Saturday, 5 December 2015

एक्सेसेबल इंडिया के बाद भगवान जाने मोदी क्या ले आएं - राहुल गांधी

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (इंटक) की रैली में प्रधानमंत्री पर तीखा हमला बोला। उन्होंने पीएम मोदी के 'मेक इन इंडिया' मिशन समेत कई कैंपेन पर सवाल उठाए। राहुल ने कहा, "पहले अच्छे दिन, फिर स्वच्छ भारत उसके बाद मेक इन इंडिया और अब एक्सेसेबल इंडिया, इसके बाद भगवान जाने क्या आए?"
फेसबुक, ट्विटर के ही दिन आ गए
राहुल गांधी ने कहा, "मुझे आजकल फेसबुक, ट्विटर और सेल्फी के ही दिन आ गए लगते हैं। हम लोग डेवलपमेंट और ग्रोथ जैसे वर्ड सुनते हैं और इन पर भरोसा कर लेते हैं। लेकिन इसके पीछे की सच्चाई देखें क्या है?" उन्होंने सवाल उठाया किसका विकास हो रहा है, यह ग्रोथ किसके लिए, डेवलपमेंट किसका और इससे किसे फायदा मिल रहा है। उन्होंने कहा कि आज देश में सिर्फ 30-35 लोग ही अरबपति हैं।
'पीएम चाहते हैं मजदूर घुटने टेक दें'
पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए राहुल गांधी ने कहा, "पीएम चाहते हैं कि मजदूर अपने घुटने देक दें। लेकिन मैं आप लोगों को लोकसभा, राज्यसभा, पंचायत, नगरपालिका और कैबिनेट में देखना चाहता हूं। हम चाहते हैं कि इस देश की नींव आपके खून-पसीने और बच्चों के बेहतर फ्यूचर के साथ रखी जाए। कांग्रेस ने मजदूरों के लिए सुरक्षा जाल बिछाया, जिसे मोदी जी तोड़ना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि पीएम को कुछ वक्त उन लोगों के साथ भी गुजारना चाहिए जो वास्तव में मजदूरों से मिलते हैं और उनके बीच रहते हैं।"
मजदूरों को इज्जत मिलती है तो प्रोडक्टिविटी बढ़ती है
राहुल ने मजदूर कांग्रेस की रैली को संबोधित करते हुए कहा कि एक मजदूर तब अच्छा काम करता है, जब उसे इज्जत मिलती है। वो लोग सबसे ज्यादा प्रोडक्टिव तब होते हैं, जब आप उनसे बराबरी का बर्ताव करते हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा मजदूरों और किसानों की मदद के लिए आगे रही है। राहुल ने रैली में आए मजदूरों को भरोसा दिलाते हुए कहा, "हम आपके हक के लिए लड़ते रहे हैं और आगे भी लड़ेंगे।"
क्या है एक्सेसेबल इंडिया कैंपेन?
नरेंद्र मोदी की सरकार ने सितंबर, 2015 में एक्सेसेबल इंडिया कार्यक्रम के तहत विकलांग (डिफरेंटली एबल्ड) लोगों की मदद करने का कार्यक्रम शुरू किया है। इस कार्यक्रम का मकसद गवर्नमेंट बिल्डिंगों और ट्रांसपोर्ट सुविधाओं को इस तरह बनाए जाने पर जोर देना है, जिनका इस्तेमाल विकलांग (डिफरेंटली एबल्ड) भी आराम से कर पाएं। इस कार्यक्रम के तहत अलग-अलग राज्यों में कुछ सरकारी बिल्डिंगों को एक्सेसेबल फ्रेंडली बनाने के लिए चुना गया है।

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