पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने शनिवार को हिन्दुस्तान टाइम्स लीडरशिप
समिट में कश्मीर समेत तमाम मुद्दों पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि
कश्मीर मुद्दे के समाधान में कश्मीरियों और पाकिस्तान की भूमिका को स्वीकार
करने की पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की नीति से विवाद को सबसे
बेहतर तरीके से सुलझाया जा सकता है।
महबूबा मुफ्ती ने संकेत दिया कि सीमाओं में बदलाव या इलाकों की अदला-बदली, कश्मीर मुद्दे का हल नहीं हो सकता। उन्होंने इस बात की आशंका से इनकार किया कि इस्लामिक स्टेट जम्मू-कश्मीर में पैठ बना रहा है। साथ ही आईएस को इस्लाम के सिद्धांतों के खिलाफ बताया। महबूबा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की जनता से संवाद करने और पाकिस्तान की भूमिका को समाहित करने वाली वाजपेयी की नीति का कोई विकल्प नहीं है।
उन्होंने कहा, 'यह कश्मीर को किसी को देने का मसला नहीं है, आप ऐसा नहीं कर सकते। मेरे पिता वाजपेयी की प्रक्रिया को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाना चाहते हैं। जो कुछ मेरे पिता ने वाजपेयी के समय में किया था और जिसे डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार में आगे बढ़ाया गया, उसे नजरअंदाज कर दिया गया है।'
हालांकि पीडीपी नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर कहते हैं कि वह कश्मीर पर वाजपेयी नीति का अनुसरण करना चाहते हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या मोदी वाजपेयी की नीति को अपना रहे हैं, मुफ्ती ने कहा कि धीरे-धीरे वह इसकी ओर बढ़ रहे हैं, हम देख रहे हैं कि सुषमा स्वराज पाकिस्तान जा रही हैं।
उल्लेखनीय है कि जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी महबूबा गठबंधन सरकार में पर्दे के पीछे से अहम भूमिका निभा रही हैं। महबूबा ने बताया कि भाजपा से गठबंधन के लिए उनकी पार्टी का पहला एजेंडा था कि राज्य को विशेषाधिकार देने वाले अनुच्छेद 370 से कोई छेड़छाड़ नहीं होगी। उन्होंने देश से कश्मीर में शांति का समर्थन करने के साथ कश्मीरियों के दुख-दर्द को समझने की अपील की।
मुख्यमंत्री बनने के बारे में सोचना नहीं चाहती
मुफ्ती मोहम्मद सईद के स्थान पर मुख्यमंत्री बनने की क्या संभावना है, इस पर उन्होंने कहा, मैं इस सवाल से सहज नहीं हूं। मैं इस बारे में नहीं सोचना चाहती। मैं जनता के लिए काम कर रही हूं और आगे भी करती रहूंगी।
सहिष्णुता भारत की ताकत, अतिवादी तत्वों पर अंकुश लगे
पीडीपी की वरिष्ठ नेता महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि सहिष्णुता भारत की ताकत है, हिंदुत्व के नाम पर सक्रिय अतिवादी तत्वों पर अंकुश लगना चाहिए। उन्होंने इन तत्वों की तुलना इस्लाम का दुरुपयोग करने वाले आईएस तत्वों से की।
उन्होंने कहा कि हिंदुत्व ने हमें सहिष्णुता दी, जबकि इस्लाम ने समानता और ईसाइयत ने संवेदनशीलता और त्याग की सीख दी। महबूबा ने कहा, 'हमारे देश में सहिष्णुता देश की ताकत है, लेकिन अतिवादी तत्व भी हैं जो हिंदुत्व के नाम का दुरुपयोग कर रहे हैं और वे इसकी तुलना राष्ट्रवाद से करते हैं जो और भी खराब बात है। सीरिया, अफगानिस्तान, इराक में क्या हो रहा है, क्योंकि वे भी अतिवादी तत्व हैं जो इस्लाम के नाम का दुरुपयोग कर रहे हैं।' महबूबा ने कहा, 'जब लोग बढ़ती महंगाई से संघर्ष करने का प्रयास कर रहे हों, उन्हें प्याज नहीं मिलती हो और अचानक 'कुछ लोग यह कहना शुरू कर दें कि एक व्यक्ति को कौन सा मांस खाना चाहिए। यह नहीं होना चाहिए। यह स्वीकार्य नहीं।'
आईएस के उभार के लिए अमेरिका जिम्मेदार
मुफ्ती ने कहा कि आईएस के बढ़ते प्रभाव के लिए अफगानिस्तान और इराक में अमेरिकी सैन्य अभियान जिम्मेदार है, जिससे कुछ मुस्लिमों में पीडि़त होने की भावना पनपी। लेकिन यह दुनिया की जिम्मेदारी है कि आईएस की करतूतों के लिए मुस्लिमों को जिम्मेदार या संदेह की निगाह से न देखा जाए। भारतीय मुस्लिमों को सलाम करने की जरूरत है। दुनिया भर से लोग कश्मीर आए और हथियार उठाए, लेकिन भारतीय मुस्लिमों ने ऐसा नहीं किया
महबूबा मुफ्ती ने संकेत दिया कि सीमाओं में बदलाव या इलाकों की अदला-बदली, कश्मीर मुद्दे का हल नहीं हो सकता। उन्होंने इस बात की आशंका से इनकार किया कि इस्लामिक स्टेट जम्मू-कश्मीर में पैठ बना रहा है। साथ ही आईएस को इस्लाम के सिद्धांतों के खिलाफ बताया। महबूबा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की जनता से संवाद करने और पाकिस्तान की भूमिका को समाहित करने वाली वाजपेयी की नीति का कोई विकल्प नहीं है।
उन्होंने कहा, 'यह कश्मीर को किसी को देने का मसला नहीं है, आप ऐसा नहीं कर सकते। मेरे पिता वाजपेयी की प्रक्रिया को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाना चाहते हैं। जो कुछ मेरे पिता ने वाजपेयी के समय में किया था और जिसे डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार में आगे बढ़ाया गया, उसे नजरअंदाज कर दिया गया है।'
हालांकि पीडीपी नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर कहते हैं कि वह कश्मीर पर वाजपेयी नीति का अनुसरण करना चाहते हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या मोदी वाजपेयी की नीति को अपना रहे हैं, मुफ्ती ने कहा कि धीरे-धीरे वह इसकी ओर बढ़ रहे हैं, हम देख रहे हैं कि सुषमा स्वराज पाकिस्तान जा रही हैं।
उल्लेखनीय है कि जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी महबूबा गठबंधन सरकार में पर्दे के पीछे से अहम भूमिका निभा रही हैं। महबूबा ने बताया कि भाजपा से गठबंधन के लिए उनकी पार्टी का पहला एजेंडा था कि राज्य को विशेषाधिकार देने वाले अनुच्छेद 370 से कोई छेड़छाड़ नहीं होगी। उन्होंने देश से कश्मीर में शांति का समर्थन करने के साथ कश्मीरियों के दुख-दर्द को समझने की अपील की।
मुख्यमंत्री बनने के बारे में सोचना नहीं चाहती
मुफ्ती मोहम्मद सईद के स्थान पर मुख्यमंत्री बनने की क्या संभावना है, इस पर उन्होंने कहा, मैं इस सवाल से सहज नहीं हूं। मैं इस बारे में नहीं सोचना चाहती। मैं जनता के लिए काम कर रही हूं और आगे भी करती रहूंगी।
सहिष्णुता भारत की ताकत, अतिवादी तत्वों पर अंकुश लगे
पीडीपी की वरिष्ठ नेता महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि सहिष्णुता भारत की ताकत है, हिंदुत्व के नाम पर सक्रिय अतिवादी तत्वों पर अंकुश लगना चाहिए। उन्होंने इन तत्वों की तुलना इस्लाम का दुरुपयोग करने वाले आईएस तत्वों से की।
उन्होंने कहा कि हिंदुत्व ने हमें सहिष्णुता दी, जबकि इस्लाम ने समानता और ईसाइयत ने संवेदनशीलता और त्याग की सीख दी। महबूबा ने कहा, 'हमारे देश में सहिष्णुता देश की ताकत है, लेकिन अतिवादी तत्व भी हैं जो हिंदुत्व के नाम का दुरुपयोग कर रहे हैं और वे इसकी तुलना राष्ट्रवाद से करते हैं जो और भी खराब बात है। सीरिया, अफगानिस्तान, इराक में क्या हो रहा है, क्योंकि वे भी अतिवादी तत्व हैं जो इस्लाम के नाम का दुरुपयोग कर रहे हैं।' महबूबा ने कहा, 'जब लोग बढ़ती महंगाई से संघर्ष करने का प्रयास कर रहे हों, उन्हें प्याज नहीं मिलती हो और अचानक 'कुछ लोग यह कहना शुरू कर दें कि एक व्यक्ति को कौन सा मांस खाना चाहिए। यह नहीं होना चाहिए। यह स्वीकार्य नहीं।'
आईएस के उभार के लिए अमेरिका जिम्मेदार
मुफ्ती ने कहा कि आईएस के बढ़ते प्रभाव के लिए अफगानिस्तान और इराक में अमेरिकी सैन्य अभियान जिम्मेदार है, जिससे कुछ मुस्लिमों में पीडि़त होने की भावना पनपी। लेकिन यह दुनिया की जिम्मेदारी है कि आईएस की करतूतों के लिए मुस्लिमों को जिम्मेदार या संदेह की निगाह से न देखा जाए। भारतीय मुस्लिमों को सलाम करने की जरूरत है। दुनिया भर से लोग कश्मीर आए और हथियार उठाए, लेकिन भारतीय मुस्लिमों ने ऐसा नहीं किया
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