीं। उनका चार मंजिला मकान भूकंप में भरभराकर गिर गया और सोनित उसमें दब गया। सोनित की मां और पिता पूरे समय अपने पड़ोसियों के साथ मिलकर उसे खोजते रहे। काफी देर बाद उसके रोने की आवाज उन्हें सुनने मिली। सोनित की मां ने कहा कि उन्होंने अपने बेटे को बचाने के लिए हर मुमकिन कोशिश की लेकिन राहत कर्मियों के पहुंचने के बाद उन्हें यकीन हो गया कि सोनित को कुछ नहीं होगा क्योंकि हम खाली हाथ थे जबकि राहतकर्मियों के पास उपकरण थे।
बेघर हुआ परिवार

सोनित को बचा लिया गया और परिवार की खुशी का कोई ठिकाना नहीं है लेकिन अवाल परिवार अब बेघर हो चुका है। उनका मकान किसी मलबे के ढेर से ज्यादा कुछ नहीं है। सोनित की मां और उसके पिता किसी तरह खुले में रह रहे हैं। लेकिन सोनित की मां कहती हैं कि घर आज नहीं तो कल फिर बना लिया जाएगा लेकिन सोनित को भगवान ने बचा लिया। सोनित के पिता श्याम ड्राइवर हैं और घटना के दिन वह घर पर नहीं थे।

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